India alliance

  • कर्नाटक में एसआईआर के खिलाफ अभियान तेज करेगा इंडिया गठबंधन

    इंडिया गठबंधन कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ अभियान तेज करेगा और इस सिलसिले में विपक्षी दल शुक्रवार को बेंगलुरु में बैठक कर पात्र मतदाताओं के नाम कथित तौर पर सूची से हटाए जाने, मतदान के अधिकारों की रक्षा और संयुक्त राजनीतिक एवं कानूनी कार्रवाई की रणनीति पर विचार करेंगे। कर्नाटक कांग्रेस की ओर से बुलाई गई बैठक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद के नेतृत्व में होगी। इसमें मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), भाकपा (माले) लिबरेशन, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक और समाजवादी पार्टी सहित अन्य विपक्षी दलों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। कांग्रेस...

  • ज्ञानेश को हटाओ, SIR वापस लो: इंडिया गठबंधन का SC मार्च

    इंडिया गठबंधन के नेताओं और सांसदों ने वोट चोरी का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर रोक लगाने और 'वोट चोरी' के आरोपों की जांच की मांग को लेकर सोमवार को यहां बाराखंभा रोड से उच्चतम न्यायालय तक मार्च निकाला जिसमें बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी शामिल हुए। विपक्षी गठबंधन एसआईआर की प्रक्रिया पर रोक लगाने, मतदाता सूची से कथित तौर पर गलत तरीके से हटाए गए नामों के मामले में हस्तक्षेप करने और चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग कर रहा है। गठबंधन...

  • पहल लेने से हिचके

    विपक्षी दल “वोट चोरी” के सवाल पर पहल अपने हाथ में लेने से हिचक गए हैं। इसके बदले उन्होंने खुद को प्रतिरोध जताने और न्यायपालिका की पनाह में जाने के पारंपरिक तौर-तरीकों तक सीमित रखा है। पहले कांग्रेस कार्य समिति और फिर इंडिया गठबंधन की बैठक में जो तय हुआ, उसका सार है कि विपक्षी दल “वोट चोरी” के सवाल पर पहल अपने हाथ में लेने से हिचक गए हैं। इसके बदले उन्होंने खुद को प्रतिरोध जताने और न्यायपालिका की पनाह में जाने के पारंपरिक तौर-तरीकों तक सीमित रखा है। इस सवाल पर उनमें कितनी उलझन या अनमनापन है, वह...

  • रवैया जब टच एंड गो का है तब साथ आ कर भी विपक्ष कैसे आंदोलन ख़ड़ा करेगा?

    मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मनमानियों के खिलाफ विपक्षी पार्टियों की बैठक 30 सितंबर को दिल्ली में हो रही है। मई में भी विपक्षी गठबंधन यानी ‘इंडिया’ ब्लॉक की एक बैठक दिल्ली में हुई थी। तब जिन पार्टियों ने उससे दूरी बनाई थी वे भी इस बार की बैठक में शामिल हो रही हैं। इससे पार्टियों की गंभीरता का अहसास हो रहा है। लेकिन क्या सिर्फ एक साथ आकर बैठक कर लेना पर्याप्त होगा? देश के सामने जो अभूतपूर्व संकट दिख रहें हैं उससे निपटने के लिए पार्टियों...

  • विपक्ष की एकता कसौटी पर

    मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के मसले पर विपक्षी पार्टियों ने एकता दिखाई है। इसका खूब प्रचार भी किया गया है। कांग्रेस महासचिव और प्रचार विभाग के प्रमुख जयराम रमेश ने भी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि आठ जून को हुई ‘इंडिया’ ब्लॉक की बैठक में 21 पार्टियों के नेता शामिल हुए थे लेकिन उसमें पास किए गए प्रस्ताव के मुताबिक जब एसआईआर को लेकर चीफ जस्टिस को चिट्ठी लिखी गई तो उस पर 23 पार्टियों के नेताओं ने दस्तखत किए। तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने इससे आगे बढ़ कर बताया कि डीएमके...

  • सरकार के लिए वरदान है भारत का विपक्ष

    विपक्षी पार्टियां सरकार से लड़ने के लिए कितना सुविधानजक रास्ता चुनती हैं इसकी मिसाल ‘इंडिया’ ब्लॉक की सोमवार, आठ जून को हुई बैठक है। इस बैठक में विपक्षी पार्टियों के बीच पांच प्रस्तावों पर सहमति बनी। मल्लिकार्जुन खड़गे ने बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी जानकारी दी। इनमें से दो मुद्दे तो विपक्षी गठबंधन के अंदर आपसी तालमेल से जुड़े हैं। बैठक में यह तय किया गया कि हर दो महीने में ‘इंडिया’ ब्लॉक की बैठक होगी। इस लिहाज से अगली बैठक के लिए आठ अगस्त का दिन तय किया गया। आठ अगस्त को हैदराबाद में अगली बैठक होगी।...

  • गठबंधन का बंटा मन

    भाजपा का मुकाबला करने के लिए बना इंडिया गठबंधन आज उद्देश्यहीन नजर आता है। आपसी समझ, समन्वय, और साझापन की भावना गहराने के बजाय उसमें आपसी कड़वाहट और अविश्वास की भावना बढ़ी है। इंडिया एलायंस की बैठक में ऑनलाइन माध्यम से जुड़े शिव सेना नेता उद्धव ठाकरे ने पूछा कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) जैसी ऑनलाइन परिघटना क्यों लोगों का ध्यान खींचने में सफल रही, जबकि विपक्ष ऐसा नहीं कर पाया है? क्या इसलिए कि क्या लोगों का “हम में” भरोसा नहीं रहा? इकट्ठा हुए 23 विपक्षी दलों के नेता इस सवाल पर गंभीरता से आत्म-निरीक्षण करते, तो लंबे अंतराल...

  • इंडिया गठबंधन का विखंडन

    कई जगहों पर डीएमके कार्यकर्ताओं ने जिस तरह कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर हमले किए, उससे भी विपक्षी खेमे को लेकर धारणा बिगड़ी है। इसका खराब असर आने वाले चुनावों में विपक्षी सहयोग पर पड़ सकता है। संसद में तालमेल के अलावा इंडिया गठबंधन वैसे भी निरर्थक हो चुका था, मगर तमिलनाडु में कांग्रेस के पाला-बदल के बाद फ्लोर कॉर्डिनेशन से सामूहिक प्रभाव पैदा कर पाना भी उसके लिए कठिन हो जाएगा। चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद कांग्रेस का एकतरफा तौर पर डीएमके का साथ छोड़कर टीवीके से गांठ जोड़ लेने से पैदा हुई कड़वाहट का ही नतीजा है कि डीएमके...

  • अविश्वास, टकराव बना रहेगा!

    एक के बाद एक चुनावी जीत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार और राजनीति को वह निरंतरता दी हुई है, जिसका हिसाब से यह नैरेटिव बनना चाहिए कि मोदी सरकार का काम बोल रहा है। जनादेश ‘अच्छे दिनों’ का प्रमाण है। पर क्या चुनाव नतीजों की चर्चा में इस तरह की कोई पुण्यता है? जबकि नैरेटिव और मीडिया पूरी तरह सत्ता के कहने में है। बावजूद इसके ‘अच्छे दिनों’ की दुहाई देने का किसी के भी पास वह आधार नहीं है, जिससे सचमुच लगे कि चुनावी जीत ‘अच्छे दिन’ की बदौलत है। बिहार में लालकिले के आगे यदि विस्फोट की...

  • विपक्ष नहीं छोड़ेगा एसआईआर का मुद्दा

    चुनाव आयोग ने इस साल के अंत में पूरे देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का फैसला किया है। आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य चुनाव अधिकारियों की बैठक बुलाई थी, जिसमें इस पर विस्तार से चर्चा हुई है। इस बैठक से ठीक पहले चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक बिहार के मुख्य चुनाव अधिकारी को निर्देश दिया कि मतदाताओं के सत्यापन के लिए निर्धारित 11 दस्तावेजों की सूची में 12वें दस्तावेज के तौर पर आधार को शामिल किया जाए। बिहार में एसआईआर की प्रक्रिया शुरू करने की अधिसूचना 24 जून को जारी...

  • यह एकजुटता कैसे आगे चलेगी?

    मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर पर विपक्षी एकजुटता दिख रही है।  संसद में सभी पार्टियों ने मिल कर इस मामले में बहस की मांग की और चर्चा नहीं होने पर  संसद की कार्यवाही रोकी। सत्र के बाद भी कई विपक्षी पार्टियों ने इस मसले पर कांग्रेस के साथ एकजुटता दिखाई है और बिहार में चल रही राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा में उनके नेता शामिल हुए। लेकिन तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी ने इससे दूरी बनाई। उनकी पार्टी का कोई नेता यात्रा में शामिल नहीं हुआ और यह भी तय नहीं है कि एक सितंबर को...

  • घटक दल ‘इंडिया’ नाम नहीं चाहते

    यह स्थिति आनी ही थी क्योंकि विपक्षी गठबंधन ने ‘इंडिया’ नाम का चयन आम सहमति से नहीं किया था। 2023 में जब नीतीश कुमार की पहल पर भाजपा विरोधी गठबंधन बनाने की कवायद शुरू हुई और पटना से लेकर बेंगलुरू व मुंबई तक बैठकें हुईं तो कई नाम प्रस्तावित  किए गए, जिसमें एक नाम ‘इंडिया’ था। उस समय नीतीश कुमार ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह किसी राजनीतिक गठबंधन के लिए ठीक नहीं है। उनकी बात सही साबित हुई। इसे लेकर आज तक विवाद चल रहा है। कई मीडिया समूह और भाजपा व उसकी सहयोगी पार्टियां इंडी अलायंस...

  • विपक्षी गठबंधन का विरोधाभास

    विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के अस्तित्व को लेकर पहले से सवाल उठ रहे थे। अब इसका बिखराव भी दिखने लगा है। आम आदमी पार्टी ने गठबंधन से अलग होने का ऐलान कर दिया है। और उसके बाद कांग्रेस पार्टी ने लेफ्ट को लेकर अपना विरोधाभास जाहिर कर दिया है। खुद राहुल गांधी ने सबसे बड़ी कम्युनिस्ट पार्टी सीपीएम से वैचारिक और राजनीतिक लडाई की बात कही है। इतना ही नहीं उन्होंने सीपीएम की तुलना आरएसएस से कर दी है। राहुल ने कहा है कि वे आरएसएस और सीपीएम से वैचारिक रूप से लड़ रहे हैं। इसके बाद दोनों पार्टियों के बीच...

  • संसद में ‘इंडिया’ गठबंधन जवाब मांगेगा

    नई दिल्ली। विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) के घटक दलों के प्रमुख नेताओं ने शनिवार शाम ऑनलाइन बैठक की, जिसमें संसद के मानसून सत्र में सरकार को घेरने की साझा रणनीति और देश के वर्तमान राजनीतिक हालात पर चर्चा की गई। बैठक में कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य और कुछ अन्य नेता शामिल रहे। इस बैठक में करीब 20 दलों ने भाग लिया। पहले यह बैठक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास...

  • केजरीवाल ‘इंडिया’ गठबंधन से बाहर

    अहमदाबाद। आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने विपक्षी गठबंधन से अलग होने का ऐलान कर दिया है। गुजरात के तीन दिन के दौरे पर पहुंचे केजरीवाल ने अपनी यात्रा के दूसरे दिन गुरुवार को कहा कि विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ सिर्फ लोकसभा चुनाव के लिए बना था और अब उनकी पार्टी किसी गठबंधन का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा, ‘अब हमारा किसी से गठबंधन नहीं है’। इसके साथ ही उन्होंने यह ऐलान भी किया कि उनकी पार्टी बिहार विधानसभा का चुनाव अकेले लड़ेगी। गौरतलब है कि केजरीवाल ने गुजरात जोड़ो अभियान शुरू किया है और पार्टी नए सदस्य बना...

  • केजरीवाल और ममता कांग्रेस को हरवाएंगे

    अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी अब एक तरह से विपक्षी एलायंस से बाहर है। कांग्रेस से तो केजरीवाल लड़ ही रहे हैं लेकिन पहले ‘इंडिया’ ब्लॉक के अंदर उनको कुछ प्रादेशिक पार्टियों का जो समर्थन मिलता था वह भी बंद हो गया है। कुछ समय पहले तक ‘इंडिया’ ब्लॉक के भीतर आम आदमी पार्टी को ममता बनर्जी और समाजवादी पार्टी का समर्थन मिलता था। विपक्षी गठबंधन के अंदर एक गठबंधन था, जो दबाव समूह की तरह काम करता था और जिसका मकसद कांग्रेस को कमजोर करना था। लेकिन अब न तो ‘इंडिया’ ब्लॉक राजनीतिक रूप से सक्रिय है और...

  • विपक्ष को चाहिए एक समन्वय समिति

    विपक्षी पार्टियों के गठबंधन ‘इंडिया’ को एक समन्वय समिति की जरुरत है ताकि वह संसदीय रणनीति बनाने के अलावा राजनीतिक रणनीति भी बेहतर तालमेल के साथ बना सके। लोकसभा चुनाव के बाद एक साल में विपक्षी गठबंधन संसद में तो कामचलाऊ तालमेल बना लेता है क्योंकि वहां मल्लिकार्जुन खड़गे राज्यसभा में विपक्ष के नेता हैं और कांग्रेस के अध्यक्ष भी हैं। इसलिए उनके बड़े कद की वजह से संसद सत्र के दौरान विपक्षी पार्टियां उनके चैम्बर में जमा  हो कर फ्लोर कोऑर्डिनेशन की मीटिंग कर लेती हैं। हालांकि उसमें भी कई बार ऐसा हुआ कि तृममूल कांग्रेस ने अलग लाइन...

  • अखिलेश ने कहा कि गठबंधन कायम रहेगा

    समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव विपक्षी गठबंधन की राजनीति में दो कदम आगे और एक कदम पीछे की राजनीति कर रहे हैं। उनकी पार्टी गठबंधन के कई एजेंडे से असहमति जताती है। संसद में कांग्रेस से दूरी भी बना लेते हैं। राज्यों में चुनाव लड़ने पहुंच जाते हैं और दूसरी ओर गठबंधन में बने रहने का दावा भी करते हैं। अखिलेश का कांग्रेस से गठबंधन, 2027 चुनाव की योजना अभी तो उन्होंने ओडिशा में कांग्रेस के ही नेता को तोड़ कर अपनी पार्टी का आधार बनाने का दांव चल दिया है, जिससे कांग्रेस बहुत नाराज है। पिछले दिनों...

  • कांग्रेस अब गठबंधन में ही लड़ेगी?

    कांग्रेस पार्टी राज्यों में सहयोगी पार्टियों के साथ ही विधानसभा का चुनाव लड़ेगी। लोकसभा में ‘इंडिया’ ब्लॉक का जो प्रयोग था, भले वैसा व्यापक प्रयोग राज्यों में नहीं हो पाए लेकिन वैसा भी नहीं होगा, जैसा हरियाणा और दिल्ली में हुआ। इन दोनों राज्यों में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की आपसी लड़ाई का फायदा भाजपा को हुआ। हालांकि इस निष्कर्ष का मकसद भाजपा की अपनी तैयारियों, रणनीतियों और उसके नेताओं की मेहनत को कमतर बताना नहीं है। भाजपा ने लोकसभा चुनाव हारने के बाद राज्यों का चुनाव बहुत दमदारी से लड़ा और दूसरी ओर लोकसभा में अपेक्षाकृत अच्छे प्रदर्शन...

  • सबको ‘गठबंधन’ की जरुरत नहीं लगती!

    india alliance  : पुरानी कहावत है कि अपनी बुद्धि सबको अधिक लगती है। यह कहावत हर आम आदमी के लिए सही है लेकिन नेताओं के लिए कुछ ज्यादा ही सही है। सारे नेता अपने को सबसे बुद्धिमान और यहां तक कि सर्वज्ञ मानते हैं। अगर वह सत्ता में है तब तो वह समझता है कि उसकी बुद्धि के आगे सब फेल हैं। अपनी इसी ‘बुद्धिमता’ और ‘सर्वज्ञता’ में आमतौर पर नेता मुंह के बल गिरते हैं। जैसे दिल्ली में अरविंद केजरीवाल गिरे हैं। उनको भी चुनाव से पहले लग रहा था कि वे सब जानते हैं और दिल्ली में चुनाव...

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