अविश्वास, टकराव बना रहेगा!
एक के बाद एक चुनावी जीत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार और राजनीति को वह निरंतरता दी हुई है, जिसका हिसाब से यह नैरेटिव बनना चाहिए कि मोदी सरकार का काम बोल रहा है। जनादेश ‘अच्छे दिनों’ का प्रमाण है। पर क्या चुनाव नतीजों की चर्चा में इस तरह की कोई पुण्यता है? जबकि नैरेटिव और मीडिया पूरी तरह सत्ता के कहने में है। बावजूद इसके ‘अच्छे दिनों’ की दुहाई देने का किसी के भी पास वह आधार नहीं है, जिससे सचमुच लगे कि चुनावी जीत ‘अच्छे दिन’ की बदौलत है। बिहार में लालकिले के आगे यदि विस्फोट की...