Sangh Parivar

  • संघ परिवार: क्षुद्र मानसिकता का प्रसार

    हिन्दी फिल्म उद्योग पर कोलतार पोतना संघ-परिवार की फूहड़ 'नरेटिव' योजना का ही ट्रेडमार्क नमूना है। उन का आईटी सेल अनाम पोस्टों द्वारा फिल्मी हस्तियों, गतिविधियों पर कीचड़ उछालता रहता है। इस के बावजूद कि फिल्मी दृश्यों, संवादों में वही संदेश या संकेत रहता रहा है, जो खुद गाँधीजी से लेकर आज के हिन्दू नेताओं‌ तक के प्रवचनों और औपचारिक शिक्षा में रहा है। जिसे संघ-भाजपा नेतृत्व भी दशकों से सोत्साह चला रहे हैं। पर वही संवाद किन्हीं फिल्मों में होने का उदाहरण देकर इसे 'ऊर्दूवुड' कह कर लांछित करवाते हैं। कुछ वर्षों से प्रोपेगंडा चल रहा है कि 'हिन्दी...

  • संघ परिवार: मंदिर का व्यापार

    अभी तो बस हाथ में आया, बल्कि किसी से छीना हुआ चेक भुनाना ही उन की संपूर्ण दृष्टि है। समाज-हित में दूरदर्शिता से उन का शायद ही कभी संबंध रहा है। वे मंदिर को पार्टी का व्यापार बनाकर मुनाफे की जुगत में हैं। आगे अयोध्या की गरिमा और सुरक्षा का भी क्या होगा? यह पहले की तरह उन के रडार से बाहर है। लुई पंद्रहवें की तरह, 'मेरे बाद कुछ हो, मेरी बला से!' ही उन की मानसिकता लगती है। इस्लामी आक्रांताओं ने सदियों से हजारों हिन्दू मंदिर तोड़े, और अनेक प्रमुख मंदिर-स्थलों पर मस्जिदें खड़ी कर दी। पर किसी...

  • संघ परिवार: हिन्दुओं पर प्रहार

    संघ नेताओं द्वारा गंभीर मुद्दों पर मुल्लों की तरह फतवे देकर मनगढ़ंत बातें कहने की जिद क्या दर्शाती है? यह कैसा आचरण है? यह न हिन्दू आचार है, न हिन्दू ज्ञान परंपरा से जुड़ाव, न जिम्मेदार बौद्धिकता, न देश-हितकारी।….नित झूठे बयानों से ऐसे संघ-भाजपा नेता कौन सा 'चरित्र निर्माण' कर रहे हैं, यह सभी के लिए विचारणीय है। हाल में आर.एस.एस. (संघ) के एक सर्वोच्च नेता ने हिन्दू समाज पर कहा: "हम ने अपने ही साथी मनुष्यों को सामाजिक व्यवस्था में पीछे रखा। हम ने उन की परवाह नहीं की और यह सिलसिला दो हजार साल चलता रहा। उन का...

  • संघ-परिवार: हिन्दुओं का बंटाधार

    संघ-भाजपा महापुरूषों ने उसी तबलीगी जमात के सरपरस्त को दो-दो बार राष्ट्रीय सम्मान देकर, तथा अन्य विविध संसाधन सहयोग देकर उस का हौसला बढ़ाया है। यह कैसी वीभत्स नीति है!अर्थात, हिन्दुओं की ही अन्य पार्टियों के प्रति विषैला दुष्प्रचार करना, और खुद जिहादी तत्वों को पुरस्कृत, संसाधित, उत्साहित करना। ऐसे लोगों को जो किसी भी तरह से गैर-मुस्लिमों का खात्मा ही अपना लक्ष्य मानते हैं। ... यह नजारा संघ-परिवार के बारे में सीताराम गोयल के अवलोकन की सिहरा देने वाली पुष्टि है।  कांग्रेस को हमास, बोको हराम, लश्कर-ए-तैयबा,  हिजबुल्ला, आइसिस, तालिबान जैसा बताकर 'हिन्दुओं सावधान' - इस आशय के मीम...

  • संघ-परिवार: विषकन्या का शिकार

    डॉ. अंबेदकर ने देखा था कि “मुसलमानों की माँगें हनुमानजी की पूँछ की तरह बढ़ती जाती हैं”। जिसे पूरा करते जाने के चक्कर में गाँधी ने देश-बँटवारा तक मान लिया।…      इस प्रकार, भारत में वोट-बैंक लालसा के पहले शिकार गाँधी थे। जिस से देश की अकूत हानि के सिवा कभी कुछ न मिला। 1919-48 तक की घटनाओं के आकलन से यही निष्कर्ष मिलेगा। उस दौरान अनेक नेताओं, मनीषियों ने गाँधी को चेतावनी दी। पर वे अपने मोह, अहंकार से उबर न सके।अब संघ-भाजपा नेता उसी लालसा और अहंकार में डूब रहे हैं। जिन लोगों ने 'मुस्लिम तुष्टिकरण' की दशकों निन्दा...

  • संघ परिवारः मुस्लिम मोह में गिरफ्तार

    डॉ. अंबेदकर ने देखा था कि “मुसलमानों की माँगें हनुमानजी की पूँछ की तरह बढ़ती जाती हैं”। जिसे पूरा करते जाने के चक्कर में गाँधी ने देश-बँटवारा तक मान लिया।…      इस प्रकार, भारत में वोट-बैंक लालसा के पहले शिकार गाँधी थे। जिस से देश की अकूत हानि के सिवा कभी कुछ न मिला। 1919-48 तक की घटनाओं के आकलन से यही निष्कर्ष मिलेगा। उस दौरान अनेक नेताओं, मनीषियों ने गाँधी को चेतावनी दी। पर वे अपने मोह, अहंकार से उबर न सके।अब संघ-भाजपा नेता उसी लालसा और अहंकार में डूब रहे हैं। जिन लोगों ने 'मुस्लिम तुष्टिकरण' की दशकों निन्दा...

  • संघ परिवार: निर्बलता का प्रसार

    डॉ. अंबेदकर ने देखा था कि “मुसलमानों की माँगें हनुमानजी की पूँछ की तरह बढ़ती जाती हैं”। जिसे पूरा करते जाने के चक्कर में गाँधी ने देश-बँटवारा तक मान लिया।…      इस प्रकार, भारत में वोट-बैंक लालसा के पहले शिकार गाँधी थे। जिस से देश की अकूत हानि के सिवा कभी कुछ न मिला। 1919-48 तक की घटनाओं के आकलन से यही निष्कर्ष मिलेगा। उस दौरान अनेक नेताओं, मनीषियों ने गाँधी को चेतावनी दी। पर वे अपने मोह, अहंकार से उबर न सके।अब संघ-भाजपा नेता उसी लालसा और अहंकार में डूब रहे हैं। जिन लोगों ने 'मुस्लिम तुष्टिकरण' की दशकों निन्दा...

  • संघ परिवार : ब्राह्मण-विरोध की धार

    डॉ. अंबेदकर ने देखा था कि “मुसलमानों की माँगें हनुमानजी की पूँछ की तरह बढ़ती जाती हैं”। जिसे पूरा करते जाने के चक्कर में गाँधी ने देश-बँटवारा तक मान लिया।…      इस प्रकार, भारत में वोट-बैंक लालसा के पहले शिकार गाँधी थे। जिस से देश की अकूत हानि के सिवा कभी कुछ न मिला। 1919-48 तक की घटनाओं के आकलन से यही निष्कर्ष मिलेगा। उस दौरान अनेक नेताओं, मनीषियों ने गाँधी को चेतावनी दी। पर वे अपने मोह, अहंकार से उबर न सके।अब संघ-भाजपा नेता उसी लालसा और अहंकार में डूब रहे हैं। जिन लोगों ने 'मुस्लिम तुष्टिकरण' की दशकों निन्दा...

  • संघ परिवार: अब कुरान का प्रचार!

    डॉ. अंबेदकर ने देखा था कि “मुसलमानों की माँगें हनुमानजी की पूँछ की तरह बढ़ती जाती हैं”। जिसे पूरा करते जाने के चक्कर में गाँधी ने देश-बँटवारा तक मान लिया।…      इस प्रकार, भारत में वोट-बैंक लालसा के पहले शिकार गाँधी थे। जिस से देश की अकूत हानि के सिवा कभी कुछ न मिला। 1919-48 तक की घटनाओं के आकलन से यही निष्कर्ष मिलेगा। उस दौरान अनेक नेताओं, मनीषियों ने गाँधी को चेतावनी दी। पर वे अपने मोह, अहंकार से उबर न सके।अब संघ-भाजपा नेता उसी लालसा और अहंकार में डूब रहे हैं। जिन लोगों ने 'मुस्लिम तुष्टिकरण' की दशकों निन्दा...

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