महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को पद्मभूषण पुरस्कार दिए जाने पर शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने सवाल उठाया है। उनका कहना है कि इससे महाराष्ट्र संतुष्ट नहीं है।
मुंबई में गणतंत्र दिवस पर संजय राउत ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि यह गौरव का दिन है। हमेशा हम अभिमान से कहते हैं कि हमारा गणतंत्र अमर है। मैंने राष्ट्रपति का भाषण सुना। देश और विश्व को उन्होंने शांति का संदेश दिया और भारत को शांति के मार्ग से आगे बढ़ने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति को मालूम होना चाहिए कि सबसे ज्यादा अशांतता, अस्थिरता हमारे देश में दिखाई दे रही है। उत्तर प्रदेश में शंकराचार्य सड़क पर है। उन पर लाठीचार्ज हुआ। मणिपुर अभी भी जल रहा है। महाराष्ट्र में हर दिन एक नई खबर आती है। दिल्ली शांत नहीं है, न्यायालय में शांति नहीं है और हर जगह दबाव है।
उन्होंने कहा कि हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश में अशांति फैली हुई है। सबसे ज्यादा नुकसान हिंदू भाइयों को हो रहा है। आए दिन चार-पांच हिंदुओं की हत्या हो रही है, घरों पर हमले हो रहे हैं। क्या ये राष्ट्रपति को मंजूर है? प्रधानमंत्री हिंदू भाइयों और सनातन धर्म की बात करते हैं और बगल के बांग्लादेश में हो रही हिंदुओं की हत्याओं को आप रोक नहीं पा रहे हैं।
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भगत सिंह कोश्यारी को मिले पद्मभूषण पर उन्होंने कहा कि इससे महाराष्ट्र संतुष्ट नहीं है। ये कोई व्यक्तिगत बात नहीं है। वह महाराष्ट्र के राज्यपाल थे और उनके कार्यकाल में जिस तरह हमारी पार्टी को उनकी प्रेरणा से तोड़ा गया, राजभवन को राजनीतिक अड्डा बनाया गया और संविधान और लोकतंत्र की हत्या करके चुनी हुई सरकार को बर्खास्त कर दिया गया। ये सब मैं नहीं, बल्कि सर्वोच्च न्यायालय का ऑब्जर्वेशन है। ऐसे व्यक्ति को पद्मभूषण अवार्ड मिलना महाराष्ट्र को मंजूर नहीं।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के सीएम और उपमुख्यमंत्रियों को प्रधानमंत्री को बताना चाहिए कि भगत सिंह कोश्यारी ने राज्यपाल पद पर रहते हुए छत्रपति महाराज, महात्मा फुले और सावित्रीबाई फुले का अपमान किया था और उन्हें सम्मान दे रहे हैं। यह हमें मंजूर नहीं है।
पूरे देश में हरा झंडा फहराने वाले एआईएमआईएम नेता वारिस पठान के बयान पर उन्होंने कहा कि हरा रंग किसी के बाप की जागीर नहीं है। हर पार्टी का अपना रंग होता है, लेकिन महाराष्ट्र में अगर कोई रंग रहेगा तो छत्रपति शिवाजी महाराज का भगवा रंग रहेगा।
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