nayaindia भाजपा के खिलाफ विपक्षी पार्टियों की कहानी
अजीत द्विवेदी

भाजपा की कहानियों का क्या जवाब है!

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भाजपा

देश की लगभग सभी विपक्षी पार्टियों के नेता पटना में मिल रहे हैं। अगले साल के लोकसभा चुनाव के लिए इन पार्टियों के बीच एक मोटी सहमति हो गई है कि भाजपा के खिलाफ सबको मिल कर लड़ना है। उसकी बारीकियों, खासतौर से सीटों के बंटवारे या रणनीतिक एडजस्टमेंट के बारे में आगे बात होगी। लेकिन इस राजनीतिक सहमति के आगे क्या? यह यक्ष प्रश्न है कि विपक्षी पार्टियों के पास आम जनता को सुनाने के लिए क्या कहानी है?

भारतीय जनता पार्टी के पास ढेर सारी कहानियां हैं- कुछ सच्ची, कुछ झूठी और कुछ अधूरी। अभी 19 जून को महाराष्ट्र की एक सभा में राज्य के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने कहा कि दुनिया के 120 देशों के राष्ट्रध्यक्षों और प्रधानमंत्रियों ने एक साथ मिल कर नरेंद्र मोदी को अपना नेता चुना है और कहा है कि वे विश्व मंच पर उनकी बात उठाएं। इस कहानी का क्या जवाब विपक्ष के पास है? क्या विपक्ष के नेता भाजपा की ओर से गढ़े जा रहे नैरेटिव के बरक्स अपना कोई काउंटर नैरेटिव गढ़ सकते हैं?

फड़नवीस का बयान भाजपा की ओर से सुनाई जाने वाली सैकड़ों कहानियों में से एक कहानी है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका की राजकीय यात्रा और उसके बाद सितंबर में होने वाले जी-20 देशों के नई दिल्ली में होने वाले सम्मेलन से और बल मिलेगा। लेकिन इसके अलावा भाजपा के पास और भी कहानियां हैं। भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सबसे पसंदीदा कहानियों में से एक विपक्ष के भ्रष्टाचार और परिवारवाद की है। केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई से विपक्ष के हर नेता को भ्रष्ट साबित किया गया है। तमिलनाडु में एमके स्टालिन सरकार के मंत्री सेंथिल बालाजी भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार होकर जेल गए तो पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार के मंत्री पार्थो चटर्जी जेल भेजे गए।

दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और मंत्री सत्येंद्र जैन जेल भेजे गए। झारखंड में मुख्यमंत्री और कई मंत्रियों पर तलवार लटकी है तो तेलंगाना में मुख्यमंत्री की बेटी केंद्रीय एजेंसियों की जांच के दायरे में हैं। लालू प्रसाद का पूरा परिवार किसी न किसी मामले में उलझा है, तभी सेंथिल बालाजी की गिरफ्तारी के बाद तेजस्वी यादव ने कहा कि गिरफ्तारी का अगला नंबर उनका हो सकता है। बसपा प्रमुख मायावती के भाई और भाभी के खिलाफ जमीन आवंटन के बदले 261 फ्लैट लेने का एक नया मामला आ गया है। जदयू सांसद के बेटे की कंपनी को 16 सौ करोड़ रुपए का ठेका दिए जाने का मामला सबसे ताजा है। समाजवादी पार्टी से लेकर एनसीपी और शिव सेना तक कोई भी पार्टी भ्रष्टाचार के आरोपों से बची नहीं है।

इसी तरह परिवारवाद प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा का पसंदीदा विषय हैं। पिछले दिनों अमित शाह तमिलनाडु के दौरे पर गए तो उन्होंने 2जी, 3जी, 4जी का जुमला बोला और इसका मतलब समझाते हुए कहा कि मारन परिवार 2जी है यानी दो पीढ़ी से राज कर रहा है, करुणानिधि परिवार 3जी है या तीन पीढ़ी से राज कर रहा है और गांधी परिवार 4जी है, जो चार पीढ़ी से राज कर रहा है। यह जुमला पूरे देश में विपक्षी पार्टियों की साख खराब करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

पहले भी इसका इस्तेमाल हुआ है और हर बार ऐसा लगता है कि परिवारवाद का जुमला काठ की हांडी है, जो आगे फिर चूल्हे पर नहीं चढ़ पाएगी। लेकिन हर बार भारी भरकम प्रचार के जरिए इस मुद्दे पर आम जनता को भाजपा और अन्य पार्टियों का फर्क समझा दिया जाता है। इस बार भी ऐसा होगा। चुनाव में भ्रष्टाचार और परिवारवाद ये दो मुद्दे ऐसे होंगे, जिन पर भाजपा विपक्ष की एकजुटता को काउंटर करने का अपना नैरेटिव गढ़ेगी।

इन दो अहम मुद्दों के बाद विकास और विश्वगुरू का नैरेटिव है। देवेंद्र फड़नवीस ने जो कहानी सुनाई है वह विश्वगुरू वाले नैरेटिव का हिस्सा है। पिछले कुछ समय से भाजपा इसका प्रचार कर रही है कि नरेंद्र मोदी की कमान में दुनिया में भारत का मान बढ़ा है और दुनिया भारत की बात ज्यादा ध्यान से सुनने लगी है। अमित शाह ने एक बार कहा था कि दुनिया में कोई भी बड़ा फैसला अब नरेंद्र मोदी की राय के बगैर नहीं होता है। भाजपा ने इस बात का प्रचार किया कि मोदी ने यूक्रेन में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए रूस-यूक्रेन युद्ध रूकवा दिया था।

अमेरिका की एक संस्था ‘मॉर्निंग कंसल्ट’ के सर्वेक्षण के आधार पर मोदी को साल में दो बार दुनिया का सबसे लोकप्रिय नेता ठहराया जाता है। उस सर्वे के मुताबिक मोदी को 76 फीसदी से ऊपर की एप्रूवल रेटिंग हासिल होती है। भले तमाम अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के सूचकांक में भारत की रेटिंग गिर रही है लेकिन मीडिया में मोदी की रेटिंग बढ़ रही है और उसके प्रचार के जरिए जनता को यह भरोसा दिलाया जाता है कि उन्होंने बिल्कुल ठीक नेता चुना है और इससे बेहतर नेता देश में क्या दुनिया में नहीं है। इसका बड़ा मनोवैज्ञानिक असर होता है।

विकास का नैरेटिव जितने बेहतर तरीके से नरेंद्र मोदी बेच सकते हैं, वैसा कोई और नहीं बेच सकता है। सबको पता है कि कैसे गुजरात मॉडल देश में बेचा गया था। उसी तरह अब भारत के विकास की कहानियां बेची जा रही हैं। देश में महंगाई कम हो रही है और थोक महंगाई दर माइनस में पहुंच गई है। विकास दर दुनिया में सर्वाधिक है।

दुनिया में आ रही आर्थिक मंदी का शून्य असर भारत पर होगा। भारत से 10 हजार करोड़ रुपए का आईफोन का निर्यात हुआ है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ रहा है। देश में 80 करोड़ से ज्यादा लोगों को मुफ्त का अनाज दिया जा रहा है। भारत की विमानन कंपनियां एक बार में पांच-पांच सौ विमान खरीदने के ऑर्डर दे रही हैं। कुल मिला कर यह नैरेटिव बनाया गया है कि जब सारी दुनिया आर्थिक मंदी की चपेट में जा रही है तो एकमात्र चमकदार उदाहरण भारत है और वह नरेंद्र मोदी के चमत्कारिक नेतृत्व की वजह से है।

अंत में हिंदुत्व, राष्ट्रवाद और सीमा की सुरक्षा का नैरेटिव है, जो पहले दिन से चला आ रहा है। चीन की घुसपैठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कह दिया कि न कोई घुसा है और न कोई घुस आया है। उनके इस बयान की वजह से भारत कहीं भी चीन की आक्रामकता का बहुत विरोध करने की स्थिति में नहीं है। लेकिन यह बयान यह साबित करने के लिए है कि सीमा सुरक्षित है और जरूरत पड़ने पर भारत बालाकोट या उरी की तरह सर्जिकल स्ट्राइक करने से पीछे नहीं हटेगा।

अगला चुनाव आने तक अयोध्या में राममंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो जाएगी और साथ ही कई अन्य मंदिरों के जीर्णोद्धार का काम पूरा हो जाएगा। तभी सवाल है कि भाजपा की इन हजार कहानियों का मुकाबला करने के लिए विपक्ष के पास क्या कहानी है? विपक्ष भाजपा के गढ़े नैरेटिव पर प्रतिक्रिया देता रहेगा या अपना कोई नया नैरेटिव बनाएगा, जिस पर भाजपा प्रतिक्रिया दे? कर्नाटक के चुनाव का जो सबक है क्या विपक्ष उसे लोकसभा चुनाव में लागू कर पाएगा? इस सवाल पर कल विचार करेंगे। (जारी)

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By अजीत द्विवेदी

संवाददाता/स्तंभकार/ वरिष्ठ संपादक जनसत्ता’ में प्रशिक्षु पत्रकार से पत्रकारिता शुरू करके अजीत द्विवेदी भास्कर, हिंदी चैनल ‘इंडिया न्यूज’ में सहायक संपादक और टीवी चैनल को लॉंच करने वाली टीम में अंहम दायित्व संभाले। संपादक हरिशंकर व्यास के संसर्ग में पत्रकारिता में उनके हर प्रयोग में शामिल और साक्षी। हिंदी की पहली कंप्यूटर पत्रिका ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, टीवी के पहले आर्थिक कार्यक्रम ‘कारोबारनामा’, हिंदी के बहुभाषी पोर्टल ‘नेटजाल डॉटकॉम’, ईटीवी के ‘सेंट्रल हॉल’ और फिर लगातार ‘नया इंडिया’ नियमित राजनैतिक कॉलम और रिपोर्टिंग-लेखन व संपादन की बहुआयामी भूमिका।

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