nayaindia Loksabha election 2024 झारखंड, चंडीगढ़ और ‘इंडिया’ का हौसला
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झारखंड, चंडीगढ़ और ‘इंडिया’ का हौसला

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नीतीश कुमार ने गठबंधन बदला मगर उनसे तत्काल विश्वास मत हासिल करने को नहीं कहा गया। लेकिन झारखंड में को केवल विधायक दल का नेता बदला गया और उससे एक दिन में विश्वास मत हासिल करने को कहा गया। नीतीश ने तो सुबह इस्तीफा दिया और शाम को फिर नए गठबंधन के साथ शपथ दिला दी गई। मगर झारखंड में नए मुख्यमंत्री को शपथ दिलाने में जब कि वहां गठबंधन में कोईपरिवर्तन नहीं हुआ था दो दिन तक लटकाया गया।

जैसे इन दिनों वसंत अचानक आया लग रहा है वैसे ही राजनीतिक समय भी अचानक बदलता दिख रहा है।  सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब लोकसभा में एनडीए गठबंधनके 400 पार का दावा कर रहे थे, उसी समय देश में इंडिया गठबंधन के लिए दोऐसी बड़ी घटनाएं घटीं जिसने विपक्ष को अचानक मजबूती दे दी।

इंडिया को लेकर शुरू से बहुत तरह की बातें की जा रही हैं। और फिर नीतीशकुमार के डर के जाने से इस तरह की चर्चाएं और तेज हुई।

गोदी मीडिया की इंडिया गठबंधन के हर घटक दल पर शक की सुई घूमने लगी। ममता बनर्जी,केजरीवाल, अखिलेश तो उसके गेम प्लान में पहले से थे। मगर नीतीश जिसकेबारे में वह पहले कुछ नहीं बता पाया के पलटी मारने के बाद वह शरद पवार,उद्धव ठाकरे और सब के बारे में शक फैलाने लगा।

मगर समय का हथौड़ा ऐसा होता है कि एक ही प्रहार में सब झूठ, प्रपंचचकनाचूर कर देता है। सोमवार को ही पहले झारखंड में जेल से विश्वास मत परभाग लेने आए हेमंत सोरेन ने अपने ऐतिहासिक भाषण से केवल विधायकों में हीएकजुटता पैदा नहीं की बल्कि पूरे देश को एक मैसेज दे दिया कि डरने से कुछनहीं होगा। न चुप रहने से होगा। लड़ना पड़ेगा। बोलना पड़ेगा।

और उन्होंनेउस मीडिया को, जो कह रहा था यह आदिवासी तो जंगल में रहते थे बाहर आ गए तोइन्हें अच्छा रहना, खाना, कपड़ा सब चाहिए को जवाब देते हुए कहा कि इन्हेंहमारे कपड़ों से बदबू आती है! हम अछूत हैं ! इसके बाद विश्वास मत पर हुईवोटिंग में उनकी जगह चुने गए मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने भारी बहुमत सेविश्वास मत जीत लिया।

दूसरा बड़ा धमाका सुप्रीम कोर्ट ने किया। उसने लोकतंत्र की हत्या के आरोपपर मुहर लगा दी। चंडीगढ़ में जिस तरह खुले आम आप और कांग्रेस के पार्षदोंके वोटों को इनवैलिड करके भाजपा को जिताया गया उसका विडियो देखकर सुप्रीमकोर्ट भी हिल गया। मुख्य न्यायधीश चन्द्रचूड़ ने कहा कि यह लोकतंत्र कीहत्या है।

विपक्ष लंबे समय से यह आरोप लगा रहा था। कांग्रेस के अध्यक्षमल्लिकार्जुन खरगे ने अभी कहा था कि अगर मोदी जीत गए तो यह आखिरी चुनावहोंगे। विपक्ष का कोई नेता ऐसा नहीं है जिसके यहां ईडी के छापे नहीं पड़ेहों या ईडी की तलवार नहीं लटक रही हो। एक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कोगिरफ्तार कर लिया गया दूसरे मुख्यमंत्री केजरीवाल को कभी भी गिरफ्तारकिया जा सकता है। मायावती इस गिरफ्तारी के डर से चुपचाप घर में बैठी हैं।नीतीश बाबू ने पलटी मार दी। ममता बनर्जी पर इंडिया से गठबंधन तोड़ने कादबाव बनाया जा रहा है। और कोई दूसरा नहीं प्रधानमंत्री मोदी खुद विपक्षको भ्रष्टाचारी कह कर माहौल बना रहे हैं।

पैटीएम पर आरबीआई ने गंभीर वित्तिय गड़बड़ियों के आरोप लगाए हैं। वह जनता

का पैसा है। उसके शेयर गिर जाने से जनता का पैसा डूबा है। मगर वहां ईडीया कोई केन्द्रीय एजेन्सी नहीं जा रही। कितने लोग बैंकों का पैसा लेकरविदेश भाग गए मगर उन्हें वापस लाने या वह पैसा वापस लाने के लिए कोईकार्रवाई नहीं हो रही। मगर विपक्षी नेताओं के यहां लगातार पूछताछ,छापेमारी और गिरफ्तारी की कार्रवाई चल रही है।

यह लोकतंत्र की हत्या नहीं तो क्या है? लद्दाख में अभी सबने सोशल मीडिया पर एक विशाल आक्रोशित जुलूस का वीडियो देखा होगा। लद्दाख चीन से लगा इलाका। जहां अभी चीनी सैनिकों के साथ झड़प करते हुए हमारे चरवाहों के वीडियो आए थे। जहां चीनी सैनिकों ने हमारे इलाके में घुसकर 20 भारतीयसैनिकों को शहीद कर दिया था। और प्रधानमंत्री ने पूरी घटना को ही खारिज करते हुए कहा था कि न कोई घुसा है और न ही कोई है।

उसी लद्दाख में जनता का मोदी सरकार के खिलाफ आंदोलन बहुत चिंताजनक है। वेलद्दाख के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा मांग रहे हैं। पहले जब जम्मू कश्मीरएक था तो पूर्ण राज्य के दर्जे के साथ ही था। अब दो राज्य कर दिए हैं। औरदोनों ही केन्द्र शासित। दोनों ही जगह लद्दाख और जम्मू कश्मीर आम जनतामें गुस्से की आग सुलग रही है।

सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए यह अच्छी बात नहीं है। उधर दूसरी तरफसीमावर्ती क्षेत्र नार्थ ईस्ट में मणिपुर को हिंसा की आग में जलते हुए 9महीने हो गए। मगर प्रधानमंत्री वहां एक बार भी गए नहीं। वे तो लोकसभा मेंएनडीए के चार सौ पार करने के दावे करते हैं।

लेकिन सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ के उदाहरण के साथ कह दिया कि यहलोकतंत्र की हत्या है। ऐसी हत्याएं लगातार हो रही हैं। मगर चूंकि सारीसंवैधानिक संस्थाएं डरी बैठी हैं तो कौन कहे!

नीतीश कुमार ने तो गठबंधन बदल लिया। मगर उनसे तत्काल विश्वास मत हासिलकरने को नहीं कहा गया। लेकिन झारखंड में को केवल विधायक दल का नेता बदलागया और उससे एक दिन में विश्वास मत हासिल करने को कहा गया। नीतीश ने तोसुबह इस्तीफा दिया और शाम को फिर नए गठबंधन के साथ शपथ दिला दी गई। मगरझारखंड में नए मुख्यमंत्री को शपथ दिलाने में जब कि वहां गठबंधन में कोईपरिवर्तन नहीं हुआ था दो दिन तक लटकाया गया। झारखंड मुक्ति मोर्चा औरकांग्रेस ने साफ आरोप लगाया कि यह विधायकों को खरीदने के लिए टाइम दियाजा रहा है। मगर झारखंड में गठबंधन इतना मजबूत था कि भाजपा को एक भी

विधायक तोड़ने में सफलता नहीं मिली।

इसी तरह चंडीगढ़ में पहले पीठासीन अधिकारी की तबीयत खराब बताकर चुनावटाले। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के पार्षदों को खरीदने की कोशिश की।मगर जब सफल नहीं हुए तो पीठासीन अधिकारी जिसके खिलाफ अभी मुख्य न्यायधीशने कड़ी टिप्पणी की है और उसे अगले सोमवार को खुद सुप्रीम कोर्ट में पेशहोने को कहा है जिसने अपने पेन से आप और कांग्रेस के पार्षदों के वोटों कोखराब करके उन्हें निरस्त घोषित कर दिया। अल्पमत वाली भाजपा जीत गई। आप औरकांग्रेस के साफ 20 वोट थे। और बीजेपी के पास केवल 14। आप और कांग्रेस के8 वोट निरस्त कर दिए गए। इसी पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है।

मगर इससे पहले भाजपा और मीडिया इस स्तर के आरोप लगाने लगे, झूठ बोलने लगे कि कांग्रेस औरआप के पार्षदों को वोट डालना ही नहीं आता। मीडिया एक के बाद एक प्रोग्रामबनाकर भाजपा की जीत को सही ठहराने लगा। ऐसा ही उसने झारखंड में किया था।वहां कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा के टूटने की घोषणा कर दी थी। औरभाजपा की सरकार बनाने में लग गया था। लेकिन उसके एक एंकर ने ज्यादावफादारी दिखाने के चक्कर में आदिवासियों को ही जंगल में रहने वाला करारकर दिया। इसका भारी विरोध हुआ। केवल आदिवासियों में नहीं दलित, पिछड़ोंमें भी प्रतिक्रया हुई कि क्या हम इंसान नहीं हैं?

यह दो घटनाएं चंडीगढ़ और झारखंड की टर्निंग पाइंट बन गई हैं। इंडियागठबंधन के घटक दलों के बीच जो भी समस्या थी सबको एक झटके से निकालकर बाहरफेंक दिया है।

सबकी समझ में आ गया है कि अगर एक रहेंगे तो चंडीगढ़ और झारखंड की तरह जीतमिलेगी। बिहार में जो जेडीयू में असंतोष है। जीतिन मांझी में है उसे देखते हुए वहां 12 फरवारी को नीतीश का तख्ता भी पलट सकता है। नीतीश ने कईबार पलटी मारी है हो सकता है इस बार उनकी पार्टी के विधायक मार जाएं।

खेल अब दिलचस्प हो गया है। इंडिया गठबंधन की एकता मजबूत हो गई है। और यहीविपक्ष की जीत का रास्ता है। झारखंड और चंड़ीगढ़ गवाह हैं।

By शकील अख़्तर

स्वतंत्र पत्रकार। नया इंडिया में नियमित कन्ट्रिब्यटर। नवभारत टाइम्स के पूर्व राजनीतिक संपादक और ब्यूरो चीफ। कोई 45 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव। सन् 1990 से 2000 के कश्मीर के मुश्किल भरे दस वर्षों में कश्मीर के रहते हुए घाटी को कवर किया।

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