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क्या डोवाल ने करवाया व्यापार सौदा?

हिसाब से बातचीत वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल की टीम कर रही थी लेकिन श्रेय ‘सबसे ऊपर से’, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को है तो उनके साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल को भी श्रेय दिया जा रहा है। गोयल ने समझौते की जानकारी देने के लिए जब पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस की तो उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप के साथ अपनी दोस्ती का फायदा उठा कर भारत के लिए एक बहुत लाभकारी समझौता कराया है। सोचें, 140 करोड़ लोगों के देश की क्या हैसियत है, जब उसके प्रधानमंत्री को अपनी निजी दोस्ती के सहारे देश का काम कराना पड़ रहा है!

गोयल के इस बयान के एक दिन बाद विदेशी मीडिया समूह ब्लूमबर्ग ने एक खबर दी, जिसे भारत में बड़े पैमाने पर प्रचारित किया गया कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल पिछले साल सितंबर में अमेरिका के दौरे पर गए थे, जहां वे मार्को रूबियो से मिले। बताया गया है कि डोवाल ने रूबियो से कहा कि भारत किसी दबाव में समझौता नहीं करेगा। ब्लूमबर्ग की खबर के मुताबिक डोवाल ने कहा कि अगर जरुरत पड़ी तो भारत ट्रंप का कार्यकाल समाप्त होने तक इंतजार करेगा। खबर में यह भी बताया गया कि उससे ठीक पहले प्रधानमंत्री मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी। खबर के मुताबिक इससे अमेरिका दबाव में था और डोवाल की बातों ने ट्रंप प्रशासन को मजबूर किया कि वह भारत से समझौता करे।

अब चाहे ‘सबसे ऊपर के’ मोदी की ट्रंप से दोस्ती के कारण हुआ या एनएसए डोवाल के दबाव के कारण हुआ या भारत के 140 करोड़ लोगों के विशाल बाजार की वजह से हुआ लेकिन समझौता हुआ तो उसमें क्या प्रावधान है, क्या शर्तें हैं यह भी किसी को पता नहीं है? सब कह रहे हैं कि किसानों और पशुपालकों के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है। लेकिन उधर अमेरिका में एक के बाद एक मंत्रियों ने दावा किया है कि उनके कृषि उत्पादों के लिए भारत का बाजार खुल रहा है। सबसे पहले राष्ट्रपति ट्रंप के व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीयर ने कहा कि भारत में अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए बड़ा बाजार मिलेगा। इसके बाद अमेरिका की कृषि मंत्री ब्रुक रॉलिन्स ने भी कहा कि भारत का बड़ा बाजार अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए खुलेगा। भारत के बाजार में अपना माल बेचने के लिए अमेरिका में कृषि सेक्टर को और मजबूत करने की चर्चा शुरू हो गई है। इधर भारत में दूसरी ही बात कही जा रही है। इस बीच सूत्रों के हवाले से यह खबर भी आने लगी है कि भारत जेनेटिकली मोडिफायड फूड्स, सोयाबीन और गन्ना को छोड़ कर दूसरे उत्पादों के लिए कुछ ढील दे सकता है। प्रोसेस्ड फूड आइटम्स को भारत के बाजार में कम या जीरो शुल्क पर आने की मंजूरी मिल सकती है।

ट्रंप का दो टूक कहना है कि भारत अब अमेरिकी सामान पर जीरो टैरिफ लगाएगा। ट्रंप बार बार कहते रहे हैं कि दुनिया भर के देश अमेरिका से अब तक कमाई करते रहे हैं और अमेरिका घाटा उठाता रहा है। अब यह नहीं चलेगा। सो, उन्होंने इसे बदल दिया है। अब अमेरिका विदेशी व्यापार से मुनाफा कमाएगा और अब तक जो देश मुनाफा कमा रहे थे वे नुकसान उठाएंगे। जाहिर है राष्ट्रपति ट्रंप ने अपना काम कर दिया है। वे भारत को नुकसान पहुंचवाएंगे जबकि अमेरिका मुनाफा कमाएगा! इसलिए फिर सवाल है प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार को पता है व्यापार सौदे में है क्या?

By हरिशंकर व्यास

मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक और पत्रकार। नया इंडिया समाचारपत्र के संस्थापक-संपादक। सन् 1976 से लगातार सक्रिय और बहुप्रयोगी संपादक। ‘जनसत्ता’ में संपादन-लेखन के वक्त 1983 में शुरू किया राजनैतिक खुलासे का ‘गपशप’ कॉलम ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ तक का सफर करते हुए अब चालीस वर्षों से अधिक का है। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम की प्रस्तुति। सप्ताह में पांच दिन नियमित प्रसारित। प्रोग्राम कोई नौ वर्ष चला! आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों की बारीकी-बेबाकी से पडताल व विश्लेषण में वह सिद्धहस्तता जो देश की अन्य भाषाओं के पत्रकारों सुधी अंग्रेजीदा संपादकों-विचारकों में भी लोकप्रिय और पठनीय। जैसे कि लेखक-संपादक अरूण शौरी की अंग्रेजी में हरिशंकर व्यास के लेखन पर जाहिर यह भावाव्यक्ति -

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