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क्या ट्रंप की बनाई डील मोदी जानते हैं?

टैरिफ

लाख टके का सवाल है आज अमेरिका के साथ जिस व्यापार संधि की बात है उसका असल कौन जानता है? क्या कैबिनेट में विचार हुआ? मंत्रियों के समूह, सचिवों के समूह में विचार हुआ? सवाल यह भी है कि अकेले अमेरिका के राष्ट्रपति ने समझौते की घोषणा क्यों की? क्यों फिर एक घंटे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप का आभार जताया, पुष्टि की? साझा घोषणा क्यों नहीं हुई? याद करें इसी तरह ट्रंप ने एकतरफा तरीके से 10 मई 2025 को भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर का ऐलान किया था। उसके आधे घंटे के बाद भारत की ओर से एक मिनट से भी कम की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई थी, जिसमें सीजफायर की पुष्टि की गई थी। इसी तरह ट्रंप ने ही ऐलान किया कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा और यह भी ऐलान किया कि भारत अब वेनेजुएला से तेल खरीदेगा।

सवाल है जब साझा बयान तैयार नहीं है, समझौते की बातचीत पूरी तरह से फाइनल नहीं हुई है और तत्काल कोई प्रावधान लागू नहीं हो रहा था तो सोमवार, दो फरवरी की देर रात को इसकी घोषणा की क्या जरुरत थी?

ध्यान रहे वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि अगले चार पांच दिन में साझा बयान तैयार हो जाएगा और उसकी घोषणा हो जाएगी। इसके बाद एक हफ्ते में भारत पर लगा टैरिफ कम होगा और मार्च के मध्य में ‘पहला ट्रांच’ यानी समझौते के पहले हिस्से की घोषणा होगी। ऐसे में क्या यह उचित नहीं होता कि जब साझा बयान तैयार हो जाए तभी एक साथ उसकी घोषणा होती? पीयूष गोयल ने कहा है कि साझा बयान पर दस्तखत वर्चुअल तरीके से हो सकता है। जब ऐसा ही होना है तब तो यह और भी अच्छी स्थिति थी कि इंतजार किया जाता और एक साथ समझौते की घोषणा होती!

लेकिन आनन फानन में दो फरवरी की रात को सवा नौ बजे के करीब भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात हुई है। उन्होंने लोगों को जुड़े रहने को भी कहा। इसके थोड़ी देर के बाद रात 10 बजे के करीब राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लंबी पोस्ट लिख कर कहा कि भारत के साथ समझौता हो गया। इसके एक घंटे बाद रात 11 बज कर दो मिनट पर प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी पुष्टि की। ध्यान रहे सोमवार को दिन में राहुल गांधी संसद में पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की किताब का अंश लेकर संसद में पहुंचे थे और अपने भाषण में इसे उठाने का प्रयास किया था।

हालांकि उनको बोलने नहीं दिया गया लेकिन सबको पता चल गया कि 31 अगस्त 2020 की रात को क्या हुआ था। कैसे भारत के राजनीतिक नेतृत्व ने सेना और सेना प्रमुख को उनके हाल पर छोड़ दिया था। उसी दिन रात में समझौते की खबर आई। लेकिन राहुल गांधी पर इसका कोई फर्क नहीं पड़ा। वे अगले दिन किताब लेकर संसद में पहुंचे और यह भी कहा कि ‘प्रधानमंत्री कंप्रोमाइज्ड हैं’। राहुल ने कहा कि अमेरिका ने एपस्टीन फाइल्स की बहुत सी बातें अभी सार्वजनिक नहीं कीं। उनके मुताबिक एपस्टीन फाइल्स और अडानी के ऊपर मुकदमे की वजह से प्रधानमंत्री दबाव में हैं और इस वजह से समझौता हुआ है।

पता नहीं हकीकत क्या है लेकिन सरकार की हड़बड़ी और टाइमिंग पर निश्चित रूप से सवाल खड़े होते हैं। हड़बड़ी की बात इसलिए है क्योंकि समझौते की घोषणा के चार दिन बाद तक किसी को पता नहीं है कि इसमें क्या है। वाणिज्य मंत्री पीय़ूष गोयल ने संसद में भी बता दिया है कि समझौता हो गया है और इसमें किसानों, पशुपालकों सहित देश के हर वर्ग के हितों का ख्याल रखा गया है। किसी के हित से समझौता नहीं किया गया है। लेकिन उधर अमेरिका के दौर पर गए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि उनको समझौते के बारे में खास जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि इस बारे में वाणिज्य मंत्री जान रहे होंगे। हालांकि उनके अमेरिका दौरे पर व्यापार समझौते से जोड़ कर ही देखा जा रहा है।

समझौते के अगले दिन से भारत की मीडिया में यह खबर चलती रही कि जयशंकर अमेरिका गए हैं, जहां वे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से समझौते को लेकर बातचीत करेंगे। हालांकि समझौते की बातचीत में विदेश मंत्री शामिल नहीं थे इसलिए यह कहना पूरी तरह से सही नहीं था कि वे व्यापार संधि के बारे में बात करेंगे। फिर भी मीडिया में खबर चलती रही और सरकार की ओर से किसी ने इस पर पक्ष नहीं रखा। तभी लोगों ने इस पर यकीन किया।

By हरिशंकर व्यास

मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक और पत्रकार। नया इंडिया समाचारपत्र के संस्थापक-संपादक। सन् 1976 से लगातार सक्रिय और बहुप्रयोगी संपादक। ‘जनसत्ता’ में संपादन-लेखन के वक्त 1983 में शुरू किया राजनैतिक खुलासे का ‘गपशप’ कॉलम ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ तक का सफर करते हुए अब चालीस वर्षों से अधिक का है। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम की प्रस्तुति। सप्ताह में पांच दिन नियमित प्रसारित। प्रोग्राम कोई नौ वर्ष चला! आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों की बारीकी-बेबाकी से पडताल व विश्लेषण में वह सिद्धहस्तता जो देश की अन्य भाषाओं के पत्रकारों सुधी अंग्रेजीदा संपादकों-विचारकों में भी लोकप्रिय और पठनीय। जैसे कि लेखक-संपादक अरूण शौरी की अंग्रेजी में हरिशंकर व्यास के लेखन पर जाहिर यह भावाव्यक्ति -

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