पश्चिम एशिया की जंग से सबसे ज्यादा प्रभावित भारत है। भारत का 40 फीसदी तेल और 60 फीसदी से ज्यादा गैस की आपूर्ति होरमुज की खाड़ी से होती है। इसके अलावा भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों में 90 फीसदी कच्चा तेल और 60 फीसदी गैस आयात करता है। फिर भी भारत में सरकार मानती है कि सब ठीक है। भारत में 50 हजार औद्योगिक इकाइयों पर असर हुआ है। 20 हजार से ज्यादा इकाइयां बंद हो गई हैं। सूरत में टाइल्स की फैक्टरी से लेकर फिरोजाबाद में चूड़ियों की फैक्टरी तक ताले लग रहे हैं। राजधानी दिल्ली में छोले भटूरे की दुकानें बंद हो रही हैं। कामगार और छात्र शहर छोड़ कर लौट रहे हैं। लेकिन भारत में सब ठीक है। कोई चिंता की बात नहीं है।
दिलचस्प बात है कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के आह्वान पर 60 देश जुटे। स्टार्मर के विदेश मंत्री ने बैठक की मेजबानी की, जिसमें भारत के विदेश सचिव भी शामिल हुए। लेकिन इसके लिए स्टार्मर को किसी देश के नेता से अलग से फोन करके बात करने और ब्रिटेन के लोगों को यह दिखाने की जरुरत नहीं पड़ी कि देखो मैंने फलां नेता से बात की। भारत में पहल करने के नाम पर प्रधानमंत्री मोदी ने कुछ खाड़ी देशों के राष्ट्र प्रमुखों से बात की। उसके बाद मीडिया में हल्ला मच गया कि प्रधानमंत्री पहल कर रहे हैं और युद्ध रूकवा देंगे।
इतना ही नगीं मीडिया इस बात पर पागल हुआ जा रहा है कि होरमुज की खाड़ी से भारत के जहाज निकले। हकीकत यह है कि 28 फरवरी के बाद से सिर्फ छह हजार निकले हैं, जिनमें कुल मिला कर छह या सात दिन की जरुरत भर का तेल और गैस आया है। इतने बड़े संकट से निपटने के लिए भारत में बस एक मंत्री समूह बन गया है, जिसकी पहली बैठक गुरुवार को हुई है और दो बार सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक हुई है।
ठिक विपरित राजनीतिक गतिविधियों के लिए समय ही समय। संकट के दौरान प्रधानमंत्री ने चुनावी राज्यों की अनगिनत यात्राएं की हैं। सबका जिक्र संभव नहीं है। दो दिन पहले बुधवार को प्रधानमंत्री मोदी असम में थे। वहां चुनावी सभा करने के साथ साथ वे एक चाय बागान में गए, जहां उन्होंने मजदूरों के साथ चाय की पत्तियां तोड़ीं। बागान के मजदूरों से बात की। उनको बताया कि, ‘मैं भी चाय वाला हूं’। प्रधानमंत्री किसी दिन पांच चुनावी राज्यों में प्रचार के लिए जा रहे हैं तो किसी दिन वर्चुअल संवाद कर रहे हैं। असम के बाद ही उन्होंने केरल में भाजपा कार्यकर्ताओं से संवाद करके, ‘मेरा बूथ सबसे मजबूत’ का काम किया। उससे पहले अपने गृह प्रदेश गुजरात गए, जहां ‘अफवाह फैलाने’ के लिए कांग्रेस निशाने पर रही।
प्रधानमंत्री का एक्स अकाउंट देखें तो पिछले तीन दिन में एक सौ से ज्यादा पोस्ट हुई है लेकिन दो या तीन पोस्ट ही पश्चिम एशिया के घटनाक्रम से जुड़ी हैं। बाकी सब चुनावी राज्यों में प्रचार या प्रधानमंत्री के भाषण से जुड़ी हैं। गृह मंत्री से लेकर वाणिज्य मंत्री तक और वन व पर्यावरण मंत्री से लेकर शिक्षा मंत्री तक सब चुनाव प्रचार में लगे हुए हैं। संसद का सत्र चल रहा था और विपक्ष कहता रहा कि पश्चिम एशिया के संकट पर चर्चा हो लेकिन सरकार उस चर्चा के लिए तैयार नहीं हुई। दो दिन प्रधानमंत्री ने दोनों सदनों में भाषण दिया। इसका लब्बोलुआब यह था कि सब कुछ ठीक है और विपक्ष अफवाह फैला कर पैनिक कर रहा है।


