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पाकिस्तान नई धुरी बना रहा है, भारत क्या करेगा?

अमेरिका के राष्ट्रपकि ट्रंप ने एक झटके में पाकिस्तान की चुनी गई सरकार की वैधता समाप्त कर दी है। अब वहां की सेना को उन्होने असली शासक बता दिया क्योंकि अगर सेना प्रमुख ही युद्ध रोकते तो कायदे से ट्रंप को भारत के सेना प्रमुख को भी बुलाया चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख को बुलाया और उनको धन्यवाद दिया। मुनीर वह सेना प्रमुख हैं, जिन्होंने धर्म के आधार पर युद्ध की बात कही थी। उन्होंने पाकिस्तान के बच्चों को यह याद दिलाया कि पाकिस्तान का गठन क्यों हुआ है। उन्होंने कहा कि हिंदू और मुस्लिम दो राष्ट्र हैं और कभी साथ नहीं रह सकते हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीर गले की फांस है। वे कश्मीर के लिए भारत से स्थायी लड़ाई के पक्ष में हैं। सोचें, एक तरफ भारत पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर लेने की तैयारी कर रहा था तो दूसरी ओर पाकिस्तान की सेना के प्रमुख कश्मीर पर नजर गड़ाए हुए हैं और उसी सेना प्रमुख का अमेरिका के राष्ट्रपति ने लंच खिलाकर धन्यवाद किया हैं।

सवाल है क्या ट्रंप और मुनीर में कश्मीर और पाक अधिकृत कश्मीर को लेकर चर्चा नहीं हुई होगी? यह अहम सवाल है क्योंकि कहा जा रहा है कि पाकिस्तान अपना एयरबेस अमेरिका को देने को तैयार है, जहां से वह ईरान पर हमला कर सकता है। अगर इजराइल और ईरान के युद्ध में पाकिस्तान ने अमेरिका का साथ दिया तो बदले में वह बड़ी कीमत वसूलेगा। जनरल मुनीर के पाकिस्तान की  सत्ता में काबिज होने एक कीमत है तो दूसरी कीमत भारत के खिलाफ लड़ाई छेड़ने और अमेरिका के तटस्थ रहने का वादा भी एक कीमत है। यह तय है कि चीन अब चाहता है कि भारत किसी तरह से पाकिस्तान के साथ जंग में उलझा रहे। यही कारण है कि हर समय पाकिस्तान की रक्षा करने और उसके ऊपर दुनिया भर के कर्ज लादने के बाद भी चीन ने उसको अमेरिका की गोद में बैठने से नहीं रोका।

अमेरिका और चीन दोनों के बीच पाकिस्तान को लेकर सहमति है। चीन मान रहा है कि दक्षिण एशिया में वर्चस्व बनाने के लिए उसे पाकिस्तान की जरुरत है तो अमेरिका जानता है कि पश्चिम एशिया की राजनीति में अपना पूरा दबदबा बनाने के लिए उसे पाकिस्तान चाहिए। मुनीर दोनों की इस इच्छा को समझ रहे हैं और उसकी कीमत वसूल रहे हैं।

सवाल है अगर पाकिस्तान दोनों महाशक्तियों का इतना दुलारा बन जाता है तो भारत के सामने क्या विकल्प होगा? अमेरिका और चीन दोनों भारत के साथ व्यापार संधि तो कर सकते हैं क्योंकि भारत का 145 करोड़ लोगों का भारी भरकम बाजार उनको चाहिए। परंतु सामरिक और रणनीतिक मामले में वे भारत की कोई उपयोगिता नहीं देख रहे हैं। भारत ने भी कहीं भी अपने को प्रासंगिक बनाने का कोई काम नहीं किया है। इसलिए वह विश्व मंच पर पूरी तरह से बेगाना है। चीन ने पाकिस्तान की संप्रभुता की रक्षा का वादा किया है तो अमेरिका उसके जनरल को लंच करा रहा है। इस बीच खबर आई है कि अमेरिका से लौटते ही जनरल मुनीर उन आतंकवादी ठिकानों की मरम्मत करा रहे हैं, जिनको भारत ने नष्ट किया था। बहावलपुर, मुरीदके, मुजफ्फराबाद सब जगह जोर शोर से काम चल रहा है और जनरल मुनीर ने इसके लिए करोड़ों रुपए का फंड जारी किया है।

By हरिशंकर व्यास

मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक और पत्रकार। नया इंडिया समाचारपत्र के संस्थापक-संपादक। सन् 1976 से लगातार सक्रिय और बहुप्रयोगी संपादक। ‘जनसत्ता’ में संपादन-लेखन के वक्त 1983 में शुरू किया राजनैतिक खुलासे का ‘गपशप’ कॉलम ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ तक का सफर करते हुए अब चालीस वर्षों से अधिक का है। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम की प्रस्तुति। सप्ताह में पांच दिन नियमित प्रसारित। प्रोग्राम कोई नौ वर्ष चला! आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों की बारीकी-बेबाकी से पडताल व विश्लेषण में वह सिद्धहस्तता जो देश की अन्य भाषाओं के पत्रकारों सुधी अंग्रेजीदा संपादकों-विचारकों में भी लोकप्रिय और पठनीय। जैसे कि लेखक-संपादक अरूण शौरी की अंग्रेजी में हरिशंकर व्यास के लेखन पर जाहिर यह भावाव्यक्ति -

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