बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 75 साल के हो गए हैं। उनकी सेहत की जो स्थिति है वह उम्र की वजह से दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। उसमें सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है। इसलिए उनकी पार्टी भी और साथ साथ भाजपा भी उनके उत्तराधिकार की योजना पर काम कर रही है। जानकार सूत्रों का कहना है कि इस बार राज्यसभा चुनाव के बीच ही नीतीश कुमार के उत्तराधिकार की योजना पर गंभीरता से काम हुई। तभी उनके बेटे निशांत कुमार को राजनीति में लाकर राज्यसभा भेजने की योजना पर बात हुई। अगर वे राज्यसभा जाते हैं तो इसका अर्थ होगा कि उनको आगे प्रदेश में कोई बड़ी जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार किया जा रह है।
जानकार सूत्रों का कहना है कि अगस्त तक राज्य में सत्ता परिवर्तन की तैयारी हो रही है। अगर अगस्त तक किसी वजह से बदलाव नहीं होता है तो वह अगले साल उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव तक टलेगा। इस प्रक्रिया में जो थोड़ी बहुत अड़चन है वह इस वजह से है कि नीतीश कुमार के राजमहल में कई खेमे बन गए हैं। एक खेमा बाहर से दिखने वाले नेताओं का है और एक खेमा ऐसा है, जो दिखता नहीं है। जो बाहर से दिख रहा है वह खेमा दिल्ली के शासकों को भरोसा दिला रहा है कि पूरी पार्टी ही आपके हवाले कर देंगे। लेकिन परदे के पीछे से बागडोर संभालने वाली टीम नहीं चाहती है कि नीतीश कुमार एक, अणे मार्ग से बाहर जाएं। इस खींचतान में सब कुछ अटका है। अब देखना होगा कि बदलाव कैसा होता है? ध्यान रहे जनता दल यू को छोड़ कर भाजपा सरकार बनाने की स्थिति में है। लेकिन वह ऐसा नहीं करेगी क्योंकि उसको भरोसा है कि नीतीश की पार्टी भाजपा का सीएम और जदयू के दो डिप्टी सीएम के फॉर्मूले पर तैयार हो जाएगी।
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