महाराष्ट्र में भाजपा और एनसीपी की सरकार बनवाने के मामले में गौतम अडानी की भूमिका को लेकर तीन तरह की बातें हो रही हैं। उनसे लग रहा है कि शरद पवार, अजित पवार और देवेंद्र फड़नवीस तीनों में से कोई न कोई झूठ बोल रहा है। हो सकता है कि तीनों कुछ न कुछ झूठ बोल रहे हैं। लेकिन तीनों की बातों से साफ है कि अडानी ने सरकार बनाने के लिए कांग्रेस और एनसीपी की बैठक कराई थी। इस तथ्य से कोई इनकार नहीं कर रहा है। सो, यह अपने आप में भाजपा के लिए शर्मिंदगी की बात होनी चाहिए कि उसने महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए अडानी की मदद ली थी।
अगर तीनों नेताओं की बातों पर गौर करें तो सबसे पहले अजित पवार ने कहा कि 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद जब गतिरोध हुआ तो गौतम अडानी ने सरकार बनाने की पहल की। उन्होंने कहा कि एक बैठक हुई, जिसमें अजित पवार के अलावा एनसीपी की ओर से शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल और भाजपा की ओर से देवेंद्र फड़नवीस शामिल हुए। उनके हिसाब से इस बैठक में गौतम अडानी भी मौजूद थे। अजित पवार ने कहा कि इस बैठक के बाद ही वे भाजपा के साथ सरकार में शपथ लेने को तैयार हुए।
इसके बाद देवेंद्र फड़नवीस ने मामले में सफाई दी। फड़नवीस ने कहा कि 2019 में गतिरोध बनने के बाद बैठक हुई थी, लेकिन वह बैठक न तो गौतम अडानी के घर पर हुई थी और न उसमें गौतम अडानी शामिल हुए है। उन्होंने सिर्फ यह बात मानी है कि बैठक की पहल गौतम अडानी ने की थी। सो, अजित पवार की एक बात को सही साबित हो गई। इसके बाद इस मामले में शरद पवार की एंट्री हुई। उन्होंने कहा कि सरकार बनाने के लिए भाजपा और एनसीपी की बैठक दिल्ली में गौतम अडानी के घर पर हुई थी लेकिन उस बैठक में अडानी मौजूद नहीं थे। यानी शरद और अजित पवार ने साबित किया कि बैठक गौतम अडानी के कहने पर हुई और उनके घर पर हुई।
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