राजनीति में कहीं पे निगाहें, कहीं पे निशाना का खेल बहुत चलता है। भाजपा इस खेल में भी माहिर है। वह कहीं से भी कहीं की राजनीति साधने का प्रयास करती है। अभी ऐसा लग रहा है कि पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को दिल्ली और हरियाणा से साधने की कोशिश हो रही है। तभी हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जब इस साल का बजट पेश करवे विधानसभा पहुंचे तो उन्होंन दस्तार बांध रखी थी। उन्होंने सिखों के बांधने वाली पगड़ी पहनी हुई थी और उससे पंजाब के सिख व जाट सिखों को एक संदेश दिया।
इसी तरह अब केंद्र सरकार ने दिल्ली में सिख समुदाय से आने वाले तरणजीत सिंह संधु को उप राज्यपाल बनाया है। विनय कुमार सक्सेना को उप राज्यपाल पद से हटा कर लद्दाख भेज दिया गया है। उनकी जगह विदेश सेवा के पूर्व अधिकारी और अमेरिका में भारत ते राजदूत रहे तरणजीत सिंह संधू को उप राज्यपाल बनाया गया है। उनको लोकसभा की टिकट देने की भी बात हुई थी। ध्यान रहे पंजाब की राजनीति को ध्यान में रख कर ही हारे हुए रवनीत सिंह बिट्टू को केंद्र में मंत्री बनाया गया और एपस्टीन फाइल्स के विवाद के बावजूद हरदीप सिंह पुरी को मंत्री बनाए रखा गया।


