सरकार को विपक्षी पार्टियां सलाह देती हैं तो उनको राजनीतिक आलोचना कह कर खारिज कर दिया जाता है। राहुल गांधी लगातार कितने वर्षों से कह रहे हैं कि भारत अर्थव्यवस्था में पिछड़ रहा है। लेकिन उनकी बात नहीं सुनी जाती है उलटे उनको पप्पू ठहराने का अभियान चलता रहता है। लेकिन अब तो सरकार के समर्थक अर्थशास्त्री भी हाथ खड़े कर रहे हैं। वे भी कह रहे हैं कि भारत गाथा यानी इंडिया स्टोरी पटरी से उतर गई है और उसको फिर से पटरी पर लाने के लिए बड़े सुधारों की जरुरत है। सरकार की नीतियों के समर्थक अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला ने लगातार दूसरी बार अपने कॉलम में सरकार की नीतियों की कमियां बताई हैं और सुधार की जरुरत पर जोर दिया है। कम से कम उनकी बात ही सरकार सुन ले तो कुछ सुधार हो।
उन्होंने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के पिछले कॉलम में कहा था कि भाजपा चुनाव जीत रही है लेकिन देश की अर्थव्यवस्था लगातार बिगड़ती जा रही है। अब ताजा कॉलम में उन्होंने इस विमर्श को आगे बढ़ाते हुए कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए जिस सुधार की जरुरत थी वह नहीं किया गया है। उन्होंने सीधे 2014 के बाद यानी नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद की विफलताओं का जिक्र किया है। उन्होंने कहा है कि 2014 में भारत और इंडोनेशिया की कहानी शुरू हुई थी। इंडोनेशिया ने ऐसे सुधार किए, जिससे उसे निवेश मिला और सम्मान भी मिला, जबकि भारत ने जरूरी सुधार नहीं किए, जिससे पूंजी निकल कर बाहर गई और दुनिया से भारत को अवमानना मिली।
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