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जांबाज सैनिकों की पहचान नहीं बतानी चाहिए

भारत के जांबाज सैनिकों ने पिछले महीने 28 जुलाई को ऑपरेशन महादेव को अंजाम दिया। महादेव पहाड़ियों पर सैनिकों ने तीन खूंखार आतंकवादियों को मार गिराया। ये तीनों आतंकवादी पाकिस्तानी थे। सरकार ने इसकी पुष्टि की है। बताया गया है कि तीनों के डीएनए टेस्ट हुए हैं और उनके पास मिली सामग्रियों की जांच से पता चला है कि वे तीनों पाकिस्तानी थे। इससे पहले भारत के सैनिकों ने ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया था। उसमें पहले हमले में ही एक सौ से ज्यादा आतंकवादी मारे गए थे। वायु सेना के अभियान के साथ साथ सीमा पर पाकिस्तान की ओर से हो रही फायरिंग का भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों के जवान जवाब दे रहे थे।

भारत सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर और ऑपरेशन महादेव में शामिल भारत के जांबाज सैनिकों को सम्मानित किया है। सभी टेलीविजन चैनलों पर इस सम्मान समारोह का प्रसारण हुआ और अखबारों में तस्वीरें छपीं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सैनिकों को सम्मानित किया। यह गजब काम सिर्फ भारत में ही हो सकता है। दुनिया के सभी देशों में इस तरह के ऑपरेशन होते हैं तो सैनिकों की पहचान गोपनीय रखी जाती है। ओसामा बिन लादेन को मारने के अभियान में शामिल अमेरिकी नेवी के सैनिकों की पहचान एक दशक से ज्यादा समय़ तक गोपनीय रखी गई। ऑपरेशन के दौरान सबने मास्क पहना हुआ था। इजराइल की खुफिया एजेंसी जो कार्रवाई करती है उसमें सबकी पहचान गोपनीय रहती है और दशकों बाद उन पर डॉक्यूमेंटरीज बनती हैं। लेकिन भारत में खूंखार आतंकवादियों का मारने वालों की पहचान सार्वजनिक कर दी जाती है। उनको सम्मानित करने का लोभ भारत के नेता रोक नहीं पाते हैं। अगर सम्मानित करना है तो वह बंद कमरे में होना चाहिए। इस तरह पहचान सार्वजनिक करने से ऐसे बड़े ऑपरेशन में शामिल सैनिकों और उनके परिजनों की जान खतरे में पड़ती है।

By NI Political Desk

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