कमलनाथ का क्या करेगी कांग्रेस?

कांग्रेस पार्टी में इस बात को लेकर उधेड़बुन है कि कमलनाथ का क्या किया जाए? वे 15 साल के बाद कांग्रेस को सत्ता मिली तो मुख्यमंत्री बने थे और 15 महीने में उनके देखते-देखते सरकार चली गई।

कमलनाथ, शिवराज और कार्तिक का कृष्ण पक्ष

सेंधमारी के ज़रिए मध्यप्रदेश में आई भारतीय जनता पार्टी की सरकार को ख़ुद के बूते बने रहने के लिए 28 विधानसभा क्षेत्रों में हो रहे उपचुनावों में से 9 जीतने होंगे। और जो हो, इतना तय है कि इतनी सीटें वह नहीं जीत रही है।

कांग्रेसी कुनबा कमलनाथ से नहीं संभल रहा

कांग्रेस आलाकमान ने कमलनाथ को नेता प्रतिपक्ष बनाने की हरी झंडी दे दी है। वे प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष पहले से हैं। फिर भी राज्य में कांग्रेस पार्टी का कुनबा संभल नहीं रहा है।

‘एक्चुअल’ में देगी ‘नाथ की सेना’ ‘वर्चुअल’ का जवाब..!

प्रदेश कांग्रेस प्रभारी मुकुल वासनिक उप चुनावों के रोड मैप को अपने भोपाल दौरे के दौरान लगभग अंतिम रूप दे चुके हैं.. एकजुटता के साथ जो ताकत कांग्रेस ने कभी विधानसभा चुनाव में नहीं

मध्य प्रदेश के लेकर कांग्रेस की झूठी उम्मीदें

मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बेबाकी से स्वीकार किया है कि उनको अंदाजा नहीं था कि 22 विधायक टूट जाएंगे। आमतौर पर नेता अपनी गलती या विफलता स्वीकार नहीं करते हैं।

कांग्रेस हो सकेगी कोरोना मुक्त?

नरेंद्र मोदी ने 22 मार्च का जनता कर्फ्यू का जब आह्वान किया था तो सारा देश शाम 5 बजे इस संकट की घड़ी ने जनता की सेवा करने वालों का आभार करने के लिए तालियाँ, थालियाँ और घंटियां शंख बजा रहा था। शरद पवार मुम्बई में, नवीन पटनायक भुवनेश्वर में , केसीआर और जगनमोहन रेड्डी हैदराबाद में इस हवन में शामिल थे। सिर्फ सोनिया गांधी और राहुल गांधी कहीं दिखाई नहीं दिए। हालांकि खुद राहुल गांधी में फरवरी मध्य में देश को इस खतरे से आगाह किया था। उन्हें तब तक यह नहीं पता था कि कोरोना वायरस उन की एक राज्य सरकार निगल लेगा। कोरोना वायरस छूआछूट की बीमारी है और सब जानते हैं कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस के खेमे हमेशा से छूआछूत से ग्रस्त रहे हैं। तब यह समझ आ रहा था कि दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य के बीच राज्यसभा की सुरक्षित सीट के लिए जंग चल रही है। राज्यसभा की तीन सीटें खाली हुई है , रिटायर होने वालों में कांग्रेस के दिग्विजय सिंह खुद और भाजपा के सत्य नारायण जटिया व प्रभात झा हैं। जीतने के लिए हर उम्मीदवार को 58 विधायकों का समर्थन चाहिए था , कांग्रेस के अपने 114 विधायक थे , यानी कांग्रेस… Continue reading कांग्रेस हो सकेगी कोरोना मुक्त?

कई राज्यों कांग्रेस के सामने खतरा

मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी टूटने के बाद कई और राज्यों में कांग्रेस के सामने विभाजन का खतरा पैदा हो गया है। भाजपा के नेताओं के दावों पर भरोसा करें तो महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात और झारखंड में पार्टी के कई नेता नाराज हैं और भाजपा के संपर्क में हैं। ध्यान रहे इन चार में से तीन राज्यों में कांग्रेस सरकार में है। दो राज्यों में उसकी सहयोगी पार्टी का मुख्यमंत्री है और एक राज्य में कांग्रेस की अपनी सरकार है। जाहिर है कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियों की सरकारों के अस्थिर होने के प्रचार के पीछे एक सोची-समझी योजना है। गुजरात में भाजपा की सरकार है और उसके पास बहुमत से ज्यादा संख्या है पर राज्यसभा की तीन सीटें जीतने के लिए उसने कांग्रेस के पांच विधायकों से इस्तीफा करा दिया है। कहा जा रहा है कि कुछ और विधायक इस्तीफा कर सकते हैं। मध्य प्रदेश में भी कांग्रेस के कुछ और विधायकों के इस्तीफे की खबर है और अगर राज्यसभा का चुनाव टलता है तो राजस्थान में भी भाजपा इस तरह का प्रयास करेगी। हालांकि राजस्थान और महाराष्ट्र में कांग्रेस में तोड़फोड़ अपेक्षाकृत मुश्किल है।

कमलनाथ संभाले रहेंगे मप्र की कमान!

कांग्रेस पार्टी को कई राज्यों में संगठन में बदलाव करना है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ साथ राज्यों में अध्यक्षों की नियुक्ति होनी है। पिछले दिनों मध्य प्रदेश में पार्टी में टूट के बाद कांग्रेस ने बहुत जल्दबाजी दिखाई थी और दिल्ली व कर्नाटक में प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर दिए थे। पर उसके बाद फिर शांति छा गई है। अध्यक्षों की नियुक्ति ठंडे बस्ते में चली गई है। महाराष्ट्र में सरकार बने चार महीने होने जा रहे हैं पर सरकार में मंत्री बन गए पीसीसी अध्यक्ष बाला साहेब थोराट की जगह किसी को अध्यक्ष नहीं बनाया गया है। यहीं हाल राजस्थान में हैं, जहां उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ही प्रदेश अध्यक्ष हैं। मध्य प्रदेश में भी मुख्यमंत्री रहते कमलनाथ ही प्रदेश अध्यक्ष बने रहे। अब सवाल है कि क्या पार्टी मध्य प्रदेश में अध्यक्ष बदलेगी? कमलनाथ अभी कार्यवाहक मुख्यमंत्री के तौर पर काम कर रहे हैं। राज्य में नई सरकार बनने के बाद कांग्रेस को प्रदेश अध्यक्ष चुनना है और नेता प्रतिपक्ष का फैसला भी करना है। क्या कांग्रेस कमलनाथ को ही दो पदों पर रहने देगी या कोई एक पद उनसे लिया जाएगा? अगर वे एक पद छोड़ेंगे तो कौन सा पद छोड़ेंगे? मध्य प्रदेश कांग्रेस के कई नेताओं ने… Continue reading कमलनाथ संभाले रहेंगे मप्र की कमान!

कांग्रेस के पुराने नेताओं को झटका

मध्य प्रदेश के राजनीतिक घटनाक्रम से कांग्रेस के पुराने नेताओं को जोर का झटका लगा है। लोकसभा चुनाव के बाद एक बार फिर कांग्रेस के पुराने नेता कमान में लौट आए थे। राहुल गांधी के अध्यक्ष पद से इस्तीफे के बाद कांग्रेस के पुराने नेताओं ने कामकाज संभाला हुआ था। राहुल के चुने एकाध लोगों को छोड़ कर पार्टी के कामकाज में सब कुछ सोनिया गांधी के करीबी पुराने नेताओं के हाथ में था। पर वे राहुल की युवा ब्रिगेड के एक सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया की बगावत को नहीं संभाल सके और मध्य प्रदेश की पूर्ण बहुमत वाली सरकार गिर गई। यह कांग्रेस के पुराने और मंजे हुए धाकड़ नेताओं के लिए बड़ा झटका है। इसके बाद से राहुल के करीबी नेता सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने पुराने नेताओं की प्रबंधन क्षमता पर सवाल उठाए हैं। इसके बाद ही राहुल गांधी के फिर से कांग्रेस अध्यक्ष बनने का शोर तेज हुआ है। पर मुश्किल यह है कि कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने की वजह से सारे राजनीतिक और सामाजिक कामकाज ठप्प पड़े हैं। ऐसे में कांग्रेस का संभावित अधिवेशन भी टलता दिख रहा है। इसलिए पार्टी के पुराने नेताओं को अपनी स्थिति संभालने के लिए थोड़ा समय और मिल गया… Continue reading कांग्रेस के पुराने नेताओं को झटका

अब मध्य प्रदेश में क्या करेगी कांग्रेस?

कांग्रेस पार्टी अब मध्य प्रदेश में क्या करेगी? उसकी आगे की रणनीति पर सबकी नजर है। एक सवाल यह भी है कि कमलनाथ क्या आगे भी दो पद अपने पास रखेंगे और अगर नहीं तो वे कौन सा पद छोड़ेंगे? ध्यान रहे वे मुख्यमंत्री के साथ साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भी थे। अब उनके पास सिर्फ प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष पद है। लेकिन प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद कांग्रेस विधायक दल के नेता के नाते उनको नेता प्रतिपक्ष का पद भी मिल जाएगा। तभी सवाल है कि वे नेता प्रतिपक्ष बन कर राज्य में राजनीति करेंगे या प्रदेश अध्यक्ष बनेंगे? गौरतलब है कि प्रदेश में 24 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं। कोरोना वायरस का संकट खत्म होने के बाद जून में उपचुनाव हो सकता है। कांग्रेस पार्टी को इसकी तैयारी बड़े पैमाने पर करनी होगी। उपचुनाव ज्योतिरादित्य सिंधिया के असर वाले गुना-ग्वालियर-चंबल संभाग में होने वाले हैं। दशकों के बाद ऐसी स्थिति है कोई भी सिंधिया कांग्रेस के पास नहीं है। ऐसे में कांग्रेस किस रणनीति के तहत उपचुनाव लड़ेगी यह बड़ा सवाल है। कांग्रेस के प्रभारी को निश्चित रूप से कोई आइडिया नहीं होगा। इसलिए कमलनाथ और दिग्विजय सिंह को ही इसकी रणनीति बनानी… Continue reading अब मध्य प्रदेश में क्या करेगी कांग्रेस?

केंद्रीय नेतृत्व से नाराज कमलनाथ!

मध्य प्रदेश के कार्यवाहक मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ क्या पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से  नाराज हैं? बताया जा रहा है कि उन्होंने आलाकमान को अपनी नाराजगी बता दी है। हालांकि कई जानकारों का यह भी कहना है कि वे पार्टी आलाकमान के साथ साथ अपने कुछ सहयोगी नेताओं से भी काफी नाराज हैं। बहरहाल, उन्होंने सार्वजनिक रूप से भी अपनी नाराजगी का इजहार कर दिया। जब उनसे ज्योतिरादित्य सिंधिया को प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष नहीं बनाए जाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने नाराजगी भरे लहजे में कहा कि प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति का अधिकार उनको नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि इस बारे में दिल्ली वाले लोगों से पूछा जाना चाहिए था। असल में कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं ने मध्य प्रदेश के मामले को अपने तरीके से हल करने के चक्कर में उसे इतना उलझा दिया कि अंत में सरकार गिर गई। जिस समय ज्योतारादित्य सिंधिया को प्रदेश अध्यक्ष बनाना था उस समय उनको महासचिव बना कर पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बना दिया गया, जबकि उस समय वे अपना चुनाव भी लड़ रहे थे। कांग्रेस के दिल्ली में बैठे नेताओं को लगा कि यह लॉलीपॉप पकड़ा कर वे सिंधिया को समझा लेंगे। पर ऐसा नहीं… Continue reading केंद्रीय नेतृत्व से नाराज कमलनाथ!

कमलनाथ और कांग्रेस का अंतिम सत्य

मध्यप्रदेश-प्रसंग ने भाजपा की जिस नंगई को खुलेआम उज़ागर किया है, उसे अब किसी भी हथेली से ढंकना मुमक़िन नहीं होगा। कमलनाथ की सियासी-कुंडली के अष्टम भाव में बैठे ज्योतिरादित्य सिंधिया की वज़ह से अगर आगे-पीछे यही उनके प्रारब्ध में था तो मुझे तो लगता है कि जो हुआ, अच्छा हुआ। कमलनाथ की इससे ज़्यादा गरिमामयी विदाई और क्या होती?कमलनाथ, सिंधिया की तरह रूमाल से अपना चेहरा ढंक कर तो नहीं गए। उन्होंने सिंधिया की तरह किसी चोर-दरवाज़े का इस्तेमाल तो नहीं किया। वे सिंधिया की तरह सिंर झुका कर नहीं, सिर तान कर निकले और राजभवन जा कर इस्तीफ़ा दे दिया। सिंधिया की तरह कमलनाथ किसी अपराध-बोध के अहसास से दबे हुए नहीं थे। उन्होंने अपने सवा साल में बघनखा पहन कर गले मिलने का काम नहीं किया। वे आख़ीर तक डटे रहे और सिंधिया के गच्चे के बावजूद कांग्रेस का मनोबल गिरने नहीं दिया। कांग्रेस के भीतर कइयों का मानना है कि आपसी-ऐंठ के चलते मध्यप्रदेश की सरकार गंवा कर कांग्रेस ने बेवकूफ़ी की है; कि सिंधिया को मनाने के लिए कांग्रेस को कोई कसर बाक़ी नहीं रखनी चाहिए थी; कि कमलनाथ अगर छुटभैयों के ज़रिए सरकार न चला रहे होते तो मध्यप्रदेश की राज-चरित मानस में सिंधिया-कांड… Continue reading कमलनाथ और कांग्रेस का अंतिम सत्य

दोनों हाथों से लिखती है 3 साल की बालिका

भोपाल। मप्र के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दोनों हाथ से लिखने वाली 3 साल की बालिका को सम्मानित किया है। इस बच्ची का नाम षंजन थम्मा है। यह मप्र उज्जैन की रहने वाली है। कमलनाथ ने इस दौरान शंजना को प्रशंसा पत्र प्रदान किया। षंजन दुनिया में सबसे कम उम्र में ‘यंगेस्ट एक्टिवट्रेक्स्ट्रस राइटर’ के रूप में वर्ल्ड रिकार्ड बना चुकी हैं। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बुधवार को मंत्रालय की 5वीं मंजिल पर अपने कक्ष में षंजन से मुलाकात की। षंजन अपनी मां मानसी थम्मा एवं नाना रमेश चंद्र शर्मा के साथ आई थीं। उज्जैन निवासी षंजन जैसे ही कक्ष में दाखिल हुईं, मुख्यमंत्री ने गर्मजोशी के साथ उनसे हाथ मिलाया। षंजन से उन्होंने सवाल किया कि उसे कौन-कौन से मेडल प्राप्त हुए। मुख्यमंत्री ने उसकी एक-एक उपलब्धि को देखा। मुख्यमंत्री ने षंजन को फूलों का गुलदस्ता भेट किया। मुख्यमंत्री ने अपनी ओर से षंजन को एक प्रशंसा-पत्र सौंपा। मुख्यमंत्री को षंजन की मां मानसी ने बताया कि जब वह 10 माह की थी तभी से दोनों हाथों से लिखने के साथ ही एक से 10 तक की गिनती उसे याद थी। विज्ञान, राजनीति और दुनिया के भूगोल की षंजन को गहरी समझ और जानकारी है। षंजन का पहला रिकार्ड दो साल… Continue reading दोनों हाथों से लिखती है 3 साल की बालिका

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