वादे एवं दावे तथा जुमले- आम समझ और नेता जी

चुनावी सभाओं में बड़े नेताओं के वादे भरे भाषणों में भांति – भांति के आश्वसान मतदाता को दिये जाते रहे हैं। हालांकि वे आम आदमी को केन्द्रित कर कहे जाते हैं। एवं इन नेताओ के वादों को गांव का

अदालत के फैसले की आलोचना-अवमानना नहीं है !

प्रशांत भूषण के दो ट्वीट का स्व संज्ञान लेकर सर्वोच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ ने जिस प्रकार अवमानना का मामला चलाया जा रहा, जिसको लेकर वकीलों और पूर्व जजों ने विरोध व्यक्त किया हैं,

अयोध्या में मंदिर आरंभ पूजन…इतिहास बनाने की ओर…और श्रद्धालु ?

स्थान अयोध्या-तिथि द्वातिया – कृष्ण पक्ष – दिन बुधवार, समय 12.30 मध्यानह -मुहूर्त अभिजीत, में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी – राम मंदिर आरंभ पूजन करेंगे। ऐसा ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव

रक्षा सौदों में असहमति जताने की सजा नौसेना अध्यक्ष भागवत ने भुगती..!

असहमति जताने के मूल अधिकार को सर्वोच्च न्यायालय आज अत्यंत महत्वपूर्ण निरूपित कर रहा हैं , परंतु क्या यह अधिकार सिर्फ जनता के चुने प्रतिनिधियों को ही हैं ? अथवा यह सभी नागरिकों और अधिकारियों को भी हैं

कोरोना और परदेसियों की घर वापसी, फिर टिड्डियों का हमला, शुभ तो नहीं

कोरोना के मरीजो की संख्या में और मरने वालों की संख्या में वृद्धि तथा मजदूरों की घर वापसी के लिए 3300 से अधिक ट्रेनों के बाद दिल्ली से 340 और बंगाल से 200 से अधिक तथा महाराष्ट्र से 200 ट्रेनों की मांग बता रही है

कराहते श्रमिकों की बेहाली में-राज्यारोहण की वर्षगांठ

कितना क्रूर हैं घर वापसी के लिए उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश के मजदूरों से भरी श्रमिक ट्रेनों की बदहाली और बदइंतजामी। शायद मोदी! सरकार के दूसरी पाली का सबसे दुखद अनुभव होगा।

योगी जी बहुत हुआ-परमिट क्लर्क के अड़ंगे-मजदूरों को प्रयाण करने दें!

मजबूर मजदूरों की मैराथन पद यात्रा में भूखे-प्यासे स्त्री-पुरुषों का कष्ट आपको नहीं दिखता -बस आपकी राजनीति फेल न हो जाए , इस भय से आप बाबू टाइप एतराज़ लगा रहे हैं

ख़लक़ खुदा का, मुल्क आईन का, हुकूमत अवाम की… पर चलेगी मेरी मर्जी!

लोकसभा में जिस प्रकार गृहमंत्री अमित शाह ने दिल्ली में 23 से 27 फरवरी तक हुए दंगों (सांप्रदायिक) में 50 से अधिक भारतीय लोगों के मारे जाने और सैकड़ों के घायल होने तथा करोड़ों रुपए की संपत्ति की हानि के घटना को पूर्व नियोजित बताया

जय श्रीराम या वंदे मातरम या जन गण मन-मारपीट कर कहलाना!

दिल्ली के चुनाव परिणामों की घोषणा के समय भारतीय जनता पार्टी के आतुर देशभक्तों को कुछ ऐसे अवसर मिले थे जब मतगणना में उनके उम्मीदवार और आप के प्रत्याशी में सैकड़ो का अंतर रह जाता था।

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