दो बातें साफ हैं। पहली यह कि क्रिकेट का बाजार जितना बड़ा बताया जाता है, असल में वह है नहीं। दूसरी यह कि ना सिर्फ क्रिकेट, बल्कि भारत के पूरे खेल बाजार पर एक कंपनी समूह की मोनोपॉली बन गई है।
टी-20 वर्ल्ड कप से सिर्फ दो महीने पहले जियो हॉटस्टार का प्रसारण करार से हटने का इरादा जताना अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए एक बड़ा झटका है। रिलायंस ग्रुप से संबंधित जियो ने 2025-27 अवधि के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के टूर्नामेंट्स के ऑनलाइन प्रसारण का अधिकार तीन बिलियन डॉलर (270 अरब रुपये) में खरीदा था। मगर एक साल पूरा होते ही उसे लग गया कि ये घाटे का सौदा है। खबरों के मुताबिक इस वित्त वर्ष में उसे 25,760 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। तो उसने बीच अवधि में करार छोड़ने का पत्र आईसीसी को भेजा है। वैसे कुछ खबरों के अनुसार अगर आईसीसी दाम घटाए, तो जियो करार जारी रखने को तैयार हो जाएगा।
खबरों के मुताबिक दूसरे प्रसारक भी दो साल के लिए आईसीसी की मांग के मुताबिक 2.4 बिलियन डॉलर देने को तैयार नहीं हैं। तो संभव है कि घूमफिर कर फिर कम देनदारी के साथ करार जियो हॉटस्टार की झोली में ही चला जाए। इस घटनाक्रम से दो बातें साफ होती हैं। पहली यह कि क्रिकेट का बाजार जितना बड़ा बताया जाता है, असल में वह है नहीं। फिर आईसीसी कमजोर टीमों को जगह देकर सीमित ओवरों के टूर्नामेंट्स को अनावश्यक रूप से लंबा खींचती है। इससे प्रसारकों का घाटा बढ़ जाता है। बाजार एवं भू-राजनीति की वर्तमान स्थितियों ने भी हालात बिगाड़े हैं। नतीजा क्रिकेट के सबसे ऊंचे भाव वाले टूर्नामेंट आईपीएल को भी भुगतना पड़ रहा है।
इसके ब्रांड भाव में इस वर्ष 20 फीसदी की गिरावट आई है। 2024 में यह 12 बिलियन डॉलर था, जिसे अब ब्रांड फाइनेंस नाम की एजेंसी ने 9.6 बिलियन आंका है। ऐसे में प्रसारक का पक्ष समझा जा सकता है। मगर एक दूसरा अहम पहलू भी है। ऐसा नहीं है कि प्रसारक को इसका पहले अंदाजा नहीं रहा होगा। लेकिन तब प्राथमिकता दूसरे प्रसारकों को बाजार से बाहर करना रही होगी। इसमें जियो कामयाब रही। हकीकत यह है कि आज क्रिकेट, बल्कि भारत के खेल बाजार पर रिलायंस की लगभग मोनोपॉली हो गई है। नतीजतन, भविष्य में खेल संस्थाओं को बार-बार झुकना पड़े, तो उसमें कोई हैरत नहीं होगी।
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