हालिया घटनाओं से एचडीएफसी बैंक की पारदर्शिता पर गहरे सवाल उठे हैं। चेयरमैन के इस्तीफे और तीन अधिकारियों की बर्खास्तगी के बाद लोगों के मन में अनेक संदेह तैर रहे हैं। इन्हें दूर करने का विश्वसनीय प्रयास अविलंब किया जाना चाहिए।
अंदेशा है कि मार्केट कैपिटलाइजेशन, ग्राहक आधार, और शाखा नेटवर्क के लिहाज़ से भारत में प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े बैंक एचडीएफसी की साख पर उठे सवाल देश की वित्तीय अर्थव्यवस्था पर दूरगामी असर छोड़ सकते हैं। इसलिए इस बारे में पूरी पारदर्शिता बरतते हुए बैंक के सभी हितधारकों सहित पूरे देश को भरोसे में लिया जाना चाहिए। इस समय जबकि देश अंदरूनी एवं अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण गंभीर आर्थिक चुनौतियों के मुकाबिल है, बैंकिंग सेक्टर से जुड़ी एक अतिरिक्त समस्या का बोझ उठाने की स्थिति में वह नहीं होगा।
बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने पिछले हफ्ते अपने पद से इस्तीफा देते हुए कहा कि इस संस्था के अंदर देखी गई कुछ “प्रथा और घटनाएं” उनकी अपनी व्यक्तिगत नैतिकता से मेल नहीं खातीं। हालांकि उन्होंने बैंक के भीतर कोई ठोस समस्या होने से इनकार किया और फुर्ती दिखाते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने भी बैंक की वित्तीय स्थिति को लेकर लोगों को आश्वस्त करने की कोशिश की, मगर बाद की घटनाओं से साफ है कि उससे बात नहीं बनी है। “नैतिक” कारणों से चेयरमैन के इस्तीफा देने से साफ संकेत मिला कि बैंक का संचालन सही तरीके से नहीं हो रहा है।
फिर दो दिन बाद ही बैंक ने अपने तीन वरिष्ठ अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया। उन पर एटी-1 बॉन्ड्स की अनुचित ढंग से बिक्री का आरोप लगाया गया है। मतलब यह कि जो बॉन्ड सुरक्षित निवेश बताकर बेचे गए, वे बाद में जोखिम भरे साबित हुए। एटी-1 उच्च जोखिम वाले बॉन्ड होते हैं, जिन्हें बैंकों की पूंजी संरचना मजबूत करने के लिए जारी किया जाता है। फिर इस घटनाक्रम के दौरान इस ओर भी ध्यान गया है कि बैंक में पिछले दो वर्षों में कम-से-कम छह वरिष्ठ अधिकारियों ने इस्तीफा दिया या बैंक से उनका संबंध विच्छेद हुआ। स्पष्टतः ये घटनाएं बैंक की पारदर्शिता पर सवाल उठाती है। इसीलिए चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद से बैंक के शेयरों में लगातार गिरावट दर्ज की गई। तो साफ है कि निवेशकों सहित अन्य हितधारकों के मन में अनेक संदेह तैर रहे हैं। इन्हें दूर करने का विश्वसनीय प्रयास अविलंब किया जाना चाहिए।
Leave a comment
You must be logged in to post a comment.



