nayaindia रामलला की प्राण प्रतिष्ठा: भव्य मंदिर और चुनाव
अजीत द्विवेदी

रामलला वही विराजेंगे और तब चुनाव होगा!

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अयोध्या में बन रहे भव्य राम जन्मभूमि मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की तिथि आधिकारिक रूप से निर्धारित हो गई। अगले साल 22 जनवरी को दिन में साढ़े 12 बजे रामलला मंदिर में विराजेंगे और इसके साथ ही भाजपा के चार दशक से चल रहे अभियान का समापन होगा। कोई चार दशक पहले विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के साथ मिल कर भाजपा ने ‘सौगंध राम की खाते हैं हम मंदिर वही बनाएंगे’ का नारा दिया था। इस नारे को लेकर भाजपा और विहिप की बड़ी आलोचना होती थी। कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों के नेता तंज करते थे कि ‘मंदिर वही बनाएंगे पर तारीख नहीं बताएंगे’। लेकिन अब मंदिर भी बन रहा है और तारीख भी तय हो गई है।

सो, इसके आगे क्या? इसके आगे लोकसभा का चुनाव है! 10 दिन चलने वाले भव्य समारोह में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होगी और उसके साथ ही लोकसभा चुनाव का बिगुल बज जाएगा।

यह भी कह सकते हैं कि रामलला के विराजने की घोषणा के साथ ही चुनाव का बिगुल बज गया है और यह भी तय हो गया है कि भारतीय जनता पार्टी के लिए लोकसभा चुनाव का मुख्य एजेंडा अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण होगा। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य जिस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्राण प्रतिष्ठा समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने का न्योता देने गए उससे एक दिन पहले यानी 24 अक्टूबर को विजयादशमी के मौके पर राजधानी दिल्ली के द्वारका इलाके में प्रधानमंत्री मोदी ने रावण दहन से पहले अपने भाषण में कहा- आज हमें सौभाग्य मिला है कि हम भगवान राम का भव्यतम मंदिर बनता देख पा रहे हैं।

अयोध्या की अगली रामनवमी पर रामलला के मंदिर में गूंजा हर स्वर, पूरे विश्व को हर्षित करने वाला होगा। वो स्वर जो शताब्दियों से यहां कहा जाता है- भय प्रगट कृपाला, दीनदयाला…कौसल्या हितकारी। मोदी ने आगे कहा- भगवान राम की जन्मभूमि पर बन रहा मंदिर सदियों की प्रतीक्षा के बाद हम भारतीयों के धैर्य को मिली विजय का प्रतीक है। राम मंदिर में भगवान राम के विराजने को बस कुछ महीने बचे हैं। भगवान श्री राम बस, आने ही वाले हैं। और साथियों, उस हर्ष की परिकल्पना कीजिए, जब शताब्दियों के बाद राम मंदिर में भगवान राम की प्रतिमा विराजेगी।

यह महज संयोग नहीं था कि विजयादशमी पर प्रधानमंत्री ने यह भाषण दिया और उसके अगले दिन श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारी उनको न्योता देने पहुंचे। इसी तरह यह भी संयोग नहीं था कि प्रधानमंत्री के भाषण से कई घंटे पहले नागपुर में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की विजयादशमी रैली में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी राममंदिर निर्माण का जिक्र किया और कहा- अयोध्या में भगवान राम 22 जनवरी 2024 को मंदिर में प्रवेश करने वाले हैं। गर्भगृह में रामलला का अभिषेक किया जाएगा। उद्घाटन के दिन वहां हर किसी का पहुंच पाना संभव नहीं हो पाएगा। इसलिए जो जहां है, वहीं के राम मंदिर में कार्यक्रम का आयोजन करे। यह हर दिल में मन के राम को जगाएगा और मन के अयोध्या को सजाएगा। समाज में स्नेह, जिम्मेदारी और सद्भावना का माहौल बनाएगा।

सोचें, संघ प्रमुख मोहन भागवत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों ने विजयादशमी के भाषण की मुख्य थीम के तौर पर अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने सदियों की प्रतीक्षा के बाद रामलला के अपने जन्मस्थान पर बने मंदिर में विराजने की बात कही। यह अपने आप में इस बात का संकेत है कि अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में भाजपा के प्रचार अभियान का मुख्य एजेंडा राम मंदिर होने वाला है। असल में अपने स्थापना के समय से भाजपा के लिए राष्ट्रवाद और हिंदुत्व का मुद्दा मुख्य रहा है। इसमें राष्ट्रवाद का प्रतीक मुद्दा जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करना और हिंदुत्व का प्रतीक मुद्दा अयोध्या में राममंदिर का निर्माण था। भाजपा की सरकार ने ये दोनों काम कर दिए।

राम मंदिर का निर्माण भले सुप्रीम कोर्ट के आदेश से हुआ है लेकिन यह आम धारणा है कि केंद्र में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी तो यह मंदिर बना और हिंदुओं की सदियों की प्रतीक्षा समाप्त हुई। ध्यान रहे जब अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार बनी थी और मंदिर निर्माण की दिशा में कोई पहल नहीं हुई तो भाजपा की ओर से यही कहा जाता था कि पूर्ण बहुमत की सरकार बनेगी तभी मंदिर बनेगा। सो, पूर्ण बहुमत की सरकार बनी और अयोध्या में मंदिर बन गया। इससे व्यापक हिंदू समाज में यह धारणा बनेगी कि क्या पता फिर पूर्ण बहुमत की सरकार बने तो काशी और मथुरा में भी हिंदुओं की सदियों की कथित प्रतीक्षा पूरी हो जाए!

हो सकता है कि कई मुद्दों पर नरेंद्र मोदी सरकार से लोगों की नाराजगी हो। लोगों का मोहभंग भी हुआ हो। अपनी निजी परेशानियों के चलते सरकार बदलने का भाव भी मन में हो। लेकिन अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का संकल्प पूरा करके भाजपा व्यापक हिंदू समाज में एक बार फिर से भरोसे का भाव पैदा कर सकती है। हालांकि अभी यह नहीं कहा जा सकता है कि इससे भाजपा एक बार फिर पूर्ण बहुमत हासिल करके चुनाव जीत जाएगी। लेकिन अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा व्यापक हिंदू समाज के अवचेतन में भाजपा के प्रति सद्भाव बनाने वाला होगा।

लोगों के दिल-दिमाग में इस बात को गहरे तक बैठाने के लिए अन्य अनेक जतन किए जा रहे हैं। देश और पूरी दुनिया से साधु-संत और श्रद्धालु अयोध्या पहुंच रहे हैं। अयोध्या के साथ साथ पूरे देश में 10 दिन तक रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का समारोह चलेगा। अयोध्या के विकास पर सरकार 30 हजार करोड़ रुपए खर्च कर रही है। भगवान राम के नाम पर नया हवाईअड्डा बन रहा है और पूरी अयोध्या की ऐसी झांकी सजाई जा रही है कि उसकी चकाचौंध में बाकी तमाम चीजें ढक जाएंगी।

यह सही है कि शुरू के एक या दो चुनाव को छोड़ कर अयोध्या के मसले पर भाजपा को ज्यादा राजनीतिक फायदा नहीं हुआ। वह उत्तर प्रदेश के चुनाव नतीजों में बार बार दिखा भी। लेकिन इसमें कोई संदेह नही है कि अयोध्या का हिंदू जनमानस में एक बड़ा पवित्र और भावनात्मक स्थान है। वहां भव्य मंदिर का निर्माण और रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हिंदू भावनाओं को उद्वेलित करने वाली होगी। प्राण प्रतिष्ठा के दिन यानी 22 जनवरी से लेकर मतदान के दिन तक जो हिंदू अयोध्या पहुंचेंगे, निश्चित रूप से वह संख्या करोड़ों में होगी और जो लोग टेलीविजन चैनलों पर और सोशल मीडिया में रामलला के विराजने के उत्सव के वीडियो देखेंगे उनके मन में भाजपा और नरेंद्र मोदी के प्रति सद्भाव बनेगा।

हिंदू हित की जो बात भाजपा कहती है उसके प्रति भरोसा बनेगा और जो अधूरे काम बताए जाते हैं उनके पूरे होने की उम्मीद बंधेगी। व्यापक हिंदू मानस को प्रभावित करने वाली इस परिघटना से जाति गणना और आरक्षण की विपक्षी राजनीति का बड़ा काउंटर नैरेटिव बनेगा। भाजपा इसकी मदद से सामाजिक व राजनीतिक स्तर पर हो रहे बदलावों का चक्र वापस घुमाने का प्रयास करेगी।

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By अजीत द्विवेदी

संवाददाता/स्तंभकार/ वरिष्ठ संपादक जनसत्ता’ में प्रशिक्षु पत्रकार से पत्रकारिता शुरू करके अजीत द्विवेदी भास्कर, हिंदी चैनल ‘इंडिया न्यूज’ में सहायक संपादक और टीवी चैनल को लॉंच करने वाली टीम में अंहम दायित्व संभाले। संपादक हरिशंकर व्यास के संसर्ग में पत्रकारिता में उनके हर प्रयोग में शामिल और साक्षी। हिंदी की पहली कंप्यूटर पत्रिका ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, टीवी के पहले आर्थिक कार्यक्रम ‘कारोबारनामा’, हिंदी के बहुभाषी पोर्टल ‘नेटजाल डॉटकॉम’, ईटीवी के ‘सेंट्रल हॉल’ और फिर लगातार ‘नया इंडिया’ नियमित राजनैतिक कॉलम और रिपोर्टिंग-लेखन व संपादन की बहुआयामी भूमिका।

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