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करवट बदलती कांग्रेस

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भोपाल। विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद अब कांग्रेस में तेजी से नेतृत्व परिवर्तन किया गया है। अपेक्षाकृत युवा नेतृत्व को कमान देते हुए जातीय समीकरण भी साधे गए हैं। जीतू पटवारी को प्रदेश अध्यक्ष उमंग सिंगार को नेता प्रतिपक्ष और हेमंत कटारे को उपन्यता प्रतिपक्ष बनाकर पार्टी ने संदेश दे दिया है कि अब हार के बाद मौजूदा नेतृत्व को और मौका नहीं देना चाहता है।

दरअसल, प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2023 के लिए कांग्रेस नेताओं की उम्मीदें ऊफान पर थी कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने यहां तक कह दिया था कि लिखकर रख लो प्रदेश में कांग्रेस की डेढ़ सौ सीटों से भी ज्यादा आएंगे लेकिन जब परिणाम आए पार्टी आलाकमान भौचक्का रह गया। कांग्रेस की करारी हार हुई। समीक्षा के लिए प्रदेश के नेताओं को दिल्ली बुलाया गया जहां नेताओं ने हार के लिए ईवीएम को दोषी ठहराया। तब नेताओं ने कहा यह मामला हम देख लेंगे। बाकी और कारण बताइए। संतोषजनक उत्तर न मिलने के कारण पार्टी हाईकमान ने प्रदेश नेतृत्व में आमूल चूल परिवर्तन करने का मन बना लिया था और हाल ही में जब नेता प्रतिपक्ष के चयन के लिए बैठक हुई। उसमें कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बना और पार्टी हाई कमान में किसी भी प्रकार की देरी न करते हुए शनिवार शाम को व्यापक परिवर्तन कर दिया। परिवर्तन के इस निर्णय में जहां युवा नेतृत्व को मौका दिया गया है। वहीं जातीय और क्षेत्रीय संतुलन भी साधने की कोशिश की गई है। मालवा का इलाका जो भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता है। इंदौर से पिछड़े वर्ग के नेता माने जाने वाले जीतू पटवारी को प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं धार से आदिवासी नेता उमंग सिंगार को नेता प्रतिपक्ष का दायित्व सोपा गया है। वहीं चंबल से विधायक हेमंत कटारे को उप नेता प्रतिपक्ष बनाया गया है।

बहरहाल, कांग्रेस पार्टी हाईकमान ने न केवल नेतृत्व परिवर्तन किया है वरन कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के विरोधी नेताओं को कमान सौंप कर यह संदेश दे दिया है कि अब प्रदेश में राहुल गांधी के विश्वसनीय नेता पार्टी की कमान संभालेंगे कमलनाथ और जीतू पटवारी के संबंधों मैं खटास देखी जाती रही है। वहीं दिग्विजय सिंह और उमंग सिंगार के बीच भी सार्वजनिक बयान बाजी किसी से छिपी नहीं है। चंबल इलाके से आने वाले पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह चुनाव हार गए हैं। इस कारण इस क्षेत्र में पार्टी का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए पूर्व नेता प्रतिपक्ष रहे। स्वर्गीय सत्यदेव कटारे के पुत्र हेमंत कटारे को विधानसभा में उपन्यता प्रतिपक्ष बनाया गया है।

कुल मिलाकर प्रदेश में कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव 2024 को देखते हुए नया नेतृत्व उभारने की कोशिश की है। युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में जीतू पटवारी ने प्रदेश में अपनी अमित छाप छोड़ी थी। वे सदन के अंदर और सदन के बाहर एक संघर्ष नेता के रूप में जाने जाते हैं भले ही वे विधानसभा का चुनाव हार गए हो लेकिन राहुल गांधी का उन पर भरोसा अभी कायम है। नेतृत्व को लेकर जिस तरह से कांग्रेस ने प्रदेश में करवट ली है उससे नए सिरे से प्रदेश में कांग्रेस जमावट और कसावट करेगी।

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