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युवाओं को अपने प्रधानमंत्री पर भरोसा है

प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षा और परीक्षा की प्रक्रिया में सुधार की जो पहल की है उस पर छात्रों की प्रतिक्रिया सोशल मीडिया के बाहर सार्वजनिक रूप से भी दिखने लगी है। उन्होंने जो नियम बनाने और विधायी कदम उठाने की पहल की है और युवाओं से सीधी अपील की है उसका असर यह हुआ है कि आंदोलन की नैतिक ताकत बने सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल समाप्त कर दी और इसके साथ ही आंदोलन की तीव्रता काफी कम हो गई। इसकी व्यापकता भी धीरे धीरे कम हो रही है।

पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन की जिन तस्वीरों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि देश का युवा खास कर ‘जेन जी’ केंद्र की सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ हो गया है वह देश की प्रतिनिधि तस्वीर नहीं है। इसे ऐसे भी कह सकते हैं कि उन तस्वीरों से देश की वास्तविकता नहीं जाहिर हो रही है। हालांकि इसमें कोई संदेह नहीं है कि पेपर लीक की घटना, जैसा कि प्रधानमंत्री ने स्वंय कहा, ‘जघन्य पाप’ है। लेकिन आगे ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और इसमें शामिल लोगों को कड़ी से कड़ी सजा मिले इसके लिए प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता पर भी किसी को संदेह नहीं है। देश का युवा वर्ग और छात्रों का भी प्रधानमंत्री के साथ ऐसा सीधा जुड़ाव या संवाद है कि वे इस मामले में प्रधानमंत्री की गंभीरता को समझ रहे हैं। तभी गुरुवार, 23 जुलाई की रात को प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर सीधे युवाओं को ‘फ्रेंड्स’ कह कर संबोधित किया। अपने मोबाइल से वीडियो बना कर उन्होंने पोस्ट किया और अगले दिन यानी शुक्रवार की रात को बताया कि उस पर कितनी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। गुरुवार रात के प्रधानमंत्री के इंस्टाग्राम वीडियो ने रिकॉर्ड बनाया। करीब 35 करोड़ लोगों ने उसे देखा और पेपर लीक से लेकर परीक्षा में सुधार के अनेक सकारात्मक सुझाव दिए, जिनका जिक्र प्रधानमंत्री ने अपने अगले वीडियो में किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षा और परीक्षा की प्रक्रिया में सुधार की जो पहल की है उस पर छात्रों की प्रतिक्रिया सोशल मीडिया के बाहर सार्वजनिक रूप से भी दिखने लगी है। उन्होंने जो नियम बनाने और विधायी कदम उठाने की पहल की है और युवाओं से सीधी अपील की है उसका असर यह हुआ है कि आंदोलन की नैतिक ताकत बने सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल समाप्त कर दी और इसके साथ ही आंदोलन की तीव्रता काफी कम हो गई। इसकी व्यापकता भी धीरे धीरे कम हो रही है। इसका कारण यह है कि देश के युवाओं को अपने प्रधानमंत्री और उनके संकल्पों पर भरोसा है। उनको विश्वास है कि प्रधानमंत्री मोदी 2047 तक विकसित भारत बनाने के संकल्प के साथ काम कर रहे हैं। इसके रास्ते में जो भी बाधाएं आएंगी उनको दूर किया जाएगा।

बहरहाल, पेपर लीक को लेकर भी प्रधानमंत्री की पहल पर एक साथ कई काम शुरू हो गए हैं। शुक्रवार को कैबिनेट की विशेष बैठक संसद भवन के अंदर हुई, जिसमें द पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रीवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। अब सरकार पेपर लीक और परीक्षा में अक्सर होने वाली दूसरी गड़बड़ियों को रोकने के लिए ज्यादा सख्त कानून बनाने जा रही है। इसे मानसून सत्र के दूसरे हफ्ते के शुरू में ही पेश किया जा सकता है। प्रधानमंत्री चाहते हैं कि इस पर जल्दी से जल्दी चर्चा करा कर कानून बनाया जाए। इसमें पेपर लीक के दोषियों के लिए 10 साल की सजा और 10 करोड़ रुपए के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। साथ ही यह भी प्रावधान किया गया है कि पेपर लीक की घटना की जांच दो महीने में होगी और तीन महीने के अंदर अदालत में ट्रायल पूरा करके फैसला सुनाया जाएगा। इस संशोधन बिल को मंजूरी देने से पहले ही प्रधानमंत्री मोदी ने पेपर लीक से जुड़ी घटनाओं की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का आदेश दे दिया था। इस बिल में इस पूरी प्रक्रिया को वैधानिक स्वरूप देने का प्रावधान भी किया गया है।

इस मामले में सरकार की गंभीरता इस बात से दिखाई देती है कि मेडिकल में दाखिले के लिए नीट यूजी परीक्षा कराने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए के 47 कर्मचारियों को बरखास्त कर दिया गया है। सरकार एनटीए का भी पुनर्गठन करने वाली है ताकि परीक्षा की प्रक्रिया को किसी भी तरह की लीक और गड़बड़ी से सुरक्षित किया जा सके। चूंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वंय इस पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं इसलिए युवाओं को और उनके अभिभावकों को भी भरोसा बना है। उनको लग रहा है कि सरकार परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए काम कर रही है। ध्यान रहे पहले ही इस बात की घोषणा हो चुकी है कि अगले साल नीट यूजी की परीक्षा कंप्यूटर आधारित होगी। इससे भी छात्रों और युवाओं को भरोसा बना है।

दूसरी ओर अगर विपक्षी पार्टियों का रवैया देखें तो वह बहुत निराशाजनक दिखेगा। उनकी तरफ से किसी तरह का रचनात्मक सुझाव सरकार के सामने नहीं प्रस्तुत किया जा रहा है। उनकी ओर से सिर्फ शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की जा रही है। जिस समय जंतर मंतर पर प्रदर्शन शुरू हुआ उस समय लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष विदेश में थे। वहां से लौटने के बाद उन्होंने इंतजार किया कि संसद का सत्र शुरू हो और मीडिया का अटेंशन बने तो वे आंदोलन शुरू करें। छात्रों व युवाओं के संसद मार्च से जो माहौल बना उसका लाभ लेने के लिए वे अपनी पार्टी के नेताओं के साथ प्रधानमंत्री आवास पर प्रदर्शन करने पहुंच गए। असल में उनको यह असुरक्षा बोध घेरे हुए था कि कहीं जंतर मंतर के प्रदर्शन को ज्यादा लोगों का समर्थन न मिल जाए या उसमें शामिल लोग विपक्ष की जगह न ले लें। इसलिए उन्होंने आनन फानन में प्रदर्शन किया और संसद की कार्यवाही पूरी तरह से ठप्प की।

सवाल है कि क्या देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के पास पेपर लीक की घटना का विरोध करने का नैतिक आधार है? अकेले राजस्थान में 2018 से 2023 के कांग्रेस राज में 19 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए और कांग्रेस की सरकार ने किसी की भी जवाबदेही तय नहीं की। कांग्रेस शासित दूसरे राज्यों में भी अनेक परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं। उसे रोकने या उसमें शामिल लोगों को सजा दिलाने में विफल रही कांग्रेस नीट यूजी के पेपर लीक के हवाले केंद्र सरकार पर हमलावर हो रही है। वास्तविकता यह है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार का ट्रैक रिकॉर्ड इस मामले में कांग्रेस की केंद्र और राज्यों की सरकारों के मुकाबले बहुत बेहतर है। कांग्रेस को ध्यान रखना चाहिए कि 2014 में एनडीए की सरकार बनने से पहले के सात साल में यूपीए के शासन में 71 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए थे। असल में मौजूदा सरकार पिछली सरकार से जो गड़बड़ियां विरासत में मिली हैं उसे ठीक करने का काम कर रही है। इस काम में सरकार का सहयोग करने की बजाय विपक्ष इसमें अड़ंगा लगा रहा है।

विपक्ष के साथ एक संकट यह भी है कि उसकी पार्टियों में आपस में ही तालमेल नहीं है। हर पार्टी अपने हिसाब से राजनीति करने में लगी है। आम आदमी पार्टी को चूंकि अगले साल के चुनाव में पंजाब और गोवा में कांग्रेस के खिलाफ लड़ना है इसलिए वह कांग्रेस की पोल खोल रही है। दूसरी विपक्षी पार्टियां चाहे वह समाजवादी पार्टी हो या शरद पवार की एनसीपी हो या उद्धव ठाकरे की शिव सेना, इनका सारा समय संतुलन बनाने में जा रहा है। ये कांग्रेस के साथ भी दिख रहे हैं और जंतर मंतर पर आम आदमी पार्टी के समर्थन से चल रहे आंदोलन में भी दिख रहे हैं। सवाल है कि ऐसा विपक्ष कैसे युवाओं में भरोसा पैदा कर पाएगा कि वह उनके हित में काम कर रहा है?

युवाओं को विपक्ष की राजनीति और उसके ट्रैक रिकॉर्ड की जानकारी है। इसलिए उनका भरोसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर है। उनको पता है कि कांग्रेस ने जंतर मंतर के आंदोलन और सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल से बने माहौल को पटरी से उतारने का प्रयास किया। उनको यह भी पता है कि कांग्रेस जो कुछ भी कर रही है उसका मकसद सिर्फ राजनीतिक लाभ लेना है। इसलिए ‘जेन जी’ के युवा अगर पेपर लीक से नाराज भी हुए तो उन्होंने कांग्रेस या किसी दूसरी विपक्षी पार्टी का समर्थन नहीं किया। वे कांग्रेस के किसी आंदोलन का हिस्सा नहीं बने। उन्होंने अपनी चिंताएं बता दीं और अब उनको भरोसा है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार उन चिंताओं को स्थायी समाधान के लिए काम कर रही है। युवाओं का अपने प्रधानमंत्री पर जो भरोसा है उसका असर आने वाले दिनों में दिखाई देगा, जब छात्र का प्रदर्शन पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा और सरकार लीकप्रूफ परीक्षा की व्यवस्था बनवा देगी।  (लेखक दिल्ली में सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तामंग (गोले) के कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त विशेष कार्यवाहक अधिकारी हैं।)

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