nayaindia youth unemployment समय बड़ा बलवान, युवा उठ रहा बेरोजगारी मुद्दे पर?
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समय बड़ा बलवान, युवा उठ रहा बेरोजगारी मुद्दे पर?

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युवाओं का नशा एकदम से उतरा दिखने लगा है। यूपी में पुलिस भर्ती का पर्चालीक होने के बाद बेरोजगारों पर चढ़ा धर्म का नशा काफूर हो गया। दस साल से इस हिन्दु-मुसलमान के नशे में डूबे नौजवान ओवर एज की दहलीज तक आ गए थे। वैकेन्सी निकल नहीं रही थीं। जो निकलती थीं उसकी परीक्षा कैंसिल हो जाती थी। परीक्षा होती थी तो पेपर लीक हो जाता था। कब तक बिना काम धाम के रहकरमोदी, मोदी करते?…यूपी के युवा आंदोलन का ऐसा असर हुआ कि कांग्रेस ने अग्निपथ योजना के खिलाफ अपनी आवाज अचानक तेज कर दी। youth unemployment

क्या होगा लोकसभा चुनाव में किसीको नहीं मालूम! और यह मालूम नहीं होना हीइंडिया के लिए बड़ी उम्मीद है।अभी तक यही कहा जा रहा था कि मोदी ही आएंगे। मगर अब संशय हो गया है। सभी तरफ, बीजेपी में भी।

कहते हैं समय बड़ा बलवान होता है। और जब वह आ जाता है तो फिर कोई कुछ नहीं कर सकता।अब सवाल यह है कि क्या वह आ गया? कुछ कुछ इसके संकेत होने लगे हैं।

युवाओं का नशा एकदम से उतरा दिखने लगा है। यूपी में पुलिस भर्ती का पर्चा लीक होने के बाद बेरोजगारों पर चढ़ा धर्म का नशा काफूर हो गया। दस साल सेइस हिन्दु-मुसलमान के नशे में डूबे  नौजवान ओवर एज की दहलीज तक आ गए थे। वैकेन्सीनिकल नहीं रही थीं। जो निकलती थीं उसकी परीक्षा कैंसिल हो जाती थी।परीक्षा होती थी तो पेपर लीक हो जाता था। कब तक बिना काम धाम के रहकरमोदी, मोदी करते?

बेरोजगार सड़क पर आ गए है। मगर यह सड़क दूसरी थी। एक पर दस साल से थे। बेकारहोने को भी सड़क पर आना कहते हैं। और सड़क पर आकर अपनी आवाज उठाने को भीसड़क पर आना। इस बार इस सड़क पर थे। पेपर लीक के खिलाफ। काम की मांग केलिए। और जैसा कि हम लिख रहे हैं कि क्या समय बदल गया? समय आ गया?

यूपी के युवा आंदोलन का ऐसा असर हुआ कि कांग्रेस ने अग्निपथ योजना केखिलाफ अपनी आवाज अचानक तेज कर दी। कांग्रेस इसे बंद करने की मांग तो पहलेदिन से कर रही है। राहुल ने खूब आवाज उठाई। पूर्व सैनिकों ने भी। रिटायरहोने के बाद सेना प्रमुख रहे जनरल नरवाणे ने कहा कि सेना से बिना पूछे यहयोजना लाई गई है।

सेना में भर्ती लंबे समय से बंद थी। और अग्निपथ लाने सेपहले जिन युवाओं का सिलेक्शन हो चुका था उन्हें नियुक्ति नहीं दी जा रहीथी। कांग्रेस ने यह मामला फिर से उठाया। और समय कैसे बदलता है यह इससेपता चलता है कि इस बार, यूपी के पुलिस पेपर लीक की पृष्ठभूमि में यहमामला भी चल निकला।

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नौकरी और युवा को जो मीडिया भूला बैठा था उसे भी याद आ गया कि हां, यह कोईमुद्दा है। लेकिन यह कोई मुद्दा नहीं है। सबसे बड़ा मुद्दा है। राहुलबहुत समय से कह रहे हैं। हमने कई लेख लिखे। मगर शायद समय नहीं आया था। आजबेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। अब अगर इन्डिया गठबंधन के सारे दल

इसे एक स्वर में उठाएं तो यह बाजी पलटने वाला मुद्दा साबित हो सकता है।

युवा आखिर कब तक बिना काम के रहकर मोदी, मोदी कर सकता है। पांच किलो मुफ्तअनाज इसलिए दिया जा रहा है कि वह इसी में जीना सीख ले। पहले जैसे दिन भरबेगारी करवाकर थोड़ा सा अनाज झोली में डाला जाता था। वैसे ही। पहले बेगारीमें मजदूरी करवाई जाती थी। आज नारे लगवाए जाते हैं। उपद्रव करवाए जाते

हैं। पुरानी बेगारी खतम हुई। और अब शायद नए किस्म की मोदी मोदी करने कीबेगारी भी शायद खत्म होने की दिशा में है। नौजवान बिना नौकरी के कब, कब मोदी, मोदी करते रहेंगे?

कहते हैं जिसका समय आ गया कोई रोक नहीं सकता। मोदी का समय ‌भी आया था अन्ना हजारे के आंदोलन के साथ। तब किसको मालूम था कि इसका फायदा मोदी को मिलेगा।

अब ऐसे ही बेरोजगारी का मुद्दा इंडिया गठबंधन के लिए एक बड़ा अवसर लेकरआया है। दस साल में पहली बार कोई बड़ी हलचल दिख रही है जनता में। औरइसकी प्रतिक्रिया भी।

बहरहाल, अभी जब यह लिख रहा हूं तब राज्यसभा के लिए तीन राज्यों मेंवोटिंग भी हो रही है। और वहां बीजेपी बुरी तरह तोड़फोड़ भी कर रही है।नतीजे आ जाएंगे। मालूम पड़ जाएगा। मगर अब विधायक तोड़ने, कांग्रेस औरदूसरी पार्टियों के नेता तोड़ने से कुछ नहीं होगा।

अगर जनता जाग गई तो ये अवसरवादी नेता कुछ नहीं कर सकते। खुद बीजेपी हीइन्हें बाद में कुछ नहीं देगी। तो बीजेपी का राज्यसभा चुनाव में यह एक दोज्यादा सदस्य जिता लेना जनता के चुनाव लोकसभा में उसकी कोई मदद नहींकरेगा। बशर्त विपक्ष रोजी रोटी के मुद्दे को पूरी ताकत से उठाए।

दरअसल विपक्ष की एकता हो जाना परिवर्तन की पहली सीढ़ी थी। फिर सपा और आमआदमी पार्टी के साथ सीट शेयरिंग हो जाना दूसरी। और फिर यह यूपी में पुलिससिपाही की भर्ती में धांधली के खिलाफ युवाओं का उठ खड़ा होना तीसरी।

अब तीन सीढ़ी चढ़ जाने के बाद कोई नीचे तो उतरता नहीं। ऊपर ही जाना होताहै। और यही इंडिया गठबंधन को समझना है। गांठ बांधना है।

यूपी में समाजवादी पार्टी के विधायक क्रास वोट कर आए। अब वे किस काम के?हिम्मत दिखाकर उन्हें पार्टी से बाहर करना चाहिए। विधायक बने रहेंगे। बनेरहें। मगर सपा में नहीं होना चाहिए। वहां कोई सत्ता में तो है नहीं सपाजो हिमाचल की तरह सोचना पड़े कि सरकार चली जाएगी। निकालो। बाहर करो।हिमाचल में तो कांग्रेस को भुगतना पड़ेगा।

लेकिन यूपी से मैसेज जबर्दस्त जाएगा। जनता ऐसे ही कड़े फैसले लेने वालेनेता को पसंद करती है। लोकसभा में इसका ऐसा फायदा सपा को और इंडियागठबंधन को मिलेगा जो अभी वह सोच भी नहीं सकते। जिस पीडीए ( पिछड़ा, दलित,अल्पसंख्यक) की बात अखिलेश करते हैं वह झूर ( एकजुट होकर) के उनके पक्षमें आएगा।

एक पत्रकार अनिल यादव ने लखनऊ में वोट डालने जाते हुए सपा केबाहुबली विधायकों से कैमरे पर कहा कि क्या यह दलित और पिछड़ों के वोट सेजीतकर उन के साथ गद्दारी नहीं है? यह वीडियो मिनिटों में वायरल हो गया।जो बाहुबली किसी को कुछ नहीं समझते वे पत्रकार के जेनुइन ( सही) सवाल परहतप्रभ हो गए। और वहां से भाग निकले।

यह पत्रकारिता की ताकत है। हें हें करने वाले पत्रकारों को एक पत्रकारअनिल यादव ने बता दिया कि सही सवाल किसी से भी पूछा जा सकता है। दस सालपहले पूछे ही जाते थे।

खैर यह अलग मामला है। जरूरी है मगर इस पर लिखने लगे तो विषयातंर हो जाएगा।

तो अगर सही मुद्दे सही तरीके से इस चुनाव में उठ गए तो प्रधानमंत्री केसारे भावनात्मक मुद्दों की हवा निकल जाएगी।

एक सीट पर एक उम्मीदवार की शुरुआत हो गई है। भाजपा विरोधी वोट नहीं बंटने सेइंडिया की आधी जीत तय हो जाएगी। अभी 37 प्रतिशत वोट है भाजपा का। मिलकरलड़ने से इंडिया का इससे बहुत ऊपर जाएगा।

दक्षिण में भाजपा है नहीं। वहां करीब 150 सीटें हैं। जहां इस बार इकतरफाइंडिया को लीड मिल सकती है।

लेकिन इस सबके लिए जरूरत इस बात की है कि नफरत और विभाजन के मुद्दे नहींचल पाएं। इंडिया की जल्दी से जल्दी कुछ संयुक्त रैलियां हों। अभी तक एकबार भी राहुल, अखिलेश, तेजस्वी, उद्धव, स्टालिन, ममता, केजरीवाल, शरदपवार किसी जनसभा में एक साथ नहीं दिखे। आखिरी बार खाली मुम्बई की इंडियागठबंधन की मीटिंग में दिखे थे। मगर जनसभा में भीड़ के बीच दिखने का मैसेजअलग जाता है।

सुना है पटना में 3 मार्च को गांधी मैदान में हो रही है। तेजस्वी जिस तरह वहां जन विश्वास यात्रा पर निकले हैं। और उसमें घंटो लेट होने के बाद भी आधी आधी रात तक हजारों लोग उनकी प्रतीक्षा करते खड़े हो रहे हैं इससे लगता है कि वहां रैली तो सफल होगी। मगर ऐसी ही कुछ और रैलियां भी अलग अलग राज्यों में इंडिया गठबंधन को करना होंगी।

By शकील अख़्तर

स्वतंत्र पत्रकार। नया इंडिया में नियमित कन्ट्रिब्यटर। नवभारत टाइम्स के पूर्व राजनीतिक संपादक और ब्यूरो चीफ। कोई 45 वर्षों का पत्रकारिता अनुभव। सन् 1990 से 2000 के कश्मीर के मुश्किल भरे दस वर्षों में कश्मीर के रहते हुए घाटी को कवर किया।

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