दुनिया के दूसरे देशों में जाकर आतंकवाद के मसले पर और पाकिस्तान की सरजमीं पर हुई सैन्य कार्रवाई के बारे में बताने के लिए जो सात डेलिगेशन जा रहे हैं उसमें अपवाद के लिए दो चार नेताओं को छोड़ दें तो भाजपा के ज्यादातर सांसद औपचारिकता के लिए भरती किए गए हैं।
ज्यादतर सांसद लो प्रोफाइल हैं, जिनका वैश्विक मामलों में कोई खास एक्सपोजर नहीं है। संसद की बहसों और चर्चाओं में भी उनकी कोई खास भागीदारी नहीं रहती है। यह देखना दिलचस्प है कि विदेश मामलों की जानकारी रखने वाले या वैश्विक एक्सपोजर वाले जितने लोग इस डेलिगेशन में जा रहे हैं लगभग वे सभी लोग दूसरी पार्टियों के, खासकर कांग्रेस पार्टी के हैं। इसका एक कारण यह है कि भाजपा जब सत्ता में रही है तो जितने लोग विदेश मंत्री रहे वे या तो अब इस दुनिया में नहीं हैं या भाजपा से अलग हो गए हैं।
अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में यशवंत सिन्हा और जसवंत सिंह विदेश मंत्री रहे थे। इनमें से यशवंत सिन्हा अब विरोध में हैं और जसवंत सिंह का निधन हो गया है। नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में विदेश मंत्री रहीं सुषमा स्वराज का भी निधन हो गया है।
Also Read: हमारा उद्देश्य किसानों की तरक्की और समृद्धि है: नीतीश कुमार
डेलिगेशन में कांग्रेस की अहम भूमिका
लेकिन हैरानी की बात है कि भाजपा के पास विदेश राज्य मंत्री रहे नेताओं की भरमार है लेकिन उनमें से किसी को इस डेलिगेशन में नहीं रखा गया। इनमें सबसे पहला नाम जनरल वीके सिंह का है। वे सेना प्रमुख भी रहे हैं और विदेश राज्य मंत्री भी रहे हैं। अगर वे विदेश जाते तो किसी दूसरे नेता से बेहतर तरीके से सैन्य कार्रवाई के बारे में बता पाते।
ऐसे ही मीनाक्षी लेखी हैं, वे भी विदेश राज्य मंत्री रही हैं और अच्छी वकील हैं। उनको भी किसी डेलिगेशन में शामिल नहीं किया गया। पिछली सरकार में विदेश राज्य मंत्री रहे राजकुमार राजन और वी मुरलीधरन को भी मौका नहीं मिला। वसुंधरा राजे भी अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में विदेश मंत्री रही हैं। कांग्रेस सरकार में परनीत कौर विदेश राज्य मंत्री रही हैं और वे भी अभी भाजपा में ही हैं। हालांकि निष्क्रिय हैं। सो, विदेश मंत्रालय में रहे अपने नेताओं के मुकाबले भाजपा ने कांग्रेस के नेताओं को ज्यादा तरजीह दी।
सलमान खुर्शीद, आनंद शर्मा और शशि थरूर इसकी मिसाल हैं। अगर ध्यान से देखें तो सात में से सिर्फ एक डेलिगेशन की अध्यक्षता पारंपरिक भाजपा नेता के पास है और वे हैं रविशंकर प्रसाद। दूसरे भाजपा नेता जो डेलिगेशन की अध्यक्षता कर रहे हैं वे बैजयंत पांडा हैं, जो बीजू जनता दल से आए हैं। बाकी पांच में से तीन का नेतृत्व विपक्ष के पास है और दो का नेतृत्व भाजपा की सहयोगी पार्टी के नेता कर रहे हैं।