आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने गुजरात को छोड़ा हुआ था। उनका सारा ध्यान दिल्ली और पंजाब पर था। दिल्ली विधानसभा का चुनाव हारने के बाद उन्होंने पंजाब पर और फोकस किया था। इसके अलावा हरियाणा से कुछ उम्मीद जोड़ी थी। लेकिन गुजरात की विसावदर सीट के उपचुनाव में मिली जीत ने उनमें नई जान फूंक दी है। वैसे यह सीट आप की ही थी। 2022 के विधानसभा चुनाव में भूपेंद्र भयानी आप की टिकट से जीते थे लेकिन पिछले दिनों वे पाला बदल कर भाजपा में चले गए। सीट उनके इस्तीफे से खाली हुई तो उपचुनाव में केजरीवाल ने अपने सर्वाधिक भरोसे के नेता गोपाल इटालिया को टिकट दिया। ध्यान रहे भाजपा यह सीट 2007 से नहीं जीती है। यह सीट भाजपा के दिग्गज नेता केशुभाई पटेल की रही है और लेउवा पटेल बहुतायत वाली इस सीट पर कहा जाता है कि केशुभाई का भूत भाजपा को नहीं जीतने देगा। गौरतलब है कि केशुभाई को हटा कर ही 2001 में नरेंद्र मोदी को मुख्यमंत्री बनाया गया था।
बहरहाल, विसावदर सीट पर आप की जीत और कांग्रेस उम्मीदवार की जमानत जब्त होने के बाद केजरीवाल में जान लौटी है। वे पंजाब छोड़ कर गुजरात पहुंचे हैं। उन्होंने वहां ‘गुजरात जोड़ो’ अभियान शुरू किया है। वैसे है तो यह सदस्यता अभियान लेकिन केजरीवाल ने इसके गुजरात जोड़ने की बात कह कर शुरू किया है। वे दो साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट गए हैं। उनको लग रहा है कि जहां भाजपा कमजोर है वहां गुजरात के मतदाता कांग्रेस की बजाय आप को चुन सकते हैं। यानी उनकी पार्टी कांग्रेस का विकल्प बन सकती है, यह मान कर उन्होंने राजनीति नए सिरे से शुरू की है। दूसरी ओर राहुल गांधी के बयानों और प्रयोगों की वजह से गुजरात में कांग्रेस की हालत और खराब होती जा रही है। भारतीय जनता पार्टी को भी केजरीवाल का यह अभियान सूट कर रहा है क्योंकि के मजबूत होंगे तो कांग्रेस का वोट काटेंगे, जिसका फायदा भाजपा को मिलेगा। त्रिकोणीय लड़ाई में फिर भाजपा बड़ी जीत हासिल कर सकती है। पिछले विधानसभा चुनाव में उसने 156 सीटें जीत कर इतिहास बनाया था और कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल बनने लायक सीट भी नहीं जीत पाई थी।