आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल गायब हैं। दिल्ली विधानसभा का चुनाव हारने के बाद पिछले तीन महीने से वे लापता हैं। उनकी पार्टी को हारी ही वे खुद भी चुनाव हार गए तो विधानसभा की कार्रवाई में हिस्सा लेने की भी बाध्यता नहीं है। फरवरी में चुनाव हारने के बाद से पिछले तीन महीने में वे दो बार पार्टी की बैठक में शामिल हुए और उसके अलावा बेटी की शादी को लेकर उनकी खबरें और तस्वीरें आईं।
दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में उन्होंने बेटी की शादी के जुड़े कुछ कार्यक्रम किए थे और शादी की रस्में पंजाब के मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास कपूरथला हाउस में हुई थीं। इसे लेकर भी सवाल उठे थे और विरोधियों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर आरोप लगाया था कि उन्होंने सीएम आवास को बारात घर बना दिया है। गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा और हिंदी फिल्मों की हिरोइन परिणीति चोपड़ा की शादी भी कपूरथला हाउस में हुई थी।
बहरहाल, तीन महीने से केजरीवाल दिल्ली की राजनीति से दूर हैं तो ऐसा नहीं है कि वे घर में बैठे हुए हैं। वे अपनी पार्टी के राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल के पांच, फिरोजशाह रोड के आवास में रहते हैं लेकिन दिल्ली में भी उनकी रिहाइश बहुत कम होती है। वे ज्यादा समय पंजाब में बीता रहे हैं। पंजाब विधानसभा चुनाव में अब दो साल से कम समय रह गया है। मार्च 2027 में पंजाब का चुनाव होना है। केजरीवाल को पता है कि दिल्ली के बाद अगर पंजाब में आम आदमी पार्टी की सत्ता गई तो फिर बड़ा संकट होगा और पार्टी को बचाना मुश्किल हो जाएगा।
दिल्ली की राजनीति से दूर केजरीवाल
उनकी पार्टी में ज्यादातर ऐसे लोग जुड़े हैं, जो सत्ता की वजह से आए हैं। सत्ता आने से पहले जो लोग पार्टी से जुड़े थे उनमें से ज्यादातर लोगों को केजरीवाल ने पार्टी से निकाल दिया है। दिल्ली में सत्ता से बाहर होते ही दिल्ली नगर निगम भी हाथ से निकल गया है। चंडीगढ़ नगर निगम भी उनकी पार्टी गंवा चुकी है। पंजाब के अलावा किसी और राज्य में सत्ता के आसपास पहुंचने की भी संभावना नहीं दिख रही है।
तभी बताया जा रहा है कि केजरीवाल ने पंजाब में डेरा डाला है। वे राज्य सरकार के कामकाज की निगरानी कर रहे हैं और साथ ही पार्टी संगठन का कामकाज भी संभाल रहे हैं। उनके राज्यसभा जाने का रास्ता भी अभी बंद ही दिख रहा है। उनकी पार्टी ने राज्यसभा सांसद संजीव अरोड़ा को लुधियाना वेस्ट की विधानसभा सीट पर उपचुनाव का उम्मीदवार बनाया है। लेकिन चुनाव आयोग ने इस सीट पर चुनाव की घोषणा नहीं की है। यह सीट आप के विधायक के निधन से खाली हुई है।
केजरीवाल का इकबाल इतना कमजोर हो गया है कि संजीव अरोड़ा इस सीट से उपचुनाव के उम्मीदवार बनाए जाने के बावजूद राज्यसभा से इस्तीफा नहीं दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि वे उपचुनाव जीतने के बाद ही इस्तीफा देंगे और तब केजरीवाल उनकी सीट से उच्च सदन में जाएंगे। एक बार संसद में पहुंच जाने के बाद उनकी राजनीतिक सक्रियता बढ़ सकती है लेकिन उससे पहले तो वे बिल्कुल लो प्रोफाइल हो गए हैं।
दूसरे राज्यों में भी पार्टी की गतिविधियां लगभग पूरी तरह से शांत हैं। विपक्षी पार्टियों के गठबंधन ‘इंडिया’ में कुछ पार्टियों के साथ मिल कर उन्होंने एक उप समूह बनाया था। लेकिन उस उप समूह के नेता जैसे ममता बनर्जी, अखिलेश यादव भी इन दिनों कांग्रेस के साथ ही राजनीति कर रहे हैं। सो, केजरीवाल के पास इंतजार करने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है।
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Pic Credit: ANI
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