यह लाख टके का सवाल है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार कब तक अपने पद पर बने रहेंगे? वे पिछले साल जनवरी में मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त हुए थे और किसी बाहरी कारण से नहीं हटे या हटाए गए तो जनवरी 2029 तक पद पर रहेंगे। यानी लोकसभा चुनाव की घोषणा से पहले वे रिटायर हो जाएंगे। गौरतलब है कि चुनाव आयोग में नियुक्ति के नियमों के मुताबिक आय़ुक्त नियुक्ति की तारीख से छह साल तक या 65 साल की उम्र तक पद पर रह सकते हैं। इनमें जो पहले पूरा होगा उस दिन रिटायर होना होगा। ज्ञानेश कुमार जनवरी 2029 में 65 साल के हो जाएंगे। लोकसभा चुनाव की अधिसूचना मार्च में जारी होगी। इसका अर्थ है कि अगर ज्ञानेश कुमार अपना कार्यकाल पूरा करते हैं तब भी लोकसभा चुनाव नया आयुक्त कराएगा। केंद्र सरकार उनको सेवा विस्तार भी नहीं दे सकती है क्योंकि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। हालांकि सीबीआई, ईडी के निदेशकों को भी पांच साल तक सेवा विस्तार देने का कोई कानून नहीं था लेकिन सरकार ने कानून बना दिया और चहेते लोगों को लंबे समय तक पद पर रखना शुरू कर दिया है।
बहरहाल, सवाल यह है कि ज्ञानेश कुमार कार्यकाल पूरा करेंगे या बीच में रिटायर कराए जाएंगे? जितनी बदनामी उनकी हो गई है और उस हिसाब से को उनको खुद ही पद छोड़ देना चाहिए लेकिन वे इतने नैतिक मूल्यों वाले होते तो इतना विवाद ही क्यों होता? जानकार सूत्रों के मुताबिक अब दोनों चुनाव आयुक्तों के साथ ज्ञानेश कुमार की बैठक हो गई है और कई एसआईआर से जुड़े नियमों में कई बड़े बदलाव कर दिए गए हैं। इसलिए ज्ञानेश कुमार को नहीं हटाया जाएगा। लेकिन सूत्रों की इस बात को अंतिम नहीं माना जा सकता है। उनके खिलाफ विपक्षी गठबंधन यानी ‘इंडिया’ ब्लॉक आंदोलन करेगा और कॉकरोच जनता पार्टी भी सड़कों पर उतरेगी। ऐसे में उनको बनाए रखना मुश्किल होगा। अगले चक्र का चुनाव शुरू होने तक अगर उनको नहीं हटाया जाता है तो उनकी देखरेख में होने वाले चुनाव की विश्वसनीयता बहुत खराब होगी।
केंद्र सरकार उनको हटा दे और बाहर से किसी को लाकर सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं नियुक्त करे तब तो सुखबीर सिंह संधू मुख्य चुनाव आयुक्त बनेंगे। अन्यथा वे नहीं बन पाएंगे। अगर किसी तरह से बन भी गए तो लोकसभा चुनाव नहीं करा पाएंगे क्योंकि उनकी उम्र 63 साल हो गई है और वे जुलाई 2028 में रिटायर हो जाएंगे। ज्ञानेश कुमार की मनमानियों पर सवाल उठाने वाले दूसरे चुनाव आयुक्त विवेक जोशी का कार्यकाल बचा हुआ है। वे फरवरी 2031 तक पद पर रहेंगे। अगर कोई बड़ी उलटफेर नहीं हुई तो वे अगले लोकसभा चुनाव से पहले, जनवरी 2029 में ज्ञानेश कुमार के रिटायर होने के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त बन जाएंगे। अगर ज्ञानेश कुमार की मनमानियों पर सवाल उठाने वाला और दबाव डाल कर एसआईआर में चीजें ठीक कराने वाला चुनाव आयुक्त अगर मुख्य चुनाव आयुक्त बनता है तो निश्चित रूप से चुनाव की विश्वसनीयता बनेगी। विपक्ष भी इसका विरोध नहीं कर पाएगा और न सवाल उठा पाएगा। यह अलग बात है कि चाहे एसएस संधू हों या विवेक जोशी दोनों भाजपा की राज्य सरकारों और मोदी सरकार में अच्छे पदों पर काम करने के बाद ही चुनाव आयोग में पहुंचे हैं। इसलिए किसी से भी टीएन शेषन या जेएम लिंगदोह जैसे कामकाज की उम्मीदग नहीं करनी चाहिए।
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