झारखंड में अचानक कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा के बीच जंग जैसी स्थिति क्यों बन गई है? ऐसा नहीं है कि बिहार में कांग्रेस ने जेएमएम को सीट नहीं दी थी सिर्फ उस वजह से विवाद हो रहा है। इस विवाद की जड़ें गहरी हैं और कई कारणों में एक कारण भारतीय जनता पार्टी की राजनीति है। एक कारण राज्यसभा का चुनाव भी है, जो अगले महीने होने वाला है। उससे पहले कांग्रेस नेताओं की बयानबाजी से दिख रहा है कि कैसे पार्टी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को दबाव में लाना चाह रही है। एक के बाद एक कांग्रेस नेता हेमंत सरकार पर हमला कर रहे हैं। सोचें, कांग्रेस भी सरकार में शामिल है। लेकिन राज्य के प्रभारी के राजू ने सरकार की देखरेख में अवैध खनन का आरोप लगाया तो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रदीप यादव ने भी सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। एक एक करके कांग्रेस के कई नेताओं ने ऐसे आरोप लगाए हैं।
कांग्रेस नेताओं की ओर से दो कारणों से हमले हो रहे हैं। पहला कारण तो यह है कि हेमंत सोरेन पिछले कुछ दिनों से भाजपा के प्रति सद्भाव दिखा रहे हैं। वे असम में जाकर चुनाव लड़ रहे हैं और स्पष्ट रूप से कांग्रेस को नुकसान पहुंचा रहे हैं। दूसरा औऱ तात्कालिक कारण यह है कि अगले महीने राज्यसभा की दो सीटों के चुनाव होने वाले हैं, जिनमें से एक सीट कांग्रेस को चीहिए। पिछले लगभग सात साल से राज्य में कांग्रेस समर्थित जेएमएम की सरकार है और इस दौरान तीन बार राज्यसभा के दोवार्षिक चुनाव हुए और जेएमएम ने कांग्रेस को एक बार भी सीट नहीं दी। इस बार भी जेएमएम दोनों सीटों पर अपना दावा कर रहा है। इस बार कांग्रेस को हर हाल में एक सीट चाहिए। तभी कांग्रेस नेता सरकार को कठघऱे में खड़ा रहे हैं। लेकिन हेमंत सोरेन इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। उनको पता है कि कांग्रेस सरकार नहीं गिरा सकती है। कांग्रेस के बिना भी जेएमएम के 34, राजद के चार, लेफ्ट के दो विधायक हैं। राज्य में बहुमत का आंकड़ा 41 का है। सरकार को जयराम महतो का समर्थन भी मिल सकता है। दूसरा कारण यह है कि जेएमएम की सरकार गिराने के प्रयास से कांग्रेस की सेकुलर राजनीति को नुकसान होगा।
राज्यसभा चुनाव के अलावा एक दूसरा कारण भाजपा के साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की नजदीकी है। हेमंत सोरेन कांग्रेस और राजद के साथ रहते हुए भाजपा को भी साधे रहना चाहते हैं। वे एक साथ दो नावों की सवारी कर रहे हैं। उनको झारखंड का आदिवासी, मुस्लिम और ईसाई वोट भी चाहिए, साथ ही केंद्र सरकार का सद्भाव भी चाहिए ताकि केंद्रीय अनुदान, मदद आदि मिंलती रही और केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई भी थमी रहे। इसलिए वे भाजपा व केंद्र सरकार के प्रति सद्भाव भी दिखा रहे हैं। ध्यान रहे कुछ समय पहले इस बात की चर्चा हुई थी कि वे भाजपा के साथ जा सकते हैं। हालांकि उनको जाना नहीं था। लेकिन इस चर्चा से उनको लाभ हुआ। राज्य में केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई रूकी हुई है। भाजपा के प्रति अपने सद्भाव का संदेश देने के लिए ही वे असम में चुनाव लड़ रहे हैं और कांग्रेस को नुकसान पहुंचा रहे हैं। कांग्रेस को राज्यसभा की सीट नहीं देकर भी भी वे भाजपा को ही खुश कर रहे हैं। अगर उन्होंने दोनों उम्मीदवार उतारे तो निश्चित रूप से भाजपा किसी निर्दलीय उम्मीदवार को उतार कर समर्थन देगी और उसकी जीत सुनिश्चित करेगी। अगर अंत में कांग्रेस को एक सीट देने का फैसला हो भी जाता है तब भी भाजपा उम्मीदवार उतारेगी। तभी झारखंड में राज्यसभा का चुनाव दिलचस्प होने वाली है।


