ममता बनर्जी अपने राज्य में परेशान हैं। विधानसभा चुनाव से पहले परेशानी वाजिब है। वैसे भी भाजपा जिस तरह से चुनाव लड़ रही है और केंद्रीय एजेंसियां जिस तरह से काम कर रही हैं उससे ममता की परेशानी थोड़ी और बढ़ी है। लेकिन क्या वे इतनी परेशान हो गई हैं कि कांग्रेस के साथ साथ दूसरी विपक्षी पार्टियों के ऊपर भी भाजपा से मिले होने के आरोप लगा रही हैं? उन्होंने कांग्रेस के ऊपर तो आरोप लगाया कि उसकी अंदरखाने भाजपा से साठगांठ है लेकिन साथ ही तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के लिए भी कह दिया कि वे भाजपा से मिले हुए हैं।
इसका कारण समझ में नहीं आया। ममता बनर्जी ने कहा कि तमिलनाडु में कांग्रेस और एमके स्टालिन दोनों की भाजपा से साठगांठ है। उन्होंने आगे कहा कि चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के अधिकारियों को पर्यवेक्षक बना कर तमिलनाडु भेज दिया है, जिससे राज्य में विकास का काम ठप्प हो गया है। इन दोनों बातों का कोई तालमेल समझ में नहीं आ रहा है। तभी कांग्रेस के नेता कह रहे हैं कि असल में ममता बनर्जी की साठगांठ भाजपा से है और इसलिए उन्होंने ऐसा बयान दिया है। कहा जा रहा है कि तमिलनाडु में द्रविड मतदाताओं के बीच कंफ्यूजन पैदा करने के लिए ममता ने यह बयान दिया है। इसका थोड़ा बहुत ही सही लेकिन कांग्रेस और डीएमके को नुकसान हो सकता है।
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