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बेहद संगीन है ‘रंगीन’

रंगीन’ की कहानी कई विषयों को समेटने की कोशिश करती है जिनमें वैवाहिक समस्याएं, टूटे सपने, दरकते स्वाभिमान से लेकर छोटे शहरों के लोगों की वो छटपटाहट भी है जो उन्हें ऊंचे-खुले आकाश में उड़ने के लिए पंख तलाशती रहती है। ‘रंगीन’ की सबसे ‘संगीन’ बात ये है कि इस कहानी में कोई भी किरदार अपनी रहस्यमयी ज़िंदगी के सफर में ‘अपोलोजेटिक’ नहीं है। 

सिने-सोहबत

किसी भी तथाकथित सभ्य समाज में सबसे आसान है किसी भी ऐसी अवधारणा या प्रैक्टिस को ख़ारिज कर देना जो आमतौर पर देखने को न मिले। साथ ही अपने इर्द-गिर्द के उन लोगों को फ़टाक से जज कर लेने का फैशन भी है जो ‘आउट ऑफ़ बॉक्स’ सोच रखते हों, ज़रा अलग सी ज़िंदगी जीते हों। ये जानते हुए भी कम लोग स्वीकार पाते हैं कि लीक से हटकर चलने में बहुत ज़्यादा साहस और एक साफ़ विज़न की ज़रुरत पड़ती है और वह दुर्लभ है। आज के सिने-सोहबत में हाल ही में ओटीटी पर स्ट्रीम हुई वेब सीरीज़ ‘रंगीन’ के बहाने ये चर्चा करते हैं कि आख़िर इस शो की कहानी किस हद तक जड़ हो चुके समाज के एक तबके के दिल में जो ठहरा हुआ पानी है उस पर कंकड़ मारने का काम कर रही है? साथ ही कॉन्टेंट इकोसिस्टम में इस शो के आ जाने से किस तरह के विचार विमर्श हो रहे हैं? साथ ही ये चर्चा भी करेंगे कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए हर तरह के कॉन्टेंट के लिए एक मुनासिब नैरेटिव सेट कर लेना कितना ज़रूरी है ?

वेब सीरीज़ ‘रंगीन’ निर्भीकता और संभावनाओं से भरपूर है। यह आदर्श नाम के एक किरदार  की कहानी है, जिसे विनीत कुमार सिंह ने बख़ूबी निभाया है। आदर्श एक छोटे से शहर में रहने वाला एक मिडिल एज्ड अखबार संपादक है, जिसकी ज़िंदगी अचानक एक ड्रमैटिक मोड़ लेती है जब उसे पता चलता है कि उसकी पत्नी नैना एक ‘जिगोलो’ की सर्विस लेती है। पहले तो आदर्श को ये लगता है कि नैना किसी अफेयर में है लेकिन बाद में उसे नैना से ही पता चलता है कि मामला ‘पेड सेक्स’ का है। आदर्श का दिल टूट जाता है। उसकी प्रतिक्रिया ये होती है की वो एक बेहद ही अप्रत्याशित तरीके से बदला लेने का फैसला करता है- खुद जिगोलो बनकर।

पत्नी की भूमिका में हैं बेहतरीन कलाकार, राजश्री देशपांडे और जिगोलो का किरदार निभाया है तारुक रैना ने। हम आदर्श को एक डिसफंक्शनल शादी और संघर्षरत नौकरी में उलझे एक आम इंसान से एक ऐसी मिस्टीरियस दुनिया में कदम रखते हुए देखते हैं, जिसका हिस्सा बनने की उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी। इसकी कहानी इसे नयापन देती है।

‘रंगीन’ की निर्माता कंपनी है कबीर खान एंटरटेनमेंट और इसके शो रनर्स हैं अमरदीप गलसीन और आमिर रिज़वी। इस सीरीज़ का निर्देशन किया है कोपल नैथानी और प्रांजल दुआ ने। इसकी कहानी, पटकथा और संवाद को पूरा करने वाली बड़ी टीम में कई ज़रूरी नाम हैं, जिनमें अमरदीप गलसिन, आमिर रिज़वी के अलावा आएशा नायर, मोनिशा थ्यागराजन, करण राणा और श्रद्धा सिंह भी शामिल हैं।

‘रंगीन’ की कहानी कई विषयों को समेटने की कोशिश करती है जिनमें वैवाहिक समस्याएं, टूटे सपने, दरकते स्वाभिमान से लेकर छोटे शहरों के लोगों की वो छटपटाहट भी है जो उन्हें ऊंचे-खुले आकाश में उड़ने के लिए पंख तलाशती रहती है। ‘रंगीन’ की सबसे ‘संगीन’ बात ये है कि इस कहानी में कोई भी किरदार अपनी रहस्यमयी ज़िंदगी के सफर में ‘अपोलोजेटिक’ नहीं है।  ये बात इस कहानी की ताक़त है। कोई किसी को जज भी नहीं कर रहा है। इसके एक संवाद में सितारा जो कि अपने बुटीक के ज़रिए जिगोलो सर्विस चलाती है, नायक (विनीत कुमार सिंह) से कहती है कि ‘किसी भी क्लाइंट को जज करने की कोशिश मत करना, ये काम तो समाज का है’। शीबा चड्ढा अपनी भूमिका को शांत, मज़बूत और संयमित तरीके से निभाती हैं, जिससे वह सीरीज़ की सबसे प्रभावशाली किरदारों में से एक बन जाती हैं।

विनीत कुमार सिंह आदर्श की मुख्य भूमिका में क्या खूब जमे हैं। आदर्श को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में दिखाया गया है जो एक गहरे व्यक्तिगत संकट से जूझ रहा है और यह समझने की कोशिश कर रहा है कि वह वास्तव में है कौन?  आदर्श की पत्नी नैना का किरदार निभाने वाली राजश्री देशपांडे ने भी शानदार काम किया है। हां, ये बात ज़रूर खली कि उनका रोल काफ़ी छोटा लगा और उनकी प्रतिभा का पूरा इस्तेमाल नहीं किया जा सका  है।

दूसरी ओर, सहायक कलाकार भी शो में ज़रूरी जान डाल देते हैं। तारुक रैना, जिन्हें हमने ‘मिस्टमैच्ड’ में अपना कौशल दिखाते देखा है, यहां जिगोलो सनी का किरदार ज़बरदस्त कन्विक्शन से निभा रहे हैं। उन्हें देखना मज़ेदार है और अपने चार्म, आत्मविश्वास और चंचल ऊर्जा से वे अपने किरदार को नई ऊंचाइयां देते हैं। मेघना मलिक, मेघना बर्मन, स्मिता बंसल और सायरस साहूकार ने भी उम्दा काम किया है।

वेब सीरीज ‘रंगीन’ में एक ऐसा विषय दिखाया गया है, जिसके बारे में बातचीत करने से आमतौर लोग अभी भी कतराते हैं। दरअसल, समस्या ये भी है कि अपने समाज में ‘सेक्स’ शब्द का उच्चारण भी बच बचा कर करने का ट्रेंड है। बात चाहे ‘सेक्स एजुकेशन’ की हो या इस तरह के विषयों पर बने कॉन्टेंट की, जिन्हें वैचारिक दृष्टि से देखें तो समाज में निरंतर कमज़ोर होती ‘विवाह की संस्था’ पर कटाक्ष करने के लिए ज़रूरी भी हैं। थोड़ा अजीब तो है लेकिन इन मुद्दों पर उतनी बातचीत नहीं हो पाती, जितनी होनी चाहिए।

‘वेश्यावृत्ति’ का ज़िक्र विश्व इतिहास में प्राचीन काल से रहा है। ‘जिगोलो’ शब्द, ‘दरअसल’ उन पुरुषों के लिए प्रयोग में आता है जो किसी महिला या पुरुष के साथ शारीरिक संबंध बनाने और वक़्त बिताने के काम को पेशेवर तरीके से शुल्क के बदले करते हों। ‘रंगीन’ में इस पूरी दुनिया को बेहद ही संगीन और संवेदनशील तरीके से दिखाया गया है और इस बात का पूरा ध्यान रखा गया है कि इस तरह के विषय से न्याय करने की आड़ इसमें अश्लील दृश्यों की भरमार न कर दी गई हो।

कथ्य की दृष्टि से देखें तो ‘रंगीन’ की कहानी में एक ‘जिगोलो’ की नज़र से उसके क्लाइंट्स की ज़िंदगियों में भी थोड़ी बहुत लेकिन बेहद ज़रुरी ताक-झांक की गई है। ये भी काफ़ी दिलचस्प है कि इस शो के कई दृश्यों में बेहद ही गंभीर बातों को टटोला गया है जिन पर अच्छा ख़ासा डिस्कोर्स किया जाना चाहिए। ‘रंगीन’ का नायक एक ‘सेल्फ़ डिस्कवरी’ मोड पर चला जाता है जो कि अंततः उसे वहीं ले आते हैं जहां से वो बिलॉन्ग करता है।

‘रंगीन’ अपने विषय के नयेपन, निर्भीक चयन, नॉन जजमेंटल सेटअप, किरदारों के ‘अनअपोलोजेटिक’ अप्रोच और इन क़िरदारों को पर्दे पर बखूबी जीवंत कर देने वाले कलाकारों की वजह से एक ज़रूरी वेब सीरीज़ बन पड़ी है। अमेज़न प्राइम वीडियो पर है। देख लीजिएगा। (पंकज दुबे उपन्यासकार, पॉप कल्चर स्टोरीटेलर और चर्चित यूट्यूब चैट शो, “स्मॉल टाउन्स बिग स्टोरिज़” के होस्ट हैं।)

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