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बिहार में जुमलों की बौछार

चुनाव के समय वैसे भी जुमले ज्यादा बोले जाते हैं लेकिन उसमें भी बिहार का चुनाव अनोखा हो गया है। पक्ष और विपक्ष दोनों की तरफ से ऐसे ऐसे जुमले बोले जा रहे हैं कि जनता आवाक है। अब तक नरेंद्र मोदी को माना जाता था कि वे ऐसी बात कह सकते हैं, जिसके बारे में किसी ने सोचा नहीं होगा। लेकिन इस बार तेजस्वी यादव और राहुल गांधी ने उनको पीछे छोड़ा है। नरेंद्र मोदी और अमित शाह इस उधेड़बुन में हैं कि कैसे तेजस्वी और राहुल के जुमलों का जवाब दिया जाए।

इस बार के चुनाव में सबसे बड़ा जमुला तेजस्वी यादव ने छोड़ा। उन्होंने कहा कि बिहार के हर परिवार को एक सरकारी नौकरी देंगे। सोचें, बिहार में पौने तीन करोड़ परिवार हैं। इनमें से करीब 25 लाख लोग सरकारी नौकरी में हैं। इसका मतलब है कि बचे हुए ढाई करोड़ परिवारों में तेजस्वी एक एक नौकरी देंगे। सवाल है कि इतने लोग करेंगे क्या, बैठेंगे कहां और उनको वेतन कहां से दिया जाएगा? अगर न्यूनतम वेतन भी देते हैं तो पौने तीन करोड़ लोगों को वेतन देने के लिए हर साल छह लाख करोड़ रुपए की जरुरत होगी। इसके अलावा स्थापना के अन्य खर्च अलग हैं, जबकि बिहार का कुल बजट ही तीन लाख करोड़ रुपए का है। हर घर को एक सरकारी नौकरी देने के जुमले के बाद तेजस्वी ने हर महिला को ढाई हजार रुपया महीना देने का वादा भी किया है।

जुमलों की इस जंग में राहुल गांधी कैसे पीछे रहते तो उन्होंने मेड इन बिहार का जुमला बोला। नरेंद्र मोदी से प्रेरित होकर उन्होंने यह बात कही। मोदी पिछले 10 साल से देश के लोगों को मेक इन इंडिया का जुमला सुना रहे हैं। जब से उन्होंने मेक इन इंडिया का जुमला बोलना शुरू किया है तब से भारत में निर्माण सेक्टर का भट्ठा बैठता हुआ है। मैन्यूफैक्चरिंग में भारत पिछड़ता जा रहा है और चीन व दूसरे देशों से जरूरी सामानों के आयात पर निर्भर होता जा रहा है। ऐसे ही राहुल ने मेड इन बिहार का जुमला बोले। उन्होंने कहा कि वे देखते हैं कि हर चीज पर मेड इन चाइना लिखा होता है। इसलिए वे चाहते हैं कि युवाओं के कपड़ों पर और मोबाइल हैंडसेट पर मेड इन बिहार लिखा हो। सोचें, जो प्रदेश अभी बेसिक बुनियादी ढांचे के लिए संघर्ष कर रहा हो वहां इस तरह का जुमला बोलने का क्या मतलब है?

नीतीश कुमार पहले भी जुमले नहीं बोलते थे और इस बार भी नहीं बोल रहे हैं। लेकिन मोदी और शाह के साथ साथ उनकी पार्टी के दूसरे नेता खूब जुमले बोल  रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान को घुटने पर ला दिया या एक एक घुसपैठिए की पहचान करके बिहार से बाहर निकालेंगे या सौ शहाबुद्दीन और सौ बख्तियार खिलजी का जुमला भी बोला जा रहा है। सबसे दिलचस्प यह है कि दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता बिहार प्रचार के लिए गईं तो उनको शायद पता ही नहीं था कि 20 साल से जो सरकार चल रही है उसके मुखिया नीतीश कुमार भाजपा के साथ ही हैं और भाजपा भी करीब 15 साल उनके साथ सरकार में रही है। उन्होंने बिहार की बदहाली का मुद्दा उठा कर भाषण दिया। भाजपा के कई ऐसे नेता पहुंचे हैं, जिनको कुछ भी अंदाजा नहीं है और वे अपने भाषण में कुछ भी बोल रहे हैं।

By हरिशंकर व्यास

मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक और पत्रकार। नया इंडिया समाचारपत्र के संस्थापक-संपादक। सन् 1976 से लगातार सक्रिय और बहुप्रयोगी संपादक। ‘जनसत्ता’ में संपादन-लेखन के वक्त 1983 में शुरू किया राजनैतिक खुलासे का ‘गपशप’ कॉलम ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ तक का सफर करते हुए अब चालीस वर्षों से अधिक का है। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम की प्रस्तुति। सप्ताह में पांच दिन नियमित प्रसारित। प्रोग्राम कोई नौ वर्ष चला! आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों की बारीकी-बेबाकी से पडताल व विश्लेषण में वह सिद्धहस्तता जो देश की अन्य भाषाओं के पत्रकारों सुधी अंग्रेजीदा संपादकों-विचारकों में भी लोकप्रिय और पठनीय। जैसे कि लेखक-संपादक अरूण शौरी की अंग्रेजी में हरिशंकर व्यास के लेखन पर जाहिर यह भावाव्यक्ति -

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