nayaindia Lok Sabha election गर्म हवा है, ठंडी हवा भी!
श्रुति व्यास

गर्म हवा है, ठंडी हवा भी!

Share

रायगड (महाराष्ट्र)। हवा क्या है?  जवाब मिला, “गर्म हवा है, औरहां, ठंडी हवा भी” – ये वे शब्द है जो रायगड के पाली गांव के मतदान केंद्र से कुछ दूर लोगों के हुजूम में एक मतदाता ने चुनावी माहौल को समझाने के लिए प्रयुक्त किए।

रायगड, विशेषकर इस जिले केपेण-जामुलपाड़-अलीबाग के पूरे इलाके में, जो मानसून के दौरान एक सुरम्य पर्यटन स्थल बनाहोता है, वह इस समय जहां जबरदस्त गर्मी का सामना कर रहा है तो बढ़े तापमान से चुनावी उत्साह में भी लिए हुए है तो यह सस्पेंस तो है की रायगढ़ सीट किधर जाएगी?

एक तरफ अजीत पवार एनसीपी के मौजूदा सांसद सुनील तटकरे है, जो अजीत पवार के नजदीकी और मज़बूत उम्मीदवार हैं। दूसरी तरफ हैं पूर्व केन्द्रीय मंत्री अनंत गीते, जो शिवसेना (ठाकरे) के टिकट पर मैदान में हैं।और इनके मुकाबले का मतदान कुल मिलाकर लोकल और प्रदेश दोनों में ठंडा ही रहा। रायगढ़ की सीट पर सिर्फ 50.31प्रतिशत मतदान हुआ तो महाराष्ट्र में 54.9 मतदान और नंबर एक हॉट सीट बारामती में सिर्फ47 प्रतिशतहुआ।

मैं दोपहर 12 बजे रायगड के पाली गांव में थी जहां मतदाताओं की कुल संख्या 1,250 है जिनमें से 647 पुरूष और 596 महिलाएं हैं। ज्यादातर दुकानदार अपना वोट डाल चुके थे। सुखाई गई मछलियां बेच रही कोली समुदाय की एक महिला से जब पूछा कि क्या उसने मतदान कर दिया, तो वह हंसी।और चुनावी माहौल के बारे में पूछे जाने पर खिलखिलाकर हंसने लगी। फिर धीमी आवज में मुस्कराते हुए कहा ‘मशाल’।

उसकी दुकान के सामने महायुति गठबंधन की टेबिल लगी थी – जो खाली पड़ी थी और वहां मायूसी छाई थी। जबकि उससे कुछ ही मीटर दूर शिवसेना (ठाकरे) की टेबिल थी जहां  उत्साह से लबरेज माहौल था। कार्यकर्ता आत्मविश्वास से भरे हुए थे और शोर-शराबा कर रहे थे। भाजपा/एनसीपी के कार्यकर्ता चुप्पी साधे हुए थे। मतदान केन्द्र पर पुरूषों और महिलाओं की लाईनें लगीं थीं जिनमें युवा भी थे और वृद्ध भी।

मतदाता वोट देने के लिए तो उत्साहपूर्वक आ रहे थे लेकिन चुनावी माहौल के बारे में चर्चा करने से कतरा रहे थे।अनुसूचित जाति समुदाय की एक गृहणी ने कहा, “मेरा वोट उसके लिए जो हमारे हकों को नहीं छीनेगा”। वहीं एक युवा, जो इस लोकसभा चुनाव में पहली बार वोट दे रहा था, हैं,  ने मुस्कराते हुए कहा “मैंने भ्रष्टाचार के खिलाफ वोट दिया है”।

कुछ किलोमीटर दूर जामुलपाड़के एक मतदान केन्द्र में दोपहर 12 बजे तक केवल 16.5 प्रतिशत मतदान हुआ था। बड़ी संख्या में मतदाता मिले। और 2-3 की टोली में मतदान केंद्र में प्रवेश कर रहे थे। लेकिन उनमें जोश नजर नहीं आ रहा था। नजदीक के एक रेस्टोरेंट में बैठे लोगों की राजनीति या चुनाव के बारे में चर्चा करने में कोई दिलचस्पी नहीं थी। एक व्यक्ति ने इस बात पर पर निराशा जताई कि चुनाव अभियान के दौरान या उसके पहले उनके गांव में कोई नहीं आया। वहीं एक सेवानिवृत्त शिक्षक, जिनका राजनीतिज्ञों से मोहभंग हो चुका है, ने कहा, “पहले बोला करप्शन खत्म करूंगा फिर जो करप्ट है उसक अपनी पार्टी में लिया, और उसका सब माफ कर दिया”।

यह स्पष्ट लगा कि रायगढ़ के लोगों में गुस्सा है, जो सतह पर नहीं दिख रहा है। महाराष्ट्र में जो कुछ हुआ उसे लेकर उनके मन में नरेन्द्र मोदी के प्रति गुस्सा है हालांकि वे यह भी चाहते हैं कि वे प्रधानमंत्री बने रहें। इसी का परिणाम है कि यहां उद्धव ठाकरे को बढ़त हासिल है, लोगों में उनके प्रति समर्थन और सहानुभूति है।

जहां तक विकास का सवाल है, रायगढ़ में ढेर सारे कारखाने हैं। बंबई की महानगरीय आपाधापी से कुछ समय के लिए छुटकारा पाने और प्राकृतिक वातावरण का आनंद लेने यहां आते हैं। यहां बालीवुड का द  हैम्पटन (न्यूयार्क के नज़दीक एक स्थान जहाँ न्यूयार्क के रईस गर्मियां बिताने आते हैं) अलीबाग है। और यहाँ प्राकृतिक आपदाएं आती रहती हैं। रायगड में 19 जुलाई 2023 को विध्वंसकारी भूस्खलन हुआ था जिसमें इरशालवाली नामक गांव धरती से गायब हो गया और वहां के 80 निवासी मौत के मुंह में समा गए। फ्रंटलाईन में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक रायगड में पिछले 18 सालों में भूस्खलनों में 387 लोग मारे गए हैं। राज्य आपदा प्रबंधन सेल ने भूस्खलन के खतरे की दृष्टि से जिले के 9 गांवों को अति संवेदनशील और 11 को संवेदनशील की श्रेणी में रखा है।

लेकिन यह चुनावी मुद्दा नहीं है। तटकरे को मौजूदा सांसद होने के नाते उनके द्वारा कराए गए विकास कार्यों और क्षेत्र में अपने व्यक्तिगत संपर्कों पर भरोसा है। साथ ही वे उत्तर भारतीयों में मोदी के प्रति आकर्षण से भी लाभ की उम्मीद लगाए हुए हैं। वहीं गीते, जो आठवीं बार इस क्षेत्र से चुनावी मैदान में हैं, को एमवीए गठबंधन के मतदाताओें के समर्थन और उद्धव ठाकरे के प्रति सहानुभूति का फायदा मिलने की उम्मीद है।

जब मैं अलीबाग पहुंची तो सूरज के तेवर प्रचंड थे। मतदान केन्द्र अपेक्षाकृत खाली थे। लोनावाला और आसपास के क्षेत्रों के पर्यटक बड़ी संख्या में बीच पर मस्ती कर रहे थे। और हवा थोड़ी गरम थी और थोड़ी ठंडी भी। (कॉपी: अमरीश हरदेनिया)

By श्रुति व्यास

संवाददाता/स्तंभकार/ संपादक नया इंडिया में संवाददता और स्तंभकार। प्रबंध संपादक- www.nayaindia.com राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के समसामयिक विषयों पर रिपोर्टिंग और कॉलम लेखन। स्कॉटलेंड की सेंट एंड्रियूज विश्वविधालय में इंटरनेशनल रिलेशन व मेनेजमेंट के अध्ययन के साथ बीबीसी, दिल्ली आदि में वर्क अनुभव ले पत्रकारिता और भारत की राजनीति की राजनीति में दिलचस्पी से समसामयिक विषयों पर लिखना शुरू किया। लोकसभा तथा विधानसभा चुनावों की ग्राउंड रिपोर्टिंग, यूट्यूब तथा सोशल मीडिया के साथ अंग्रेजी वेबसाइट दिप्रिंट, रिडिफ आदि में लेखन योगदान। लिखने का पसंदीदा विषय लोकसभा-विधानसभा चुनावों को कवर करते हुए लोगों के मूड़, उनमें चरचे-चरखे और जमीनी हकीकत को समझना-बूझना।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें

Naya India स्क्रॉल करें