कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने और सोशल मीडिया में कांग्रेस के इकोसिस्टम ने अब ममता बनर्जी की पार्टी को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। जब से ममता बनर्जी की पार्टी ने कहा है कि वह अडानी के मसले पर संसद ठप्प करने के पक्ष में नहीं है तब से कांग्रेस ने तृणमूल कांग्रेस को निशाने पर लिया है। असल में तृणमूल कांग्रेस ने पिछले हफ्ते जब लगातार संसद ठप्प हो रही थी तभी कहा था कि विपक्षी पार्टियों को जनता से जुड़े मुद्दे उठाने चाहिए। तृणमूल के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने पांच छह मुद्दों के सुझाव दिए थे।
उन्होंने कहा था कि उनकी पार्टी इन सभी मुद्दों को संसद में उठाना चाह रही है और उस पर चर्चा करना भी चाह रही है। लेकिन चूंकि कांग्रेस ने गौतम अडानी के मुद्दे को पकड़ा था और यह मुद्दा राहुल गांधी के दिल के बहुत करीब है तो कांग्रेस इसे छोड़ नहीं सकती है।
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तभी अब कांग्रेस के नेता यह साबित करने में जुटे हैं कि ममता बनर्जी की पार्टी को अडानी समूह ने खरीद लिया। सोशल मीडिया में कांग्रेस का इकोसिस्टम जोर शोर से इसका प्रचार कर रहा है कि अडानी ने ममता बनर्जी का मुंह बंद कर दिया। जो सीधे तौर पर यह आरोप नहीं लगा रहे हैं कि अडानी के धन बल से प्रभावित होकर तृणमूल ने स्टैंड बदला है वे यह आरोप लगा रहे हैं कि केंद्र सरकार की एजेंसियों के डर से ममता पीछे हट गई हैं।
सोचें, यह कितनी खराब बात है कि अपनी एक मजबूत सहयोगी को, जो अपने राज्य में लगातार भाजपा को हरा रही है उसे सरेंडर करने वाला या बिक जाने वाला कहा जाए? क्या इस तरह का नैरेटिव बनाने के बाद कांग्रेस के नेता कभी ममता के साथ आने की उम्मीद कर सकते हैं? इस तनाव या टकराव का ही नतीजा है तो तृणमूल कांग्रेस ने कहना शुरू कर दिया है कि अब विपक्ष को चाहिए कि वह ममता बनर्जी को अपना नेता घोषित करे। आगे यह टकराव और बढ़ेगा और ‘इंडिया’ की एकजुटता को प्रभावित करेगा।
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