जनतंत्र को पलीता लगाने में क्या केजरीवाल पीछे थे?
लप्पड़ खाने के बाद रुआंसे घूम रहे केजरीवाल से भी तो यह पूछा जाना चाहिए कि पिछले साढ़े तेरह बरस से वे भारत के लोकतंत्र का नमक अदा करने के लिए काम कर रहे थे या जनतंत्र की तेरहवीं के आयोजन में एक निष्ठावान गुपचुप सहयोगी बने बैठे हैं?... छद्म संघर्ष से आगे आए केजरीवाल द्वारा अपने कर्मठ सहयोगियों को परे कर धनपशुओं को तरज़ीह देने के उन के इस मूल चरित्र पर आप क्या कहेंगे? आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सदस्य अरविंद केजरीवाल का पल्लू झटक कर भारतीय जनता पार्टी में चले गए तो अपने दफ़्तर से महात्मा...