हंसता मुखड़ा, रोता अंतरा!
संक्षेप देखकर ठहर जाएं, तो मालूम होगा कि श्रम बल में भागीदारी बढ़ी है और बेरोजगारी दर घटी है। लेकिन बारीकी में जाएं, तो सकारात्मक कथानक में मौजूद कई गंभीर कमियां उजागर होने लगती हैं। दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में रोजगार की स्थिति पर राष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन (एनएसओ) की ताजा रिपोर्ट चमकती हेडलाइन के लिए मसाला तो देती है, लेकिन उसके अंदर उतरते ही कड़वी हकीकतों से सामना होने लगता है। सिर्फ सार-संक्षेप देखकर ठहर जाएं, तो मालूम होगा कि श्रम बल में महिलाओं सहित कामकाजी उम्र के सभी व्यक्तियों की भागीदारी बढ़ी है और बेरोजगारी दर घटी...