न्यायपालिका का नैतिक संकट
केजरीवाल ने यह कहते हुए न्यायपालिका के खिलाफ “सत्याग्रह” शुरू किया है कि इसके हर अंजाम को भुगतने को वे तैयार हैं। यह घटनाक्रम संवैधानिक संस्थाओं के प्रति भारतीय राजनीतिक वर्ग की खंडित होती आस्था की मिसाल है। दिल्ली हाई कोर्ट की जज न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा के सामने पेश ना होने का एलान कर अरविंद केजरीवाल ने स्वतंत्र भारत के इतिहास में न्यायपालिका के लिए अभूतपूर्व नैतिक संकट खड़ा कर दिया है। आम आदमी पार्टी के प्रमुख के इस “गांधीवादी सत्याग्रह” पर न्यायपालिका जो भी रुख तय करेगी, उस पर कुछ सवाल बने होंगे। चूंकि केजरीवाल ने उत्पाद शुल्क...