Media

  • मीडिया पर हमला करके क्या मिलेगा?

    विपक्षी पार्टियों के नेता लगातार चुनाव हारने की भड़ास मीडिया पर निकाल रहे हैं। कांग्रेस से लेकर समाजवादी पार्टी और राजद से लेकर जदयू और तृणमूल कांग्रेस तक के नेता मीडिया को निशाना बना रहे हैं। जनता दल यू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह अपने इस्तीफे के बारे में पूछे जाने पर मीडिया पर बुरी तरह भड़के। गुरुवार को उन्होंने मीडिया को निशाना बनाते हुए कहा कि जब इस्तीफा देना होगा तो आपसे परामर्श कर लेंगे। आप जाइए और भाजपा कार्यालय से मेरे इस्तीफे का ड्राफ्ट बनवा कर ले आइए। भाजपा नैरेटिव सेट करती है और...

  • खेलों से क्यों खफा मीडिया?

    दिन-रात नेताओं, सांसदों और दलगत राजनीति का भोंपू बजाने वाले टीवी चैनल, समाचार पत्रों और सोशल मीडिया को क्रिकेट के अलावा कोई दूसरा खेल और खिलाड़ी क्यों नजर नहीं आते?...अपने खिलाड़ियों की पूरी तरह अनदेखी की जा रही है। खिलाड़ियों को प्रोत्साहन नहीं मिलेगा और उनकी उपलब्धियों का बखान नहीं किया जाएगा, तो क्या हम खेलों में बड़ी ताकत बन पाएंगे? चूंकि देश को खेल महाशक्ति बनना है इसलिए खिलाड़ियों को ग्रासरूट स्तर से विकसित किया जा रहा है। उन्हें स्कूल स्तर से प्रोत्साहन दिया जा रहा है। सरकारें अपने खजाने से उन पर भरपूर खर्चा कर रही हैं और...

  • राहुल ने मीडिया पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को मीडिया पर निशाना साधा। उप राष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनकड़ की नकल उतारने के मसले पर मीडिया में चल  रही खबरों और बहसों को लेकर राहुला गांधी ने कहा कि डेढ़ सौ सांसदों को सदन से निकाल कर बाहर कर दिया गया, उस पर चर्चा नहीं हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि बेरोजगारी, महंगाई पर भी कोई चर्चा नहीं हो रही है। गौरतलब है कि मंगलवार को निलंबित सांसदों के एक समूह के बीच तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने राज्यसभा के सभापति जगदीप धनकड़ की...

  • क्या मीडिया बिकाऊ है?

    मीडिया के सदस्य उसी हद तक बिकाऊ हैं जिस हद तक अन्य संस्थाओं के सदस्य।...यदि हमारा मीडिया अपने पर छोड़ दिया जाए तो अभी भी बिकाऊ नहीं है। सभी अखबारों, चैनलों में परिश्रम और सत्यनिष्ठा से काम करने वाले पत्रकार भी हैं। समाचारों को कुछ मतवादी झुकाव, बनाव-छिपाव करने के सिवा, अच्छे संस्थानों के अधिकांश पत्रकार गड़बड़ नहीं करते। पर यदि राजनीतिक वर्ग ही अपने बल का उपयोग मतवादी या धंधेबाज किस्म के पत्रकारों को बढ़ाने और मीडिया मालिकों पर दबाव देने में करे तो मूल दोष उस का है। तब इस उस पत्रकार को चुनकर निशाना बनाना राजनीतिक ही...

  • डरे हुए मीडिया को और डराना

    मीडिया को और ज्यादा डराए जाने के लिए यह छापे हैं। वर्ल्ड प्रेसफ्रीडम इंडेक्स में भारत 161 वें स्थान पर है। हर साल नीचे खिसकता जा रहा है। पिछले साल 150 पर था। उससे पिछले साल 142 पर। मतलब प्रेस की आजादीलगातार कम होती जा रही है। 180 देशों की लिस्ट है। अगर ऐसा ही रहा तोअगले साल बिल्कुल नीचे ही न आ जाए। मतलब जहां प्रेस की आजादी सबसे कम है।अगर ऐसा हुआ तो दुनिया की निगाहों में हमारा सम्मान बहुत गिर जाएगा।अमेरिका, युरोप, इंग्लैंड प्रेस की स्वतंत्रता को लोकतंत्र का सबसे बड़ापैमाना मानते हैं। कहते हैं प्रेस की...

  • सरकार फैक्ट चेक करेगी

    मीडिया को और ज्यादा डराए जाने के लिए यह छापे हैं। वर्ल्ड प्रेसफ्रीडम इंडेक्स में भारत 161 वें स्थान पर है। हर साल नीचे खिसकता जा रहा है। पिछले साल 150 पर था। उससे पिछले साल 142 पर। मतलब प्रेस की आजादीलगातार कम होती जा रही है। 180 देशों की लिस्ट है। अगर ऐसा ही रहा तोअगले साल बिल्कुल नीचे ही न आ जाए। मतलब जहां प्रेस की आजादी सबसे कम है।अगर ऐसा हुआ तो दुनिया की निगाहों में हमारा सम्मान बहुत गिर जाएगा।अमेरिका, युरोप, इंग्लैंड प्रेस की स्वतंत्रता को लोकतंत्र का सबसे बड़ापैमाना मानते हैं। कहते हैं प्रेस की...

  • अजित ने मीडिया में गलत खबर चलाये जाने पर जतायी नाराजगी

    मीडिया को और ज्यादा डराए जाने के लिए यह छापे हैं। वर्ल्ड प्रेसफ्रीडम इंडेक्स में भारत 161 वें स्थान पर है। हर साल नीचे खिसकता जा रहा है। पिछले साल 150 पर था। उससे पिछले साल 142 पर। मतलब प्रेस की आजादीलगातार कम होती जा रही है। 180 देशों की लिस्ट है। अगर ऐसा ही रहा तोअगले साल बिल्कुल नीचे ही न आ जाए। मतलब जहां प्रेस की आजादी सबसे कम है।अगर ऐसा हुआ तो दुनिया की निगाहों में हमारा सम्मान बहुत गिर जाएगा।अमेरिका, युरोप, इंग्लैंड प्रेस की स्वतंत्रता को लोकतंत्र का सबसे बड़ापैमाना मानते हैं। कहते हैं प्रेस की...

  • मीडिया के पावर को क्या हुआ?

    मीडिया को और ज्यादा डराए जाने के लिए यह छापे हैं। वर्ल्ड प्रेसफ्रीडम इंडेक्स में भारत 161 वें स्थान पर है। हर साल नीचे खिसकता जा रहा है। पिछले साल 150 पर था। उससे पिछले साल 142 पर। मतलब प्रेस की आजादीलगातार कम होती जा रही है। 180 देशों की लिस्ट है। अगर ऐसा ही रहा तोअगले साल बिल्कुल नीचे ही न आ जाए। मतलब जहां प्रेस की आजादी सबसे कम है।अगर ऐसा हुआ तो दुनिया की निगाहों में हमारा सम्मान बहुत गिर जाएगा।अमेरिका, युरोप, इंग्लैंड प्रेस की स्वतंत्रता को लोकतंत्र का सबसे बड़ापैमाना मानते हैं। कहते हैं प्रेस की...

  • ‘फ्रेंकनस्टेट’ में नतमस्तक मीडिया

    मीडिया को और ज्यादा डराए जाने के लिए यह छापे हैं। वर्ल्ड प्रेसफ्रीडम इंडेक्स में भारत 161 वें स्थान पर है। हर साल नीचे खिसकता जा रहा है। पिछले साल 150 पर था। उससे पिछले साल 142 पर। मतलब प्रेस की आजादीलगातार कम होती जा रही है। 180 देशों की लिस्ट है। अगर ऐसा ही रहा तोअगले साल बिल्कुल नीचे ही न आ जाए। मतलब जहां प्रेस की आजादी सबसे कम है।अगर ऐसा हुआ तो दुनिया की निगाहों में हमारा सम्मान बहुत गिर जाएगा।अमेरिका, युरोप, इंग्लैंड प्रेस की स्वतंत्रता को लोकतंत्र का सबसे बड़ापैमाना मानते हैं। कहते हैं प्रेस की...

  • आरएसएस का सभी संस्थाओं पर नियंत्रण

    मीडिया को और ज्यादा डराए जाने के लिए यह छापे हैं। वर्ल्ड प्रेसफ्रीडम इंडेक्स में भारत 161 वें स्थान पर है। हर साल नीचे खिसकता जा रहा है। पिछले साल 150 पर था। उससे पिछले साल 142 पर। मतलब प्रेस की आजादीलगातार कम होती जा रही है। 180 देशों की लिस्ट है। अगर ऐसा ही रहा तोअगले साल बिल्कुल नीचे ही न आ जाए। मतलब जहां प्रेस की आजादी सबसे कम है।अगर ऐसा हुआ तो दुनिया की निगाहों में हमारा सम्मान बहुत गिर जाएगा।अमेरिका, युरोप, इंग्लैंड प्रेस की स्वतंत्रता को लोकतंत्र का सबसे बड़ापैमाना मानते हैं। कहते हैं प्रेस की...

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