वैकल्पिक व्यवस्था कहां है?

भारतीय जनता पार्टी लंबे समय तक यथास्थितिवादी पार्टी मानी थी लेकिन अब वह वैचारिक स्तर पर अपने यथास्थितिवाद के बावजूद एक डिसरप्टिव फोर्स के तौर पर उभर रही है।

ठूंठ नस्ल, गंवार राजनीति

भला क्या तो राजनीति, कैसा शासन और क्या सभ्यता! हिंदू से यदि पूछें राजनीति क्या है तो तुलसीदासजी की चौपाईयां सुनने को मिलेंगी?

उपद्रवियों का पोस्टर चिपकाने पर एसएसपी को शो-कॉज

राज्यपाल के निर्देश पर लगाए उपद्रवियों के पोस्टर पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को गृह सचिव ने नोटिस भेजा।

फ्रिंज और भय ही है मुख्यधारा

हर पक्ष एक-दूसरे को तौलते हुए है और भय चुपचाप गुस्से व बदले की भावना तथा फायदे की सोच में कन्वर्ट होता हुआ। 

मुसलमानों की दिशा गलत

देश भर के मुसलमान आक्रोशित हैं और आंदोलित भी। लेकिन उनका आक्रोश और आंदोलन सही दिशा लिए हुए नहीं है।

पैगंबर मोहम्मद पर टिप्पणी के विरोध में प्रदर्शन करने वालों का होगा ‘देश निकाला’…

अब कुवैत सरकार ने पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ की गयी विवादित टिप्पणियों के विरोध में एक प्रदर्शन में भाग लेने वाले प्रवासियों…

जरूरत संयम की है

पैगंबर मोहम्मद पर भारतीय जनता पार्टी के दो पूर्व प्रवक्ताओं की टिप्पणियों का मामला जिस तरह सुलग उठा है, वह इस देश के लिए एक खतरनाक संकेत है।

हर कोई आग फैलाने में लगा

जिस दिन से भाजपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता रहीं नूपुर शर्मा के बयान पर विवाद खड़ा हुआ है उस दिन से देश में भारी बवाल है। इसके लिए कौन जिम्मेदार है?

कितना बदल गया इंसान

लोगों को समझा दिया गया है कि गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई, कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार आदि कोई समस्या नहीं है। असली समस्या धर्म की है।

हिंदू-मुस्लिम नैरेटिव चलता रहेगा!

कायदे से अब हिंदू-मुस्लिम का सार्वजनिक विमर्श बंद हो जाना चाहिए। मुसलमानों के खिलाफ होने वाली जुबानी और शारीरिक हिंसा थम जानी चाहिए।

क्रिया और प्रतिक्रिया दोनों में देरी

न्यूटन की गति का तीसरा नियम है कि क्रिया के बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है। जाहिर है जब क्रिया होगी तभी प्रतिक्रिया होगी।

ईश्वर और अल्लाह को क्यों लड़वाएं?

मनुष्य ही ईश्वरों और अल्लाहों को लड़ा देते हैं। क्या इसीलिए एक-दूसरों के धर्मों और महापुरुषों की निंदा की जाती है?

मंदिर-मस्जिद विवाद: इस ‘धर्मयुद्ध’ का मूल मकसद क्या….?

आज देश में एक अजीब तरह का माहौल है, धर्म और सियासत एक-दूसरे में इतने समाहित हो गए है कि उनमें यह भेद करना मुश्किल है कि कौन किसके साथ हैI

देशी मुसलमान क्यों इस्लामी आक्रांताओं का सज़दा करें?

एक बड़ा आश्चर्य है कि जिनके पुरखे मजहबी हिंसा के शिकार हुए और उनका बलात् मतांतरण हुआ, वह स्वयं को अपने पूर्वजों के ऊपर अत्याचार करने वाले विदेशियों से जोड़कर गर्व महसूस करते है।

भारत का ऑटो मोड सफर!

हिंदुओं का इतिहास है कि वे कभी लंबी-सुरक्षित-अच्छे सफर की नियति लिए हुए नहीं रहे। बार-बार खंड-विखंड और पानीपत की लड़ाइयों से कुचले जाते रहे।

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