संघ परिवार: योद्धा, डाकू या पॉकेटमार?

पॉकटमार मानसिकता…..भीतर से कुछ, बाहर कुछ और। विश्वासपूर्वक कुछ भी उचित कर सकने का मनोबल नहीं। उस की चाह है कि किसी तरह कुछ हाथ आ जाए और बलवान विरोधियों का सामना न करना पड़े।

इस्लाम से लड़े बिना नियति घायल!

यह शीर्षक अटपटा लगेगा। सोच सकते हैं अमेरिका लड़ कर ही तो घायल है। लेकिन अमेरिका ने इस्लाम से लड़ाई कहां बताई है? अमेरिका अपने को इस्लाम से लड़ता हुआ नहीं बताता है।

इस्लाम का सत्य और चीन की बर्बरता!

पौने दो अरब मुसलमानों में अधिकांश मन ही मन तालिबान की जीत और अमेरिका की हार से सुकून में हैं तो वह क्या इस्लाम का सुकून नहीं?

जंगली ही खोदते हैं सभ्यताओं की कब्र!

चट्टान जैसी अटल सभ्यताएं और विशाल साम्राज्य कैसे खानाबदोश घुड़सवारों की बर्बरता से खत्म हुए, इसकी दास्तां इतिहास में भरी हुई है।

आंतक से लड़ना बिना आंतक के बीज को मिटाए!

इस्लाम की यह जिद्द, यह प्रतिस्पर्धा स्थाई है कि उसके पैगंबर ही आखिरी ईश्वर अवतार है और उनकी आसमानी किताब, कुरानशरीफ के अनुसार उसे दुनिया बनानी है।

अमेरिका की 75 साला गलती!

दूसरे महायुद्ध के बाद 1945 से दुनिया की एकमेव स्थायी महाशक्ति अमेरिका (पश्चिमी सभ्यता) ने 75 सालों में जितना धोखा इस्लाम से खाया है, वह उससे जितना घायल हुआ है वैसा किसी से नहीं!

लव जिहाद कानून पर गुजरात सरकार को झटका

लव जिहाद कानून पर गुजरात हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को झटका दिया है। अदालत ने इस कानून के कुछ हिस्सों को लागू करने पर रोक लगा दी है।

जी-23 के नेता अब आलाकमान के साथ

राज्यसभा सांसद और सुप्रीम कोर्ट के वकील कपिल सिब्बल के रात्रिभोज में कांग्रेस के कई बड़े नेता शामिल हुए, जिसकी व्याख्या इस अंदाज में की जा रही है कि कांग्रेस अध्यक्ष को पिछले साल चिट्ठी भेजने वाले कांग्रेस के जी-23 समूह के नेताओं की यह बैठक थी

बूचड़खानों पर रोकः बुनियादी सवाल ?

उत्तराखंड की सरकार ने हरिद्वार में चल रहे बूचड़खानों पर रोक लगा दी थी। वहां के उच्च न्यायालय ने इस रोक को अवैध घोषित कर दिया है। उसका फैसला यह है कि जिन्होंने रोक की अर्जी लगाई थी, उनका तर्क गलत था लेकिन उनकी बात सही है।

संघ परिवार:  इस्लाम व मुस्लिमों पर विचार

संघ प्रवक्ताओं के अनुसार, मुख्य समस्या व्यवहारिक है। जिहाद का इतिहास भी कोई मुद्दा नहीं है। इसलिए, मुसलमानों को यह संदेश दें कि उन्हें बाबर और औरंगजेब की विरासत से बचना चाहिए, और राष्ट्रवादी विरासत में आना चाहिए। यही समाधान है। इस्लामी मतवाद कोई समस्या है ही नहीं।

और ध्वस्त बाबरी मस्जिद!

साढ़े चार सौ साल पहले 1528 की घड़ी में मंदिर ध्वंस-मस्जिद निर्माण को भुलाया नहीं जा सका तो छह दिसंबर 1992 को भी सभ्यतागत संघर्ष के इतिहास में बतौर मस्जिद ध्वंस-मंदिर निर्माण की याद्दाश्त अमिट रहेगी। उस दिन जो हुआ वह 15 अगस्त 1947 को आधी रात की आजादी से बड़ी घटना थी।

गलतियों से कब सीखेगी कांग्रेस?

परिवारवाद के विष-आलिंगन ने कांग्रेस को सात दशकों से जकड़ा हुआ है। इस दल में नेतृत्व की क्षमता केवल उतनी है, जितनी गांधी-नेहरू परिवार के पास उपलब्ध है। उनकी पसंद-नापसंद से पार्टी की कार्यप्रणाली प्रभावित है। कई राज्यों में कांग्रेस का अंतर्कलह- इसका उदाहरण है। सच तो यह भी है कि गत कई वर्षों से कांग्रेस उस कॉरपोरेट उद्यम की भांति हो गई है, जहां पैसे से सत्ता और सत्ता से पैसा अर्जित करना- एकमात्र उद्देश्य होता है।

अनुभव के भी विरुद्ध

वर्तमान भाजपा सरकारें इसी बात को अपनी खूबी मानती हैं कि वे एक्सपर्ट की बातें नहीं सुनतीं। बल्कि उनके नेता अपने रॉ विज्डम यानी कच्ची बुद्धि से चलना पसंद करते हैँ। जबकि भी प्रस्तावित कानून का असर यह होगा कि समाज में हाशिए पर मौजूद लोगों को भारी नुकसान होगा। papulation control policy BJP : जनसंख्या विज्ञान के मुताबिक तो यह साफ है कि भारत में जन संख्या नियंत्रण के लिए फिलहाल ऐसे किसी कानून की जरूरत नहीं है, जिसमें आबादी बढ़ोतरी रोकने के लिए जोर-जबरदस्ती का सहारा लिया जाए। आखिर किसी परिवार को सरकारी कल्याण योजनाओं से वंचित करना भी एक प्रकार की जोर-जबरदस्ती ही है। ये जरूरत इसलिए नहीं है कि भारत में आबादी नियंत्रण की प्रक्रिया पटरी पर है। लगभग हर राज्य में रिप्लेसमेंट रेट (वह जन्म दर जिसके हासिल होने के बाद आबादी नहीं बढ़ती) हासिल करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। कुछ राज्य तो इस लक्ष्य से भी आगे बढ़ गए हैँ। बहरहाल, ऐसा करना तजुर्बे के खिलाफ है। यह आम राय है कि भारत में जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रम को जितना नुकसान इमरजेंसी में हुई जोर-जबरदस्ती से पहुंचा, उतना किसी और चीज से नहीं। Read also भारत में बढ़ती जनसंख्या पर चल रही… Continue reading अनुभव के भी विरुद्ध

नीतीश को पंसद नहीं योगी का फॉर्मूला!

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जनसंख्या नियंत्रण ( nitish kumar population policy ) का उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का फॉर्मूला पसंद नहीं आया है। उन्होंने कहा है कि देश की जनसंख्‍या को सिर्फ कानून बना कर नियंत्रित नहीं किया जा सकता, इसके लिए और भी उपाय करने होंगे। नीतीश ने अपनी पार्टी के अंदर कथित तौर पर चल रही खींचतान पर भी चुप्पी तोड़ी और कहा कि सब कुछ ठीक है। राष्ट्रीय स्तर पर जनसंख्या नियंत्रण नीति की जरूरत के बारे में पूछे जाने पर नीतीश ने कहा- एक बात हम साफ साफ कह रहे, जो राज्‍य जो करना चाहे करें लेकिन हमारा मानना है कि जनसंख्‍या को केवल कानून बना कर नियं‍त्रित नहीं किया जा सकता यह ठीक से संभव नहीं।  उन्‍होंने आगे कहा- आप चीन को ही देख लीजिए, एक से दो किया, अब दो के बाद क्‍या हो रहा है। आप किसी भी देश का हाल देख लीजिए। यह सबसे बड़ी चीज है कि महिलाएं पढ़ी-लिखी रहेंगी तो इतनी जागृति आती है कि प्रजनन दर अपने आप कम होती है। सर्वे से भी इस तरह की बातों की पुष्टि है। nitish kumar population policy : नीतीश कुमार ने कहा- मेरा मानना है कि… Continue reading नीतीश को पंसद नहीं योगी का फॉर्मूला!

जनसंख्या नीति राजनीतिक एजेंडा है!

population policy political agenda : सबसे पहले तो यह डिस्क्लेमर जरूरी है कि मैं जनसंख्या विस्फोट का समर्थन नहीं कर रहा हूं और न देश की बढ़ती आबादी पर नियंत्रण के उपायों का विरोधी हूं। आबादी को नियंत्रित करने के लिए निश्चित रूप से कुछ उपाय किए जाने चाहिए। यह भारत के लिए कई कारणों से बहुत जरूरी है और तभी देश की पहली सरकार ने 1952 में जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाया था। भारत दुनिया का पहला देश है, जिसने जनसंख्या नियंत्रण की जरूरत समझी थी और उसके लिए कानून बनाया था। लेकिन वह कानून बाध्यकारी नहीं था और अनुपालन नहीं करने वालों के लिए किसी सख्त कार्रवाई का प्रावधान नहीं किया गया था। इमरजेंसी के समय के दो साल को छोड़ दें तो भारत में लोगों को जागरूक बना कर, स्वास्थ्य समस्याओं और संसाधनों के सीमित होने की जानकारी देकर और समझा-बूझा कर ही जनसंख्या रोकने के उपाय किए गए। देर से ही सही लेकिन ये स्वैच्छिक उपाय काम करने लगे और भारत में जनसंख्या वृद्धि की दर तेजी से स्थिर होने की तरफ बढ़ने लगी। भारत में राष्ट्रीय स्तर पर औसत प्रजनन दर 2.2 फीसदी है। किसी भी देश में अगर प्रजनन दर 2.1 फीसदी हो जाती है… Continue reading जनसंख्या नीति राजनीतिक एजेंडा है!

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