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मिलेनियल युवाओं पर भाजपा का फोकस

भाजपा ने युवाओं की आकांक्षा और उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप खुद को बनाना शुरू किया है। तभी उसने अपने सभी 16 हजार मंडल अध्यक्ष 45 साल से कम उम्र के बनाए हैं। कह सकते हैं कि 45 साल के राष्ट्रीय अध्यक्ष को इस रूपांतरण को सहज तरीक से क्रियान्वित करने का उत्तरदायित्व पूरा करना है।

भारतीय जनता पार्टी के नए अध्यक्ष नितिन नबीन को विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल का सर्वसम्मति से अध्यक्ष चयनित किया गया तो कई प्रकार से इसकी व्य़ाख्या हुई। उनको एक ऐसे दल का नेतृत्व मिला है, जिसकी सरकार देश में है और देश के ज्यादातर राज्यों में भी है। नितिन नबीन को 14 करोड़ से ज्यादा सदस्यों वाली पार्टी मिली है। देश के सभी जिलों में पार्टी का अपना कार्यालय है, जहां से जमीनी राजनीतिक गतिविधियां संचालित होती हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है कि भाजपा इस समय दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है और उसका आधार पूरे देश में फैल गया है। परंतु यह सारी उपलब्धियां भाजपा ने धैर्य के साथ और अपने महान नेताओं के परिश्रम से प्राप्त की है। नितिन नबीन को उन महान नेताओं की उपलब्धियों को न सिर्फ बनाए रखना है, बल्कि उसका विस्तार भी करना है। इसलिए नितिन नबीन को जो मिला है, व्यापकता की दृष्टि से उसका आकलन करते हुए इस बात का भी विश्लेषण करने की आवश्यकता है कि इसकी निरंतरता कायम रखने के लिए कितना परिश्रम करना होगा और उसके रास्ते में क्या चुनौतियां आएंगी।

भारतीय जनता पार्टी ने इन चुनौतियों को ध्यान में रख कर ही नितिन नबीन जैसे युवा, मेहनती और जमीनी राजनीति की गंभीरता व जटिलता को समझने वाले नेता को अध्यक्ष बनाया है। उन्होंने पद संभालते है इसका परिचय भी दिया। उन्होंने पार्टी मुख्यालय में सभी पदाधिकारियों के साथ लगातार नौ घंटे की मैराथन बैठक की, जिसमें एक समय जेपी नड्डा भी शामिल हुए और संगठन महामंत्री बीएल संतोष भी उपस्थित रहे।

वास्तविकता यह है कि नितिन नबीन के सामने संगठन के विस्तार की निरंतरता कायम रखने की चुनौती है तो साथ ही जितने प्रदेशों में भाजपा और एनडीए की सरकार है उन प्रदेशों की सरकारों की पुनर्वापसी सुनिश्चित करते हुए नए प्रदेशों में सत्ता प्राप्त करने की चुनौती भी है। बदलती हुई राजनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप भाजपा को तैयार करने की भी एक बड़ी चुनौती है। निश्चित रूप से उनको भाजपा के दोनों शीर्ष नेताओं और संगठन के साथ साथ राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ का सक्रिय सहयोग प्राप्त होगा। आखिर वे भी स्वंयसेवक रहे हैं और संघ के आदर्शों के अनुरूप राजनीति की है। तभी उनके निर्विरोध चयन में संघ की सहमति भी सम्मिलित है।

पहले बदलती परिस्थितियों की ही बात करें तो स्पष्ट दिख रहा है कि भारतीय जनता पार्टी अपने को जेन जी और मिलेनियल युवाओं के अनुरूप ढालने का प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर नितिन नबीन के चयन की घोषणा के लिए आयोजित संगठन पर्व में कहा कि नितिन नबीन एक तरह से मिलेनियल युवा हैं। ध्यान रहे भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। इसलिए भाजपा ने युवाओं की आकांक्षा और उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप खुद को बनाना शुरू किया है। तभी उसने अपने सभी 16 हजार मंडल अध्यक्ष 45 साल से कम उम्र के बनाए हैं। कह सकते हैं कि 45 साल के राष्ट्रीय अध्यक्ष को इस रूपांतरण को सहज तरीक से क्रियान्वित करने का उत्तरदायित्व पूरा करना है। मंडल से लेकर प्रदेश और केंद्र तक साथ ही स्थानीय निकायों से लेकर राज्य तक में युवाओं का नेतृत्व स्थापित हो और पार्टी के पुराने नेताओं के साथ समन्वय बना कर काम किया जाए, यह सुनिश्चित करने की बड़ी चुनौती राष्ट्रीय अध्यक्ष के ऊपर होगी।

बहुत जल्दी देश में जनगणना का कार्य शुरू होने वाला है। पहले आवासों की गणना होगी और अगले साल जाति के साथ व्यक्तियों की गिनती होगी। 1931 के बाद पहली बार जातीय गणना होने वाली है। देश के सैकड़ों जातियों की जनसंख्या के आंकड़े सामने आएंगे। उसका गुणात्मक प्रभाव देश की राजनीति पर पड़ेगा। सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर व्यापक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। भारतीय जनता पार्टी को इस बदलाव के साथ समन्वय स्थापित करने के लिए तैयार करने का काम नए नेतृत्व को करना है। ध्यान रहे भाजपा को लेकर एक समय यह धारणा रही थी कि वह ब्राह्मणों और वैश्यों की पार्टी है।

परंतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने के बाद वह धारणा बदली है। भाजपा पूरे देश में व्यापक हिंदुत्व की धारणा स्थापित करने में कामयाब रही है और हिंदुत्व के साथ जातियों का बहुत अच्छा समन्वय स्थापित किया है। मंडल और कमंडल की राजनीति का जो विभाजन नब्बे के दशक से चला आ रहा था उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समाप्त कर दिया है। अब मंडल और कमंडल दोनों एक हैं और यही कारण है कि कांग्रेस व समस्त प्रादेशिक पार्टियों को भाजपा के हाथों इतनी करारी हार झेलनी पड़ रही है। इस जुड़ाव को और मजबूत करने की जिम्मेदारी नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के ऊपर है।

जनगणना के बाद तीन बड़ी परिघटना होने वाली है। पहली तो ‘एक देश, एक चुनाव’ की तैयारी है। दूसरी महिला आरक्षण लागू होना है और तीसरी परिसीमन किया जाना है। ‘एक देश, एक चुनाव’ के लिए संविधान में संशोधन का विधेयक पेश किया जा चुका है, जिस पर संयुक्त संसदीय समिति विचार कर रही है। संसद से कानून पास होने के बाद इसे लागू किया जाएगा। उसके लिए भाजपा संगठन को और शक्तिशाली करने की आवश्यकता होगी। उसके साथ ही संभव है कि नारी शक्ति वंदन कानून को भी लागू किया जाए, जिसके तहत महिलाओं के लोकसभा और विधानसभाओं में 33 फीसदी सीटें आरक्षित की जाएंगी।

परिसीमन और महिला आरक्षण दोनों चुनौतीपूर्ण कार्य है। दक्षिण भारत में परिसीमन का विरोध हो रहा है और इसे उत्तर बनाम दक्षिण का मुद्दा बनाने की कोशिश हो रही है। इस मुद्दे को प्रभावी तरीके से रोकने का काम भाजपा को करना है। भाजपा संगठन की यह जिम्मेदारी होगी वह उत्तर से दक्षिण तक आम लोगों को भरोसा दिलाए कि परिसीमन से किसी के अधिकार में कटौती नहीं हो रही है और न किसी प्रदेश की राजनीतिक हैसियत घटाई जा रही है। सभी राज्यों का पहले की तरह सम्मान और महत्व बना रहेगा। इसी तरह महिला आरक्षण का लाभ सिर्फ उच्च वर्ग की महिलाओं को मिलेगा, इस पुरानी धारणा के जवाब में भी भाजपा को देश भर में जागरुकता अभियान चलाना होगा और सभी जातीय समूहों को भरोसा दिलाना होगा।

इसके बाद नए भाजपा अध्यक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती राजनीतिक है। इस समय 14 राज्यों में भाजपा की सरकार है यानी भाजपा का अपना मुख्यमंत्री है और छह अन्य राज्यों में सहयोगी पार्टी की सरकार है। यानी 20 राज्यों में एनडीए की सरकार है। 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले 16 राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं, जिनमें से नौ राज्यों में भाजपा की सरकार है। इसके बाद लोकसभा के साथ तीन राज्यों के चुनाव होंगे और लोकसभा के तुरंत बाद तीन और राज्यों के चुनाव होंगे। उन छह राज्यों से चार में भाजपा की सरकार है और एक राज्य में सहयोगी पार्टी की सरकार है। उसके अगले साल यानी 2030 में दिल्ली और बिहार के चुनाव होंगे, दोनों जगह एनडीए की सरकार है। उस समय तक नितिन नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहने में कोई संदेह नहीं दिख रहा है। ध्यान रहे उनका कार्यकाल जनवरी 2029 में पूरा हो रहा है लेकिन उस समय तक लोकसभा चुनाव की उलटी गिनती शुरू हो चुकी रहेगी इसलिए बदलाव नहीं होगा, बल्कि उनको विस्तार दिया जाएगा, जो 2030 के अंत में होने वाले उनके गृह प्रदेश बिहार के चुनाव तक जारी रह सकता है।

इसका अर्थ है कि 2030 के अंत तक लोकसभा और 24 राज्यों के चुनाव होने वाले हैं। केंद्र में भाजपा अपना प्रदर्शन बेहतर करे और 2014 व 2019 की तरह पूर्ण बहुमत के साथ सरकार में आए एक बड़ी चुनौती है। इसके अलावा उन राज्यों में जहां भाजपा या उसकी सहयोगी पार्टी की सरकार है वहां उस सरकार की पुनर्वापसी हो और जिन राज्यों में अभी तक भाजपा चुनाव नहीं जीत पाई है वहां भाजपा की सरकार बने यह भी नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने एक चुनौती है। उनके गृह प्रदेश बिहार में आज तक भाजपा का मुख्यमंत्री नहीं बन पाया है। क्या उनके कार्यकाल में ऐसा हो पाएगा यह भी देखने की बात होगी। उनके सामने तात्कालिक चुनौतियों में पांच राज्यों का चुनाव है, जिसमें सबसे भीषण लड़ाई पश्चिम बंगाल की है।

पश्चिम बंगाल के साथ बिहार का एक सांस्कृतिक जुड़ाव है। बिहार 1911 तक बंगाल का ही हिस्सा था। आज भी बड़ी संख्या में बिहार के लोग बंगाल के अलग अलग हिस्सों में रहते हैं और राजनीति पर प्रभाव डालते हैं। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि नितिन नबीन स्वंय जिस जाति से आते हैं वह पश्चिम बंगाल में बेहद प्रभावशाली है। बांग्ला भद्रलोक में कायस्थ बड़ा अहम स्थान रखते हैं। वे सिर्फ धारणा नहीं बनवाते हैं, बल्कि सक्रिय रूप से राजनीतिक व सामाजिक गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं और उसे प्रभावित करते हैं। अगर नितिन नबीन राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाते पश्चिम बंगाल के चुनाव में सक्रिय होते हैं और बांग्ला भद्रलोक के साथ साथ बिहार के मतदाताओं को व्यापक रूप से भाजपा के साथ जोड़ कर भाजपा की जीत सुनिश्चित करते हैं तो उनका राजनीतिक व्यक्तित्व और विशाल बनेगा।

पांच राज्यों का चुनाव भाजपा को व्यापक रूप से पैन इंडिया पार्टी के रूप में स्थापित करने वाला चुनाव है और इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इन चुनावों में इतनी ताकत झोंकी है। नरेंद्र मोदी और अमित शाह लगातार पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और केरल के दौरे कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी का करिश्मा और अमित शाह की रणनीति दोनों का अधिकतम लाभ भाजपा को मिले यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी नितिन नबीन के ऊपर है। उनको अपने राजनीतिक अनुभव, संगठन की शक्ति और अपने परिश्रम से इन राज्यों में भाजपा की जीत सुनिश्चित करनी है।  (लेखक दिल्ली में सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तामंग (गोले) के कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त विशेष कार्यवाहक अधिकारी हैं।)

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