विश्वविजेता अर्जेंटीना पर फीफा फुटबॉल विश्वकप में बने रहने या बाहर हो जाने का खतरा मंडराया तो उनकी टीम ने मेसी के प्रति अनोखा खेल समर्पण दिखाया। और फिर जो बचे हुए तेरह मिनट साठ सेकंड में फुटबॉल खेली गई वो देखने वाले ताउम्र याद रखेंगे। अद्भुत, अविस्मरणीय व आक्रामक फुटबॉल हुई।
मन में धीरज और कर्तव्य की निष्ठा रखने पर ही जीत के आंसू भावुकता में बहते हैं। फुटबॉल खेल के महानतम खिलाड़ियों में से अद्भुत एक, जादूगर माने गए लियनल मेसी को बच्चे की तरह आंसू बहाते देखा गया। शारीरिक कठोरता के खूबसूरत खेल में भी भावना के आंसू फूटते है। भावना में साथियों की झप्पी से सांत्वना व सम्मान पाया।
विश्वविजेता अर्जेंटीना पर फीफा फुटबॉल विश्वकप में बने रहने या बाहर हो जाने का खतरा मंडराया तो उनकी टीम ने मेसी के प्रति अनोखा खेल समर्पण दिखाया। और फिर जो बचे हुए तेरह मिनट साठ सेकंड में फुटबॉल खेली गई वो देखने वाले ताउम्र याद रखेंगे। अद्भुत, अविस्मरणीय व आक्रामक फुटबॉल हुई। इजिप्ट खिलाड़ी, अर्जेंटीना का कोच और देखने वाले फुटबॉल प्रेमी हतप्रभ रह गए। खूबसूरत खेल खुदा व ईश्वर के घर का आंगन हो गया।
बेशक स्वार्थी राजनेताओं के कारण दुनिया युद्ध संघर्षों से जूझ रही हो, लेकिन विश्वकप 2026 अभी तक हर आयाम में अद्वितीय रहा है। अब तक सबसे ज्यादा अड़तालीस देशों को विश्वकप खेलने की योग्यता मिली। इस विश्वकप में ही सबसे ज्यादा 104 मैच होंगे। पहली बार तीन देशों – अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा की मेजबानी में सोलह शहरों में विश्वकप मैच खेले जाएंगे।
इन शहरों में अब तक के सबसे ज्यादा दर्शक मैदान पर मैच देखने आए। सब से ज्यादा गोल इसी विश्वकप में मारे गए। दुनिया के हर कोने में विश्वकप मैच देखे जाने का ध्यान रखा गया। पूरी दुनिया का ध्यान मेसी, रोनाल्डो, एम्बाप्पे, हॉलैंड जैसे महान खिलाड़ियों की जगह लेने वाले उभरते युवा खिलाड़ियों पर भी रहा। इसलिए तानाशाही में लड़े जा रहे युद्धों के बीच में फुटबॉल विश्वकप ही मानवता का सबसे भव्य लोकतांत्रिक उत्सव है।
खूबसूरत खेल फुटबॉल के महानायकों की बात करें तो चपल-चंचल पैरों से नृत्य करते, फुर्तीले कदमों से मैदान पर असंभव जगहों के कोण निकालकर पास देने वाले मेसी ही हैं। सबसे तेज फुटबॉल लेकर दौड़ने वाले एम्बाप्पे हैं। विरोधी टीम के गोल इलाके में जमे रहकर गोल दागने वाले नार्वे के हॉलैंड हैं तो बेल्जियम के लुकाकु हैं तो इंग्लैंड के हैरी केन हैं। कला व प्रतिभा में माहिर स्पेन के लामिन यमाल और फेरौन टॉरेस हैं। तो इंग्लैंड के बेलिंग्हम और साका। बेल्जियम के डी-ब्रुइन और डोकू हैं। और सभी अपने खेल से अपने-अपने देशों को विश्व विजयी बनाने में लगेंगे। एक तरफ खेल की मनमोहनी कला रहेगी तो दूसरी ओर महान खिलाड़ियों को रोकने के लिए नीतियां बनाई जाएंगी। सफल रक्षात्मक रणनीति से नोर्वे ने ब्राजील, और स्पेन ने पुर्तगाल को बाहर किया।
अक्सर बहस होती है कि जादूगर मेसी और आत्मविश्वासी रोनाल्डो में से महान कौन है? एक ही समय में खेलने वाले दो महान खिलाड़ियों में से महानतम कौन है? अगर दोनों की महानता को उनके मंसूबे से देखें तो गोल करने के बाद दोनों के खास उत्सव से समझ सकते हैं।
रोनाल्डो की उंची छलांग में उनके हाथ और उंगलियां नीचे खुद के वैश्विक अस्तित्व को दर्शाती हैं। वहीं मेसी जमीन पर रहते हुए उपर आकाश में देखकर धन्यवाद देते हैं। आस्था में दोनों ही मानव कृति के लिए ईश्वर का आभार मानते हैं। लेकिन अपने को मेसी के उत्सव से ही प्रेरणा मिलती है। अपने होने, रहने व सफल होने में अपने अलावा भी कोई है जो अपने साथ खड़ा है। व्यक्ति खुद की प्रतिभा के अलावा भी अनेक समीकरणों से ही सफल होता है।
विश्वकप क्वार्टर-फाइनल में अब आठ देश विश्वविजेता दौड़ में हैं। पिछले विजेता अर्जेंटीना है तो विश्व क्रम में पहले नंबर की फ्रांस भी है। तीसरी स्पेन तो चौथी इंग्लैंड भी है। यानी आठ में से छह देश अपने खेल विश्वक्रम के अनुसार ही आगे पहुंचे हैं। अब गोल करना आसान नहीं रहने वाला हैं। नब्बे मिनट खत्म होने पर तीस अतिरिक्त मिनट के बाद ही अनोखा पेनल्टी शूटआउट होगा। शूटआउट का तनाव व दबाव इतना रहता है कि सबसे ज्यादा 8 गोल करने वाले मेसी भी 2 पेनल्टी से चूके हैं।
देशों का खेल प्रवासियों से समृद्ध हुआ। धीरज रखते हुए खेल में वे जी-जान लगाते हैं। खेल को खूबसूरत बनाते हैं। आशा है खूबसूरत खेल के आनंद में बदसूरत युद्ध समाप्त किए जा सकें।


