क्या ममता बनर्जी की पार्टी के बारे में चुनाव आयोग 24 जुलाई से पहले फैसला कर लेगा? हालांकि इस मामले में किसी को इतनी हड़बड़ी नहीं है और न पहले का रिकॉर्ड ऐसा रहा है कि इतनी जल्दी पार्टी के स्वामित्व का मामला सुलझ जाए। उद्धव ठाकरे की शिव सेना का मामला अब भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। लेकिन 24 जुलाई की समय सीमा इसलिए है क्योंकि पश्चिम बंगाल की तीन राज्यसभा सीटों पर 24 जुलाई को वोटिंग होनी है। इसके लिए 14 जुलाई तक नामांकन होना है। वैसे तो सभी सीटों पर अलग अलग चुनाव होंगे और हर सीट के लिए 145 वोट की जरुरत होगी इसलिए किसी और पार्टी के लिए संभावना नहीं है। ऐसी स्थिति में आमतौर पर सत्तारूढ़ दल का उम्मीदवार निर्विरोध चुनाव जीतता है।
लेकिन बंगाल का मामला थोड़ा अलग है। अलग इसलिए है क्योंकि तृणमूल कांग्रेस पर कब्जे का विवाद चल रहा है। ऐसे में अगर ममता बनर्जी ने उम्मीदवार उतारा तो क्या होगा? क्या ऋतब्रत बनर्जी का गुट भी उम्मीदवार देगा? अगर ऐसा होता है तो फिर असली तृणमूल किसको माना जाएगा? गौरतलब है कि सोमवार, छह जुलाई को ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिला और पार्टी संगठन व पदाधिकारियों से जुड़ा विस्तृत ब्योरा उसे सौंपा। दूसरा खेमा पहले ही चुनाव आयोग से मिल चुका है। हालांकि राज्यसभा चुनाव में व्हिप जारी नहीं होता है और न पार्टी के खिलाफ वोट करने पर सदस्यता जाती है। लेकिन उम्मीदवार देने पर उसे पार्टी का सिंबल मिलता है। ममता बनर्जी अगर सिंबल जारी कर देती हैं तो दूसरा खेमा चुप नहीं बैठेगा। वह भी सिंबल जारी करेगा। फिर चुनाव आयोग को फैसला करना होगा। तभी सवाल है कि क्या तृणमूल कांग्रेस का दो पत्तियों का चुनाव चिन्ह फ्रीज होने जा रहा है?
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