कांग्रेस नेता और संचार विभाग के प्रमुख जयराम रमेश बाल की खाल निकालने में माहिर माने जाते हैं। उन्होंने इस बात के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है कि मोदी ने अपने भाषण में इशारों इशारों में यह कहा कि जब 2014 में उनकी सरकार बनी तो शुरुआती कई सालों तक आसन का झुकाव विपक्ष की ओर यानी कांग्रेस की ओर था। गौरतलब है कि उस समय आसन पर सभापति के तौर पर उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी आसीन थे। मोदी ने हालांकि हामिद अंसारी का नाम नहीं लिया लेकिन रमेश ने इसे मुद्दा बनाया है। अब रमेश ने इसी तरह की टिप्पणी भारत की शीर्ष न्यायपालिका को लेकर की है।
गौरतलब है कि आधार कानून सहित कुछ विधेयकों को धन विधेयक की तरह सदन में पेश करने और पास कराने के मसले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई है। जयराम रमेश ने इसका स्वागत किया है और साथ ही कहा है कि वे उम्मीद करते हैं कि इस मामले में सुनवाई चीफ जस्टिस के रिटायर होने से पहले पूरी हो जाएगी। उनके इस बयान का क्या मतलब है? क्या चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ रिटायर हो जाएंगे तो उसके बाद जो चीफ जस्टिस आएंगे वे इस मुद्दे पर ठीक ढंग से सुनवाई नहीं कर पाएंगे? क्या डीवाई चंद्रचूड़ के बाद और उनके बाद भी आने वाले चीफ जस्टिस की निष्ठा या समझदारी पर रमेश सवाल उठा रहे हैं? यह एक बहुत गलत प्रवृत्ति की ओर इशारा है और जो लोग राजनीति में ऊंचे पदों पर बैठे हैं उनको इस तरह की टिप्पणी करने से बचना चाहिए। गौरतलब है कि चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ इस साल नवंबर में रिटायर होने वाले हैं।
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