क्या बाकी एजेंडे फेल हो गए?

सवाल है कि देशभक्ति, हनुमान चालीसा, गद्दार को गोली मारना, शाहीन बाग, अनुच्छेद 370, तीन तलाक आदि क्यों दिल्ली में चुनाव का मुद्दा हैं? पूरी दिल्ली में भाजपा के जो होर्डिंग्स लगे हैं उनमें इन्हीं मुद्दों का जिक्र है। कहीं कहीं पानी, अनियमित कॉलोनियों को नियमित करने आदि का भी जिक्र है

बिहार में उभर रही है नई लीडरशिप

दिल्ली के बाद राजनीति का केंद्र बिहार शिफ्ट हो जाएगा। सबका फोकस बिहार पर बनेगा। इस बार बिहार में नया नेतृत्व उभरने की गुंजाइश देखी जा रही है। ध्यान रहे बिहार में पिछले 30 साल से राजनीति जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से जुड़े रहे नेताओं के ईर्द-गिर्द घूम रही है।

ध्रुवीकरण रोकने का केजरीवाल का प्रयास

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सबसे बड़ी चिंता मतदान के दिन तक संभावित ध्रुवीकरण को रोकने की है। दिल्ली में भाजपा के नेताओं के बयानों से और शाहीन बाग के प्रदर्शन से माहौल सांप्रदायिक ध्रुवीकरण वाला बन रहा है।

कांग्रेस को दिल्ली में खाता खुलने की उम्मीद

कांग्रेस पार्टी दिल्ली में जैसे तैसे विधानसभा का चुनाव लड़ रही है। अभी तक उसका कोई बड़ा नेता प्रचार में नहीं उतरा है। सोनिया, राहुल और प्रियंका गांधी के प्रचार करने की चर्चा है। बताया जा रहा है कि तीन जनवरी को ये नेता प्रचार में उतरेंगे।

भाजपाई प्रचार से कहानी खुद बयां

दिल्ली विधानसभा के चुनाव की घोषणा के साथ हुए सर्वेक्षणों से वैसे तो नतीजों का अंदाजा हो गया था पर रही सही कसर भाजपा के प्रचार ने पूरी कर दी है। भाजपा नेताओं के तेवर, उनकी बातें और नारे अपनी कहानी खुद बयां कर रहे हैं।

दिल्ली चुनाव में सितारों का प्रचार

इस बार दिल्ली विधानसभा के चुनाव प्रचार में सितारों का जमावड़ा लगना है। भाजपा और कांग्रेस की ओर से इसकी जोरदार तैयारी है। इसमें आम आदमी पार्टी थोड़ी पीछे है पर उसके पास भी अनेक सितारे प्रचार के लिए हैं। आप के लिए स्वरा भास्कर प्रचार करेंगी।

दिल्ली चुनाव में भी एजेंडा पाकिस्तान

दिल्ली में विधानसभा चुनाव का एकमात्र एजेंडा पाकिस्तान रह गया है। वैसे कहने को तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोस्टर और होर्डिंग्स में लोकपाल से लेकर खराब पानी और कुछ दूसरी बातों का भी जिक्र किया गया है। पर पार्टी के नेता प्रचार सिर्फ पाकिस्तान, इमरान खान और नागरिकता कानून पर ही कर रहे हैं।

शाह ही लड़वाएंगे बंगाल का चुनाव

जगत प्रकाश नड्डा ने भले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर कमान संभाल ली है पर भाजपा के जानकार नेताओं का कहना है कि अगले साल होने वाला पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव लड़ाने की जिम्मेदारी अमित शाह ही संभालेंगे।

भाजपा को कांग्रेस की मजबूती से उम्मीद

दिल्ली में चुनाव लड़ रही भारतीय जनता पार्टी बहुत दम लगा रही है। पर पार्टी को अपनी तैयारियों और अपने प्रचार से ज्यादा इस बात से उम्मीद है कि कांग्रेस पार्टी अगर मजबूती से चुनाव लड़ती है तो भाजपा जीत सकती है। सोचें, भाजपा के इतने दिग्गज प्रचार में लगे हैं पर उम्मीद कांग्रेस की मजबूती से है।

दिल्ली में केजरीवाल बनाम मोदी

दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा चुनाव को लेकर सिर्फ कहा भर नहीं है, बल्कि वास्तव में पार्टी ने इसे नरेंद्र मोदी बनामअ अरविंद केजरीवाल का चुनाव बना दिया है। ध्यान रहे पार्टी ने प्रचार शुरू होने से पहले कहा कि वह मुख्यमंत्री पद का दावेदार नहीं पेश करेगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर लड़ेगी।

जदयू, लोजपा ने क्यों किया तालमेल?

दिल्ली में जनता दल यू और लोक जनशक्ति पार्टी ने भाजपा से तालमेल कर लिया। भाजपा ने जदयू के लिए दो और लोजपा के लिए एक सीट छोड़ी। इतने पर ही दोनों पार्टियां लड़ने को तैयार हो गईं। दो महीने पहले ही जदयू और लोजपा दोनों ने झारखंड का चुनाव अलग अलग लड़ा था।

जजपा, अकाली दल क्यों नहीं लड़े?

जिस तरह दिल्ली के चुनाव में यह बड़ा सवाल है कि जदयू और लोजपा ने भाजपा से क्यों तालमेल कर लिया उसी तरह का सवाल है कि अकाली दल और हरियाणा में भाजपा की सहयोगी जननायक जनता पार्टी चुनाव क्यों नहीं लड़े? पहले कहा जा रहा था कि भाजपा अकाली दल को चार सीटें देने जा रही है और जजपा को पांच-छह सीट दी जा सकती है।

टिकट न मिलने से नाराज आप विधायक सुरेन्द्र ने पार्टी से दिया इस्तीफा

आम आदमी पार्टी (आप) के नेता एवं दिल्ली छावनी विधानसभा सीट से विधायक सुरेन्द्र सिंह ‘कमांडोे’ ने विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार न बनाये जाने से खिन्न

आप पार्टी आज जारी करेगी ‘केजरीवाल का गारंटी कार्ड’

दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) विधानसभा चुनाव के मद्देनजर आज ‘केजरीवाल का गारंटी कार्ड’ पेश करेगी। पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल कार्ड पेश करेंगे, जो कि पार्टी के घोषणा पत्र से अलग होगा।

भाजपा समर्थक भी आप के साथ

दिल्ली में आठ फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव में तैयारियों और प्रचार हर लिहाज से आम आदमी पार्टी आगे चल रही है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने चुनाव से तीन महीने पहवले कैलेंडर बना कर हर दूसरे या तीसरे दिन कोई न कोई बड़ी घोषणा की।

आप दोहरा रही भाजपा की गलती

हम भारत के लोग इतिहास से सबक नहीं सीखते हैं और तभी इतिहास के कूड़ेदान में पड़े रहते हैं। यह बात जितनी आम भारतीय पर लागू है उससे कई गुना ज्यादा देश की राजनीतिक पार्टियों और संभवतः सबसे होशियार नेताओं पर भी लागू होती है।

इस बार पूर्वांचली प्रचारकों का जलवा

दिल्ली विधानसभा चुनाव में इस बार पूर्वांचली प्रचारकों का जलवा रहेगा। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों के पास इस बार अनेक पूर्वांचली प्रचारक होंगे। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी खुद स्टार प्रचारक हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश के चुनाव में दो और फिल्मी सितारों को भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़वाया था।

कांग्रेस के पास नेता की कमी

दिल्ली में कांग्रेस पार्टी के पास नेताओं की कमी हो गई है। कांग्रेस में नेतृत्व करने वाले नेताओं की कमी सरकार में रहते ही शुरू हो गई है। पार्टी ने शीला दीक्षित को लगातार 15 साल तक मुख्यमंत्री बनाए रखा। उन्होंने भी अपनी गद्दी सुरक्षित रखने के लिए एक एक करके सारे नेताओं को निपटाना शुरू किया।

मकर संक्रांति तक अटके कई काम

ऐसा लग रहा है कि देश में राजनीति और दूसरे कई कामकाज मलमास महीने की वजह से अटके हैं। कहा जा रहा है कि इस बार मकर संक्रांति 15 जनवरी को होगी। उसके तुरंत बाद देश में ढेर सारी राजनीतिक गतिविधियां एक साथ शुरू हो जाएंगी।

बिहार में भाजपा बराबरी पर अड़ेगी

बिहार में भले जनता दल यू के नेता प्रशांत किशोर और दूसरे लोग यह कहें कि उनकी पार्टी को ज्यादा सीटें मिलनी चाहिए पर ऐसा लग रहा है कि भाजपा अपनी सहयोगी जनता दल यू के सामने सरेंजर नहीं करने वाली है। पार्टी के जानकार नेताओं का कहना है कि सीटों का बंटवारा बराबर-बराबर होगा।

भाजपा-कांग्रेस दोनों देंगे दलबदलुओं को टिकट

दिल्ली में आम आदमी पार्टी को छोड़ कर बाकी सारी पार्टियों की नजर दूसरी पार्टी से आने वाले नेताओं पर है। भाजपा और कांग्रेस दोनों को दूसरी पार्टियों के नेताओं को टिकट देंगे ही साथ ही दिल्ली में लड़ने आ रही जनता दल यू और अन्य पार्टियां भी दूसरी पार्टियों के दलबदलुओं की तलाश में हैं।

दिल्ली से क्या कोई मंत्री बनेगा?

दिल्ली में विधानसभा के चुनाव हो रहे हैं। आमतौर पर केंद्र सरकार में दिल्ली से जीते दो सांसदों को मंत्री रखा जाता है। कई बार इससे ज्यादा सांसद भी मंत्री रहे हैं। मनमोहन सिंह की सरकार में दिल्ली कोटे से तीन-तीन मंत्री रहे हैं।

केजरीवाल बनाम मोदी का प्रचार

दिल्ली विधानसभा के पिछले चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामलीला मैदान में रैली करके भाजपा के चुनाव अभियान की शुरुआत की थी। उन्होंने उसी दिन चुनाव का मूड तय कर दिया था और यह भी तय कर दिया था कि भाजपा की लड़ाई किसके साथ है।

जस्टिस काटजू की चिंता कितनी जायज?

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मार्कण्डेय काटजू ने जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में हुई हिंसा की घटना के बाद ट्विट करके दिल्ली के चुनाव के बारे में आशंका जताई है और एक भविष्यवाणी भी की है। सोमवार को चुनाव की घोषणा के बाद किए गए अपने ट्विट में उन्होंने लिखा है कि दिल्ली में जल्दी ही बड़ा सांप्रदायिक दंगा हो सकता है,

मकर संक्रांति से पहले सूची जारी नहीं!

दिल्ली में विधानसभा चुनाव की भले घोषणा हो गई है पर यह तय है कि कोई भी पार्टी अभी न तो उम्मीदवारों की घोषणा करने जा रही है और न बड़े नेताओं की रैलियां वगैरह होने जा रही हैं। इसका कारण मलमास है। अभी धार्मिक रूप अच्छे काम करने के मुहूर्त नहीं है।

भाजपा अध्यक्ष, प्रभारी का ज्यादा रोल नहीं

दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष मनोज तिवारी हैं और प्रभारी श्याम जाजू हैं। पर ऐसा लग रहा है कि पार्टी को चुनाव लड़ाने में इन दोनों की कोई भूमिका नहीं रह गई है। ये दोनों बस दिखाने के अध्यक्ष और प्रभारी हैं। चुनाव नजदीक आते ही दूसरे लोगों ने कामकाज की कमान संभाल ली है।

मोदी, शाह के चेहरे पर लड़ेगी भाजपा

भाजपा ने ऐसा लग रहा है कि दिल्ली में वह गलती नहीं दोहराने का फैसला किया है, जो पांच साल पहले उसने किया था। 2015 के चुनाव में भाजपा ने पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी को मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनाया था और तीन सीटों पर सिमट गई थी।

जदयू ने नहीं माना पीके का सुझाव

बिहार में इस साल के अंत में विधानसभा के चुनाव होंगे। पर साल शुरू होने के साथ ही जनता दल यू ने प्रचार का अभियान शुरू कर दिया। राज्य में सत्तारूढ़ जदयू ने पोस्टर वार शुरू किया है, जिसमें राजद के लालू प्रसाद और राबड़ी देवी के शासन के 15 साल की तुलना नीतीश कुमार के 15 साल से की गई है। पार्टी ने हिसाब दो, हिसाब लो के नारे के साथ पोस्टर वार शुरू किया है।

दिल्ली में भाजपा के सीएम का सवाल

दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के ऊपर मुख्यमंत्री पद का दावेदार पेश करने का दबाव बढ़ गया है। कहा जा रहा है कि पार्टी इस हफ्ते चुनाव की घोषणा के साथ ही अपना चेहरा भी पेश कर सकती है। पर पार्टी इतनी बार दावेदार पेश करके हाथ जला चुकी है उसको किसी का चेहरा पेश करने में डर लग रहा है।

भाजपा दिल्ली में करेगी तालमेल!

भारतीय जनता पार्टी के पास कोई चेहरा आगे करके चुनाव लड़ने की बजाय दो पार्टियों के साथ तालमेल करके सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ने का विकल्प भी है। भाजपा की दो सहयोगी पार्टियों, अकाली दल और दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी के साथ तालमेल की बात चल रही है।