ये तर्क समस्याग्रस्त है
केंद्र का तर्क है कि राज्यपालों का अपना लोकतांत्रिक औचित्य है। राज्यपालों को सिर्फ ‘पोस्ट ऑफिस’ नहीं समझा जाना चाहिए, बल्कि उनके पास राज्यों में ‘जल्दबाजी में पास कराए गए विधेयकों’ को कानून बनने से रोकने का अधिकार है। राज्यपालों के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ राष्ट्रपति के अभिप्रेषण (रेफरेंस) पर सुनवाई के क्रम में केंद्र ने जो दलीलें पेश की हैं, वे सिरे से समस्याग्रस्त हैँ। उन्हें स्वीकार करने का मतलब भारतीय संविधान में वर्णित संघीय व्यवस्था की समझ को आमूल रूप से बदल देना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में विधानमंडलों से पारित विधेयकों...