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भारत-इज़राइल रिश्ते टिकाऊ और सार्थक

इज़राइल के प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट 2 अप्रैल को चार दिवसीय भारत यात्रा पर होंगे। यह भारत में उनका पहला आधिकारिक दौरा है।

पीछा नहीं छोड़ रहा कोरोना! अब इजरायल में सामने आया नया वैरिएंट, दो लोगों में पुष्टि

इजरायल में कोरोना के नए वैरिएंट का पता चला है। इजरायल के स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, दो लोगों में कोरोना का ये नया वैरिएंट पाया गया है।

भारत-इजराइल संबंध के 30 साल पूरे

भारत और इजराइल के बीच कूटनीतिक संबंध बहाल हुए 30 साल पूरे हो गए। पीवी नरसिंह राव के प्रधानमंत्री रहते 1992 में 29 जनवरी को दोनों देशों के बीच नए कूटनीतिक संबंधों की शुरुआत हुई थी।

इजराइल और यूएई ने किए कई समझौते

अमेरिका की पहल रंग लाई है। दशकों तक एक-दूसरे के दुश्मन रहे और दूरी बनाए रहे इजराइल और संयुक्त अरब अमीरात नजदीक आए हैं।

भारत के वैक्सीन सर्टिफिकेट को मानेगा इजराइल

इजराइल में पिछले दिनों हुए चुनाव में बेंजामिन नेतन्याहू की हार और नफ्टाली बेनेट की सरकार बनने के बाद दोनों देशों के संबंधों में बदलाव आने की संभावना जताई जा रही थी।

सेना में भर्ती के लिए लड़कियों का वर्जिनिटी टेस्ट, ‘टू फिंगर टेस्ट’ के बाद ही तय होती थी योग्यता…

इंडोनेशिया में लड़कियों को सेना में भर्ती के पहले वर्जिनिटी टेस्ट देना पड़ता था. इंडोनेशिया के एयरफोर्स में भर्ती के लिए लड़कियों को इस टेस्ट से गुजरना पड़ता था.

Video: Tokyo Olympics में माधुरी दीक्षित के गाने की धूम, इजराइली तैराकों ने परफाॅर्मेंस देकर पानी में लगाई आग

एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें इजराइल के खिलाड़ी माधुरी दीक्षित के गाने पर झमूते दिख रहे हैं। अपनी प्रैक्टिस के वक्त इजराइल के तैराकों की एक टीम ने माधुरी दीक्षित (Madhuri Dixit) के गाने पर परफॉर्मेंस दिया है।

It Happens Only In india : “पेगासास” को धड़ल्ले से डाउनलोड करने लोग, बाद में मालिक ने कहा- “भाई ये कोचिंग सेंटर के एप का नंबर है, जासूसी का नहीं”

इंटरनेट पर सर्च किया कि कैसे किसी का मोबाइल को हैक किया जा सकता है. साथ ही पेगासस के माध्यम से कैसे किसी की जासूसी की जा सकती है.

ईरान में रईसी की जीत

ईरान के राष्ट्रपति के चुनाव में इब्राहिम रईसी के जीतने पर वे सब लोग बहुत खुश हैं, जो ईरान में अपने आपको कट्टर राष्ट्रवादी कहते हैं। ईरान अपने आप को लाख इस्लामी राष्ट्र कहे लेकिन दुनिया के ज्यादातर इस्लामी राष्ट्रों से उसके संबंध सहज नहीं हैं। रईसी की जीत पर इस्राइल खफा है ही, सउदी अरब और एराक जैसे राष्ट्रों में भी खुशी का माहौल नहीं है। यह भी पढ़ें: कश्मीरी नेताओं से सीधा संवाद अमेरिका और यूरोपीय राष्ट्रों की भी चिंता थोड़ी बढ़ गई है, क्योंकि उन्होंने ईरान के साथ जो परमाणु-सौदा किया था, उसको पुनर्जीवित करने में कठिनाइयाँ आ सकती हैं। रईसी ईरान के मुख्य न्यायाधीश रहे हैं। ईरान-एराक युद्ध के बाद ईरान में देशद्रोहियों को दंडित करने के लिए जो आयोग बना था, उसके सदस्य होने के कारण अमेरिका ने रईसी पर तरह-तरह के प्रतिबंध घोषित किए थे। उस आयोग को ‘हत्या आयोग’ के नाम से जाना जाता है। रईसी ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामैनी के परमप्रिय शिष्यों में से हैं। यह माना जाता है कि खामैनी के बाद वे ही सर्वोच्च नेता के पद पर बैठेंगे। रईसी ने 2017 में भी हसन रुहानी के खिलाफ राष्ट्रपति का चुनाव लड़ा था लेकिन हार गए थे।… Continue reading ईरान में रईसी की जीत

नेतन्याहू के बाद इजराइल

इजराइल में अब सबसे अहम सवाल यह है कि नई बनी नफताली बेनेट की सरकार कब तक टिक पाएगी? बेनेट के नेतृत्व में अलग-अलग विचारों वाली पार्टियों का नया गठबंधन बना है? ऐसे में यह ठीक ही कहा गया है कि सरकार का भविष्य बेनेट के व्यक्तित्व के करिश्मे से तय होगा। इजराइल में बेंजामिन नेतन्याहू पूरे 12 साल तक प्रधानमंत्री रहे। यह एक रिकॉर्ड है। इसके पहले सबसे अधिक समय तक प्रधानमंत्री मिनाखिम बेगिन रहे थे। वे सात साल लगातार प्रधानमंत्री रहे। लेकिन गौरतलब यह है कि नेतन्याहू भले 12 साल प्रधानमंत्री रहे, लेकिन वे एक बार भी चार साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। हर बार मध्यावधि चुनाव में उन्हें उतरना पड़ा। पिछले दो सालों में तो हद हो गई, जब चार बार संसद- नेसेट के लिए चुनाव हुए। ये बातें इजराइल में अक्सर चलने वाली राजनीतिक अस्थिरता को बताती हैं। ये तथ्य इस बात की पुष्टि के लिए काफी हैः 1949 में इजराइल की स्थापना के बाद यहां अब 36वीं सरकार बनी है। यानी 72 साल में 36 सरकारें। यानी इजराइल में सरकारों का औसत कार्यकाल दो साल का रहा है। तो सवाल है कि नई बनी नफताली बेनेट की सरकार का क्या होगा? उनके नेतृत्व… Continue reading नेतन्याहू के बाद इजराइल

Good News : कुत्ते सूंघ कर करेंगे कोरोना या कैंसर के मरीजों की पहचान, भारत में यहां प्रशिक्षण केंद्र खोलने की तैयारी…

नई दिल्ली | अगर हम आपको यह कहे कि आपको कोरोना टेस्ट या फिर कैंसर के लिए किसी प्रकार का टेस्ट कराने की जरूरत नहीं है कुत्ते सूंघ कर बता देंगे कि आपको ऐसी कोई बीमारी है या नहीं. यह सुनने में जरूर अटपटा लगता है लेकिन आने वाले दिनों में यह सच होने वाला है. पंजाब के गुरु अंगद देव वेटरनरी एंड एनिमल साइंस यूनिवर्सिटी इस प्रकार के विशेष नस्ल वाले कुत्तों को प्रशिक्षित करने की तैयारी की जा रही है. यहां बता दें कि दुनिया के कई देश कोरोना टेस्ट के लिए कुत्तों का इस्तेमाल कर भी रहे हैं. अपना कार्यकाल पूरा करने वाले वाइस चांसलर डॉ इंद्रजीत सिंह ने कहा कि कुत्तों ने सूंघने की विशेष क्षमता होती है उनका कहना है कि इंसानों से करीब 1000 गुना अधिक कुत्ते सूंघ सकते हैं. ऐसे कर सकेंगे संक्रमण की पहचान डॉ इंद्रजीत सिंह ने कहा कि यदि विशेष नस्ल के कुत्तों को बार-बार सी विशेष बीमारी से संक्रमित व्यक्ति के कपड़े या फिर बदन की बदबू सूंघा दी जाए तो वह आसानी से इस तरह की गंध को पहचान सकता है. श्री सिंह ने कहा कि इसके लिए कुत्तों को विशेष ट्रेनिंग दी जाती है इसके बाद इनका… Continue reading Good News : कुत्ते सूंघ कर करेंगे कोरोना या कैंसर के मरीजों की पहचान, भारत में यहां प्रशिक्षण केंद्र खोलने की तैयारी…

हमारी विदेश नीति की फिसलन

हमारी विदेश नीति आजकल बड़ी दुविधा में फंस गई है। एक तरफ चीन ने हमारे लिए कई फिसलपट्टियां लगा दी हैं और दूसरी तरफ हमारे दोनों दोस्त- इस्राइली और फलस्तीनी हमें कोस रहे हैं। हमारे विदेश मंत्रालय की घिग्घी बंधी हुई है, जबकि हमारा विदेश मंत्री एक ऐसा आदमी है, जो विदेश मंत्री बनने के पहले कई देशों में हमारा राजदूत और विदेश सचिव भी रह चुका है। जहां तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सवाल है, उनको ज्यादा दोष नहीं दिया जा सकता, क्योंकि हमारे ज्यादातर प्रधानमंत्री विदेशी मामलों के जानकर नहीं होते। वे अफसरों के लिखे भाषण पढ़ देते हैं और विदेशी नेताओं के साथ फोटो खिंचाने का मौका हाथ से निकलने नहीं देते। खैर, अभी तो हमारा ध्यान अफगानिस्तान पर होनेवाली उस त्रिराष्ट्रीय वार्ता ने खींचा है, जो चीन, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हो रही है। उनके बीच यह चौथी वार्ता है। कितने आश्चर्य की बात है कि अफगानिस्तान की सबसे ज्यादा आर्थिक मदद करनेवाला देश, भारत की इस वार्ता में कोई भूमिका नहीं है। और मैं यह भी देख रहा हूं कि चीन हमें चपत लगाने का कोई मौका नहीं चूक रहा है। चपत भी प्यारी-सी ! पहले उसने ब्रिक्स की बैठक में भारत की तारीफ… Continue reading हमारी विदेश नीति की फिसलन

नेता बदलेगा, नीति नहीं

इजराइल में नेतन्याहू विरोधी गठबंधन बनने की सूरत बन गई है। इससे 12 साल बाद बेंजामिन नेतन्याहू की प्रधानमंत्री पद से विदाई हो जाएगी। लेकिन नया गठबंधन अंतर्विरोधी एजेंडे पर चलने वाले नेताओं और दलों का है। उनकी एकता लंबे समय तक टिकेगी, इसको पर गहरा संदेह है। यह भी पढ़ें: कार्रवाई तो ठीक, लेकिन.. ऐसा लगता है कि इजराइल में बेंजामिन नेतन्याहू के लंबे कार्यकाल का अब आखिरकार पटाक्षेप हो जाएगा। 12 साल तक वे प्रधानमंत्री कुर्सी पर रहे। इस दौरान तमाम विवाद हुए। उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे। ऐसे आरोपों के कारण उन पर मुकदमा भी चल रहा है। इन सबके बावजूद वे अपनी कुर्सी पर जमे रहे। पिछले दो साल में चार बार इसलिए चुनाव कराना पड़ा, क्योंकि किसी पार्टी को बहुमत मिलना तो दूर ऐसा जनादेश भी नहीं आया, जिससे कोई टिकाऊ गठबंधन सरकार बन सके। पिछले चुनाव में भी ऐसा ही खंडित जनादेश आया। एक बार फिर इसमें नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को सबसे ज्यादा सीटें मिलीं। इसलिए राष्ट्रपति ने उसे पहले सरकार बनाने का मौका दिया। लेकिन बहुमत जुटाने में नेतन्याहू नाकाम रहे। इससे पांचवें चुनाव की नौबत आती दिख रही थी। लेकिन उससे ठीक पहले नेतन्याहू विरोधी गठबंधन बनने की सूरत… Continue reading नेता बदलेगा, नीति नहीं

हमें सीखना चाहिए इजरायल से

दरअसल तंत्र और नागरिक-समाज राष्ट्र एवं राष्ट्रीय हितों को कितनी प्राथमिकता देता है, उसी पर राष्ट्रीय चारित्र्य निर्भर करता है। विपदा या युद्ध-काल में इजरायल की सरकार, वहाँ के विपक्षी दलों और आम नागरिकों की सोच और आचरण के परिप्रेक्ष्य में स्वयं तय करें कि राष्ट्रीय चारित्र्य एवं नागरिक-जिम्मेदारी के निर्वहन की कसौटी पर हम भारतीय कितना खरा उतरते हैं? यह भी पढ़ें: पश्चिम बंगालः इस हिंसा का अर्थ ? युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं होता। शांति, संवाद, सहयोग, सह-अस्तित्व का कोई विकल्प नहीं हैं। विश्व-मानवता के लिए सुखद है जो इजरायल और हमास के बीच युद्ध-विराम हो गया। उल्लेखनीय है कि 1940 के दशक के मध्य में हंगरी, पोलैंड, जर्मनी, ऑस्ट्रिया के यहूदियों को किन-किन यातनाओं से गुज़रना पड़ा, 1948 में स्वतंत्र होने से लेकर आज तक उसने किन-किन संघर्षों का सामना किया, अपनी विकास-यात्रा में अब तक उसने कैसे-कैसे गौरवशाली आयाम-अध्याय जोड़े, यह दुहराने की आवश्यकता नहीं! पूरी दुनिया ने देखा कि इजरायल और फिलीस्तीन के मध्य हुए हालिया युद्ध के दौरान वहाँ के मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और विपक्षी दल के नेता बेनी गेन्ट्ज इस बात पर एकमत थे कि उनका सबसे पहला और सबसे बड़ा दायित्व उनके राष्ट्र पर आए संकटों का डटकर सामना करना… Continue reading हमें सीखना चाहिए इजरायल से

Israel Hamas Ceasefire: इजराइल-हमास में संघर्षविराम

वाशिंगटन। इजराइल और फिलस्तीन के चरमपंथी समूह हमास के बीच संघर्षविराम पर सहमति बन गई, जिसके बाद 11 दिन तक चले हमलों पर रोक लग गई है। संघर्षविराम के बाद दोनों तरफ से जुबानी जंग छिड़ी है। इजराइल ने कहा है कि उसके ऊपर साढ़े चार हजार रॉकेट दागे गए तो दूसरी ओर हमास ने इसे अपनी जीत बताते हुए जश्न मनाया है। हमास ने कहा है कि इससे साबित होता है कि ट्रिगर उसके हाथ में है। संघर्षविराम की घोषणा के बाद गाजा सहित कई इलाकों में फिलस्तीनी लोगों ने जम कर जश्न मनाया। यह संघर्षविराम, अमेरिका, मिस्र और दूसरे अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों की तरफ से हिंसा को रोकने के लिए बनाए जा रहे दबाव के बाद शुक्रवार को प्रभावी हुआ। इजराइली सुरक्षा कैबिनेट ने गुरुवार देर रात को संघर्षविराम को स्वीकार करने के पक्ष में वोट डाले जब दक्षिण इजराइल और गाजा दोनों उन्माद में थे। प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू के कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया कि सुरक्षा कैबिनेट परस्पर व बिना शर्त शत्रुता समाप्त करने पर सर्वसम्मति से सहमत हुआ। बयान में कहा गया- नेताओं ने कहा है कि जमीनी हकीकत अभियान के भविष्य को निर्धारित करेगी। हालांकि, नेतन्याहू ने इजराइल के सुरक्षा बलों, आईडीएफ को… Continue reading Israel Hamas Ceasefire: इजराइल-हमास में संघर्षविराम

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