आरक्षण – नेता को लाभ, समाज की हानि
प्रतिभा बल पर कोई समाज आगे बढ़ता है, भीड़ बल पर नहीं। पर हमारे नेता अपने स्वार्थ में उलटा बना र...
प्रतिभा बल पर कोई समाज आगे बढ़ता है, भीड़ बल पर नहीं। पर हमारे नेता अपने स्वार्थ में उलटा बना र...
यह देश बहुत बड़ा और विविध शक्तियों, दुर्बलताओं वाला है। किसी के लिए भी अपने मं...
1970 के दशक वाले सोवियत रूसी समाज की स्थिति जैसी हालत लगती है। जब वहाँ नेता नियमित झूठ से ही अप...
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अमेरिका में कहा: "यदि कोई हिन्दू सोचे, कि भारत में को...
इस वर्ष दो घटनाओं ने हवा बदलने में निर्णायक काम किया। यह थे -- शिक्षा और मंदिर पर घमंडी लापरवाही। पहली थी: यूजीस...
हिन्दू ग्रंथों की निन्दा करने वाले उसे शायद ही पढ़ते हैं। मनुस्मृति के राज्य-शासन संबंधी तीनों अध्याय गंभीर ज्ञा...
'दिमागी नक्सल को आइसोलेट' करने और '...
देश भर में हर शिक्षा संस्थान में प्रवेश, और वहाँ की परीक्षा,...
यदि वह आदेश और यह बिल पढ़ें, तो हैरत होगी! मानो शासन को अपने ही आदेश और कानून ...
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने दिया था। उन के शब्दों ने हिटलर के सामने पस्त...
बेचारे हिन्दू दोहरी चोट झेल रहे हैं -- संघ-परिवार का विश्वासघात और ब्लैकमेलिंग। क्या इस से आगे कोई फर्क पड़ेगा
यह मंदिर ही नहीं, सत्ता भी चलाने की अयोग्यता का अधिक बड़ा संकेत है। वैयक्तिक ई...
सब के ऊपर बड़े प्रधान हैं। इसलिए छोटे प्रधानों को दोष देना व्यर्थ है। औपचारिक और वास्तविक अधिकारों