उपलब्ध सूचनाओं के मुताबिक भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध को सीमित करने के लिए तीन-स्तरीय योजना पेश की है। इसका मकसद आम सीजफायर नहीं, बल्कि ऊर्जा ढांचे, अनाज आपूर्ति, और वाणिज्यिक जहाजरानी की सुरक्षा करना भर है।
यूक्रेन- रूस दोनों ने युद्ध रुकवाने के भारतीय प्रस्ताव पर अनुकूल प्रतिक्रिया दिखाई। यूक्रेन ने कहा कि इस सिलसिले में आए सभी फॉर्मूलों के बीच भारतीय प्रस्ताव सबसे विस्तृत है। रूसी राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन ने कहा कि इस बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास अच्छे सुझाव हैं। अब सामने आई जानकारियों के मुताबिक भारत ने युद्ध सीमित करने के लिए तीन-स्तरीय योजना पेश की है। इसका मकसद आम सीजफायर नहीं, बल्कि ऊर्जा ढांचे, अनाज आपूर्ति, और वाणिज्यिक जहाजरानी की सुरक्षा करना भर है। मतलब यह कि रूस और यूक्रेन एक-दूसरे के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले न करें,
काला सागर के बंदरगाहों से अनाज और ऊर्जा की निर्बाध आवाजाही हो, और व्यापारी जहाजों पर हमले रोके जाएं।
रूस ने जब से काला सागर में परिवहन को रोका है, दुनिया भर में अनाज और ऊर्जा की सप्लाई बाधित हुई है। वहां हुए हमलों में पांच भारतीय नाविकों की मौत भी हुई है। साथ ही युद्ध सीमित हुआ, तो अमेरिका से भारत का तनाव घट सकता है, क्योंकि अमेरिका रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी में है। लगभग इसी समय तुर्किये और मिस्र ने एक साझा प्रस्ताव रखा है, और अमेरिका ने भी पहल की है। मिस्र- तुर्किये ने मुख्यतः काला सागर में व्यापारिक जहाजों पर हमले रोकने और अनाज परिवहन बनाए रखने पर ध्यान दिया है।
अमेरिका का प्रस्ताव ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने पर केंद्रित है। चूंकि भारत ने इन दोनों पहलुओं को अपने प्रस्ताव में शामिल किया है, अतः इसे सबसे विस्तृत समझा गया है। बहरहाल, असल मुद्दा है कि क्या ये सुझाव युद्धरत देशों को मान्य होंगे? यूक्रेन ने अमेरिका-यूरोप से मिले आधुनिक ड्रोन्स से रूस के ऊर्जा ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा कर युद्ध में अपने टिके होने की धारणा बनाई है। जवाब में रूस ने बाकी दुनिया से उसे काटने के लिए काला सागर में नाकेबंदी की है। इस तरह दोनों ने अपने दांव ऊंचे किए हैं। जब तक युद्ध खत्म होने की उम्मीद नहीं जगती, वे इसमें शायद ही ढील दें। इसलिए हालिया तमाम प्रस्ताव फिलहाल टॉकिंग प्वाइंट से ज्यादा कुछ नहीं हैं।
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