राज्य-शहर ई पेपर व्यूज़- विचार

विपक्ष अपनी हार का खुद जिम्मेदार है

अब तक हजारों ईवीएम मशीनों के वोट का मिलान वीवीपैट की पर्चियों के साथ किया गया है और अपवाद के लिए भी एक गड़बड़ी नहीं मिली है। ये वीवीपैट मशीनें रैंडम चुनी जाती हैं और आज तक एक भी गड़बड़ी नहीं मिली है इसका मतलब है कि इससे मतदान सौ फीसदी सुरक्षित है। फिर भी कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियों को बैलेट पेपर से मतदान कराना है ताकि अपराधी किस्म के लोगों की मदद से बूथ लूटा जा सके, जैसा पहले होता था।

कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां संसद के मानसून सत्र के समय से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर पर चर्चा के लिए बेचैन थीं। सरकार ने उस पर चर्चा करा दी। शीतकालीन सत्र के दूसरे हफ्ते में संसद के दोनों सदनों में चुनाव सुधारों पर व्यापक चर्चा हुई और विपक्ष की कमजोरी खुल कर सामने आ गई। कांग्रेस और विपक्ष की तुष्टिकरण की नीति की पोल भी वंदे मातरम् पर चर्चा के दौरान खुल गई। स्वंय   प्रधानमंत्री   नरेंद्र मोदी ने इस पर चर्चा की शुरुआत की और करीब डेढ़ घंटे के भाषण में कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियों के दोहरे रवैए को एक्सपोज किया। रही सही कसर केंद्रीय गृह मंत्री   अमित शाह ने पूरी कर दी। उन्होंने कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों के ऐसे नेताओं की एक सूची ही आसन को सौंप दी, जिनको वंदे मातरम् गाने से आपत्ति रही है। इसके बाद चुनाव सुधारों पर चर्चा हुई, जिसमें   अमित शाह ने आजादी के पहले से शुरू हुई वोट चोरी की पोल खोली।

कांग्रेस नेताओं के पास इस बात का जवाब नहीं था कि पंडित जवाहरलाल नेहरू 1946 में कैसे कांग्रेस के अध्यक्ष बने। कांग्रेस की 15 प्रांतीय कमेटियों में से किसी ने अध्यक्ष पद के लिए उनके नाम का प्रस्ताव नहीं किया था। 12 कमेटियों ने सरदार वल्लभ भाई पटेल के नाम का प्रस्ताव किया। सबको पता था कि 1946 में जो कांग्रेस का अध्यक्ष बनेगा, अंग्रेज उसी को सत्ता सौंपेंगे, वहीं अंतरिम सरकार का प्रमुख बनेगा। अंतरिम सरकार के प्रमुख के लिए सबकी पसंद सरदार पटेल थे लेकिन अध्यक्ष बने पंडित नेहरू। क्या यह वोट चोरी की मिसाल नहीं है? इसके बाद भाजपा और एनडीए की दूसरी सहयोगी पार्टियों के नेताओं ने बूथ लूट से लेकर वोट चोरी तक के अनेक किस्से सुनाए। यह भी बताया गया कि कैसे पहले चुनाव में डॉक्टर बीआर अंबेडकर की सीट पर 70 हजार से ज्यादा वोट अमान्य किए गए और बाबा साहेब अंबेडकर 15 हजार से कम वोट से हारे। ऐसे किस्सों के बाद कांग्रेस के पास मुंह छिपाने को जगह नहीं थी।

चर्चा के दौरान कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने चुनाव सुधार के नाम पर चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का नियम बदलने की मांग की। उन्होंने कहा कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाले पैनल से चीफ जस्टिस को हटाने का फैसला बहुत गलत था। सवाल है कि चीफ जस्टिस कब इस पैनल के सदस्य बने? वह तो जब मामला कोर्ट में पहुंचा तो सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जब तक संसद इस बारे में कोई कानून नहीं बना देती है तब तक एक अंतरिम कमेटी रहेगी, जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और चीफ जस्टिस सदस्य होंगे। जब संसद ने कानून बनाया तो उसने बाकी पदों पर नियुक्ति के लिए जो पैनल है उसी तरह का पैनल चुनाव आयोग के लिए भी बना दिया, जिसमें प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और सरकार के एक मंत्री सदस्य हैं।

गृह मंत्री अमित शाह ने इसकी याद दिलाते हुए कहा कि आजादी के बाद 73 साल तक तो प्रधानमंत्री ही चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करता था। अब तो कम से कम तीन सदस्यों की कमेटी है, जिसमें एक सदस्य विपक्ष का है। यानी 33 फीसदी हिस्सा विपक्ष का। पहले तो विपक्ष का एक फीसदी भी हिस्सा नहीं होता था। जहां तक चुनाव आयोग की साख बिगाड़ने का सवाल है तो क्या किसी को इस बात से इनकार हो सकता है कि यह काम कांग्रेस ने किया है? कांग्रेस ने सबसे पहले रिटायर मुख्य चुनाव आयुक्त को राज्यसभा भेज कर   मनमोहन सिंह की सरकार में मंत्री बनाया था। कांग्रेस नेता बड़ी सुविधा से अपना यह इतिहास भूल जाते हैं।

चुनाव सुधार के नाम पर विपक्ष की ओर से ईवीएम की बजाय बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग की गई। यह मांग इस तथ्य के बावजूद की गई कि आज तक विपक्षी पार्टियां ईवीएम की एक भी गड़बड़ी साबित नहीं कर पाई हैं या एक भी भरोसेमंद सबूत नहीं पेश कर पाई हैं। ध्यान रहे चुनाव आयोग खुद ही ईवीएम से होने वाली वोटिंग को फुलप्रूफ करने के लिए समय समय पर बदलाव करता रहता है। इसी के तहत ईवीएम के साथ वीवीपैट मशीनें जोड़ी गईं, ताकि लोग परची पर यह देख सकें कि उन्होंने जिसको वोट दिया है, वोट उसी को गया है।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश के हिसाब से हर विधानसभा क्षेत्र में पांच बूथों पर वीवीपैट की पर्चियों का मिलान ईवीएम के वोट से किया जाता है। अब तक हजारों ईवीएम मशीनों के वोट का मिलान वीवीपैट की पर्चियों के साथ किया गया है और अपवाद के लिए भी एक गड़बड़ी नहीं मिली है। ये वीवीपैट मशीनें रैंडम चुनी जाती हैं और आज तक एक भी गड़बड़ी नहीं मिली है इसका मतलब है कि इससे मतदान सौ फीसदी सुरक्षित है। फिर भी कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियों को बैलेट पेपर से मतदान कराना है ताकि अपराधी किस्म के लोगों की मदद से बूथ लूटा जा सके, जैसा पहले होता था।

कितनी हैरानी की बात है कि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग लगातार बड़े सुधारों की कोशिश कर रहे हैं लेकिन विपक्ष को एक भी सुधार कबूल नहीं है। सरकार ने तीन सबसे बड़े सुधारों की पहल की है। इसमें सबसे पहले ‘एक देश, एक चुनाव’ की बात की जा सकती है। सरकार ने इसका बिल संसद में पेश किया, जिस पर अभी संयुक्त संसदीय समिति में विचार हो रहा है। विपक्षी पार्टियां इस सुधार का विरोध कर रही हैं। दूसरा बड़ा सुधार परिसीमन का है, जो अगले साल शुरू हो रही जनगणना के बाद होगी। गौरतलब है कि अगले साल अप्रैल से सितंबर तक पहले चरण में मकानों की गिनती होगी और फरवरी 2027 में आबादी की गणना होगी।

इसमें जातियां भी गिनी जाएंगी। इसके बाद परिसीमन का काम होगा। विपक्षी पार्टियां परिसीमन का भी विरोध कर रही हैं। तीसरा बड़ा सुधार सरकार कर चुकी है और वह है नारी शक्ति वंदन कानून, जिसके तहत महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा। चौथा सुधार चुनाव आयोग कर रहा है और वह है मतदाता सूची के शुद्धिकरण का। इसके लिए विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर अभियान चल रहा है। बिहार में एसआईआर के बाद मतदान हुआ और अभी 12 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर का काम चल रहा है।

विपक्षी पार्टियां ऐड़ी चोटी का जोर लगा कर एसआईआर का विरोध कर रही हैं। कई नेताओं की ओर से जनता को उकसाने का प्रयास भी किया गया। लेकिन हर जगह नागरिकों ने शांतिपूर्ण तरीके से एसआईआर में हिस्सा लिया। कुछ राज्यों में बड़ी आबादी के हिसाब से एसआईआर की सीमा बढ़ाई गई है तो कुछ राज्यों में इसका पहला चरण पूरा हो गया। पश्चिम बंगाल में 11 दिसंबर को पहला चरण पूरा हुआ। आखिरी दिन मुख्यमंत्री सु  ममता बनर्जी ने भी अपना मतदाता प्रपत्र भर कर जमा कराया। 16 दिसंबर को मसौदा मतदाता सूची जारी होगी। उससे पहले चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में करीब 58 लाख नाम कट सकते हैं। ध्यान रहे बिहार में कुल 69 लाख नाम कटे थे। गौरतलब है कि बिहार और पश्चिम बंगाल में मतदाताओं की कुल संख्या लगभग बराबर है। फिर भी पश्चिम बंगाल में बिहार के मुकाबले 11 लाख कम नाम कटने की संभावना है।

यह आम धारणा है कि पश्चिम बंगाल में घुसपैठियों और अवैध मतदाताओं की संख्या बिहार या किसी भी दूसरे राज्य से ज्यादा है। फिर भी बिहार से कम नाम कट रहे हैं! यह हैरानी की बात है। क्या इसका कारण यह है कि बिहार में एसआईआर शुरू होने के बाद पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में लोगों के जन्म प्रमाणपत्र और आवास प्रमाणपत्र बनाए गए हैं? चुनाव आयोग को इस पर नजर रखनी होगी। भारतीय जनता पार्टी की ओर से चुनाव आयोग से अनुरोध किया गया है कि वह इस बात की जांच करे कि पिछले छह महीने में जिन लोगों के जन्म और आवास प्रमाणपत्र जारी हुए हैं वे सही हैं या नहीं। इसके लिए चुनाव आयोग को उनसे किसी अतिरिक्त प्रमाणपत्र की मांग करनी चाहिए। अगर किसी व्यक्ति के पास सिर्फ एक ही प्रमाणपत्र है और वह छह महीने पहले बना है तो उसे स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। अगर चुनाव आयोग इस मामले में सख्ती नहीं करेगा तो फिर इतनी बड़ी कवायद के बावजूद कुछ न कुछ गड़बड़ी रह जाएगी।

बहरहाल, यह संयोग नहीं है कि विपक्ष को हर चुनाव सुधार से दिक्कत है। उसे परिसीमन से दिक्कत है तो ‘एक देश, एक चुनाव’ से भी दिक्कत है और मतदाता सूची के शुद्धिकरण से भी दिक्कत है। असल में विपक्षी पार्टियों को अपनी हार छिपाने का एक बहाना इन बातों में मिल गया है। विपक्षी पार्टियां इसलिए हार रही हैं क्योंकि उनके पास न तो नेता है, न नीति है और न नीयत है। उनके पास संगठन नहीं है और देश के विकास की कोई रूपरेखा नहीं है इसलिए देश की जनता उनको लगातार खारिज कर रही है। दूसरी ओर   प्रधानमंत्री   नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक ऐसी सरकार है, जिसने पूरी दुनिया में देश का मान बढ़ाया है और देश को तेजी के साथ विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाया है। भारत अब विकसित राष्ट्र बनने की ओर बढ़ रहा है। इसलिए लोग निरंतर भाजपा को चुन रहे हैं। विपक्षी पार्टियों को पता है कि वे अपनी कमजोरी के कारण हार रही हैं लेकिन वे कभी ईवीएम पर तो कभी मतदाता सूची पर तो कभी चुनाव आयोग पर ठीकरा फोड़ती हैं ताकि अपनी कमजोरियों पर परदा डाला जा सके। देश की जनता इस बात को समझ गई है इसलिए वह इस पर ध्यान नहीं दे रही है।

(लेखक दिल्ली में सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तामंग (गोले) के कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त विशेष कार्यवाहक अधिकारी हैं।)

 

Tags :

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

thirteen + 2 =