शिक्षा, परीक्षा और युवाओं के भविष्य का सवाल
जिस समाज में मेहनत की जगह शॉर्टकट को और ईमानदारी की जगह ‘जुगाड़’ को महत्व मिलेगा, वहां पेपर लीक परीक्षा-केंद्र तक सीमित घटना नहीं रहेगा। वह धीरे-धीरे स्वीकार्य सामाजिक व्यवहार में बदल जाएगा। याद रखिए शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार नहीं, मनुष्य और समाज के बीच एक जागरूक, उत्तरदायी संबंध बनाना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में भरोसा दिया है, ‘देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है’। यह आश्वासन स्वागतयोग्य है। मौजूदा वक्त भी ऐसे ही भरोसे की मांग करता है। पर सवाल यह है कि युवाओं के भविष्य की यह चिंता ज़मीन...