भारत में शिक्षा की दुर्दशा

75 साल की आजादी के बावजूद एशिया के छोटे-मोटे देशों के मुकाबले भारत क्यों पिछड़ा हुआ है, इसका मूल कारण यह है कि हमारी सरकारों ने शिक्षा और चिकित्सा पर कभी समुचित ध्यान दिया ही नहीं।

शिक्षा और चिकित्साः जबानी जमा-खर्च

पिछले 75 साल में भारत में शिक्षा का ढांचा वही है, जो लगभग 200 साल पहले अंग्रेजों ने भारत पर थोप दिया था। उनकी शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ जी-हुजूर बाबुओं की जमात खड़ी करना था।

शिक्षा में गिरावट, किसी की नजर नहीं

कोरोना वायरस की महामारी से सवा पांच लाख लोग मरे या 47 लाख लोगों की मौत हुई, इस पर बहस चल रही है।

सार्वजनिक शिक्षा स्वास्थ्य का लौटेगा दौर!

आज सरकारें सामाजिक विकास पर ध्यान देंगी और उस पर खर्च बढ़ाएंगी तो आने वाले समय में आर्थिक व औद्योगिक विकास की मजबूत बुनियाद बनेगी।

सहानुभूति की जरूरत है

भारत में निजी क्षेत्र में मेडिकल और इंजीनियरिंग के कॉलेज बड़ी संख्या में हैं। लेकिन निजी क्षेत्र के उन कॉलेजों में पढ़ना सबके वश की बात नहीं है।

शिक्षा से ही सब समाधान

शिक्षा एक ऐसा मार्ग है, जो हमें सत्यासत्य के साथ-साथ हित-अहित के निर्णय करने की कसौटी भी प्रदान करता है।

शिक्षा और चिकित्सा पर ध्यान जरुरी

भारत में शिक्षा और चिकित्सा की जितनी दुर्दशा है, उतनी तो कुछ पड़ौसी देशों में भी नहीं है।

शराब  बनाम  शिक्षा व स्वास्थ्य

शराब दुकानों की बाढ़ से मध्यम वर्ग भारी चपेटे में आएगा। प्रभाव सरकार के फ्लैगशिप कार्यक्रम शिक्षा व स्वास्थ्य पर होगा।

Madhy pradesh : शादी के बाद की पढ़ाई से नाराज था ससुर, काट दिए बहू के दोनों हाथ…

मध्य प्रदेश के विदिशा में रहने वाले ससुर ने अपनी बहू के दोनों हाथ तलवार से काट दिए. अचानक से हुए इस हमले में बहू…

Report : कोरोना के बाद देश के सरकारी स्कूलों में बढ़ी अभिभावकों की रूची, उत्तर प्रदेश में…

पिछले तीन साल में छात्रों का झुकाव निजी स्कूलों से सरकारी स्कूलों की ओर बढ़ा है. इसमें भी उत्तर प्रदेश और केरल के सरकारी…

मुसलमान सोचें अपने असल मसले पर

ध्यान रहे कि भारत के मुसलमानों में शिक्षा की क्रान्ति करने वाले सर सैयद ने भी हमेशा एजुकेशन नहीं, मार्डन एजुकेशन की बात की थी और जब कोई सोच भी नहीं सकता था

Social Media Virel : क्या आपने देखा MA अंग्रेजी चाय वाली की दुकान, सोशल मीडिया में हो रही है वायरल…

कोलकाता की रहने वाली टुकटुक दास इन दिनों सोशल मीडिया में छाई हुई हैं. टुकटुक के माता पिता चाहते थे कि वह पढ़ लिख कर कोई बड़ा काम करे..

बच्चे पढ़ें तो कैसे?

तो जाहिर है, शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए शिक्षकों के रोजगार की शर्तों और ग्रामीण इलाकों में काम करने की स्थिति में सुधार करने की अविलंब आवश्यकता है।

दीपावली की छुट्टियों के लिए डोटासरा ने खोला दिल, 10 दिन की होंगी छुट्टियां

दीपावली की छुट्टियों को लेकर निकाले गए आदेश में संशोधन करते हुए शिक्षा मंत्री गोविंदसिंह डोटासरा ने कहा है कि अब दीपावली की छुट्टियां 10 दिन की होंगी।

अब स्कूलों में बच्चे को तकलीफ हुई तो स्कूल जिम्मेदार, मान्यता हो सकती है रद्द

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने स्कूलों में छात्रों की सुरक्षा के लिए एक नीति तैयार की है। यह नीति छात्रों को किसी भी उत्पीड़न, शारीरिक चोट और मानसिक रूप से सुरक्षित रखने के लिए है।

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