Columnist
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श्रीराम आज भी क्यों प्रासंगिक?
श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व सर्वांगीण है। वे सफल राजनीतिज्ञ, कुशल कूटनीतिज्ञ
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न्यायपालिका संवैधानिक अधिकारों की संरक्षक
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची की जटिलता बढ़ती जा रही है और विचाराधीन श्रेणी के 60 लाख मतदाताओं में से जिनके नाम क...
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चुप्पी की छटपटाहट: ‘बयान’
फ़िल्म का सबसे भयावह पहलू उसका ‘विलेन’ नहीं, बल्कि उसका पूरा ‘सिस्टम’ है, जिसमें पंथ, सत्ता और ...
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इस युद्ध से ऊर्जा लॉकडाउन का डर!
युद्ध अब केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि ऊर्जा पाइपलाइनों और आर्थिक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी लड़ा जा...
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श्रीराम का मर्यादित जीवन
श्रीराम के जीवन का सबसे बड़ा आधार सत्य है। वाल्मीकि रामायण में उन्हें सत्यवादी और दृढव्रतः कहा गया है। श्रीराम को...
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भारत से गुजरती जलडमरूमध्य रेखा!
उन्नति के सतही चित्र के नीचे एक शांत, पर अधिक निर्णायक वास्तविकता मौजूद है
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क्यों एचपीवी वैक्सीन के दुष्प्रभावों को छिपाया?
पुस्तक के दावे के अनुसार वैक्सीन के छुपे नुकसान सोशल मीडिया या एंटी-वैक्सीन ग्रुप्स में फैल सकते हैं
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अमरीका-ईरान युद्ध से पूर्व सैनिक चिंतित
भारत को अपनी गलती सुधारनी चाहिए। तटस्थ रहकर शांति की बात करनी चाहिए। ईरान से संबंध वापसी सुधारने चाहिए। तेल आयात...
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भारतीय गुरुकुल परंपराः आदि से आधुनिकता तक का सफर
भारतीय सभ्यता में शिक्षा केवल जानकारी इकट्ठा करना नहीं, बल्कि संस्कार और आत्मबोध की एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया रही है...
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ईरान के निशाने पर अमेरिकी वर्चस्व का हर खंभा
लोगों की सोच में यह सवाल बना है कि अगर ईरान जैसी कमजोर शक्ति लड सकती है, तो ची...
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जंग ख़त्म, संघर्ष बाक़ी: ‘सूबेदार’
यह फ़िल्म युद्धभूमि से लौटे एक सैनिक की कहानी है, जो अपने ही समाज में मौजूद अन...