Columnist
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ध्वंस के पार खड़ा सोमनाथ
आक्रमणकारियों ने धन के लोभ में मंदिर को लूटा, लेकिन वे उस श्रद्धा को नहीं लूट सके जो लोगों के ह...
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शब्दवीर (डींग) हिन्दू परंपरा
अतः यह क्लासिक हिन्दू विकत्थन परंपरा है। बड़े-बड़े शब्द, छोटे-छोटे कर्म। मजबूत...
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जनता की जान की क़ीमत पर वीआईपी सुरक्षा क्यों?
भारतीय मूल का 38 वर्षीय हिमांशु गुलाटी नॉर्वे का तीसरी बार सांसद है और वहाँ का उप-कानून मंत्री भी। उसे कोई वीआईप...
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सीपीएम के सामने है जो असल सवाल
1967 के बाद ऐसी स्थिति आई है, जब देश के किसी भी राज्य में ऐसी सरकार नहीं है, जिसमें कोई
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बंगाल में सुवेंदु युग का आरंभ
संगठन के स्तर पर तृणमूल को चुनौती देना आसान नहीं था। सुवेंदु अधिकारी ने वह चुनौती भी दी और वैचारिक स्तर पर सांस्...
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एक थीं ममता और एक हैं राहुल
राहुल गांधी के फ़राख़-दिल मिज़ाज की बलैयां लेने का मन कर रहा है। पश्चिम बंगाल के चुनाव में राहुल कह रहे थे कि ममता बनर्जी क...
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बंगाल में आखिर हुआ क्या?
चुनाव का नैतिक सवाल आंकड़ों से बड़ा है। भाजपा के अनेक आलोचकों का प्रश्न यह नहीं कि ममता बनर्जी ...
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नेहरू निन्दा की इन्तिहा!
मिर्जा गालिब ने कहा था: "गर्मी सही कलाम में लेकिन न इस कदर / की जिस से बात उसने शिकायत जरूर की।" सो, किसी की नि...
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किन्नरों को वसूली का अधिकार नहीं: हाईकोर्ट
किन्नर समुदाय प्रायः अपने जजमानों से जबरन वसूली करता है। कभी-कभी तो वसूली का तरीका बहुत अभद्र होता है। जिसमें जज...
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पश्चिम बंगाल भी केसरिया रंग में
सम्मिलित निष्कर्ष है कि बंगाल में भारतीय जनता पार्टी का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा है और बंगाल के मतदाताओं ने परिवर...
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जो मुद्दे चुनाव पर छाये और जो गायब रहे
भारत की ढांचागत आर्थिक समस्याएं हैं। ऊपर से ईरान युद्ध से पैदा हुई चुनौतियां हैं,
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जनतंत्र को पलीता लगाने में क्या केजरीवाल पीछे थे?
लप्पड़ खाने के बाद रुआंसे घूम रहे केजरीवाल से भी तो यह पूछा जाना चाहिए कि पिछले साढ़े तेरह बरस से वे भारत के लोकतं...
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डोनाल्ड ट्रंप का सत्ता व्याकरण
डोनाल्ड ट्रंप इतिहास की दुर्घटना नहीं हैं; वे उन तनावों की सबसे तीखी अभिव्यक्त...