जनता किसको सुनाए अपना हाल
दुनिया के किसी भी सभ्य लोकतांत्रिक देश के नागरिक की असहायता ऐसी नहीं होगी, जैसी भारत महान के नागरिकों की है। उसकी कहीं सुनवाई नहीं है। ऐसा नहीं है कि यह स्थिति अभी हो गई है। पहले से ऐसा ही था लेकिन अब स्थिति ज्यादा खराब और गंभीर हो गई है। क्योंकि पहले कहीं सुनवाई नहीं होती थी तो नेताओं के यहां सुनवाई की उम्मीद होती थी। नेता बात सुनते थे क्योंकि उनको चुनाव लड़ने जाना होता था और जनता का वोट चाहिए होता था। लोग अपने पार्षद, विधायक और सांसद से शिकायत करते थे तो सुनवाई हो जाती थी।...